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श्री गणेशाय नमः अमृत भाग 838, प्रातः स्मरणीय संतो एवं प्रतिदिन इस अमृत रूपी मानसरोवर में सुन्दर हंस जैसे विहार करने वाले आप सभी आदरणीय को प्रभु श्रीराम का मन, कर्म एवं वचन से सेवक मानकर आपके चरणकमलोंमें मेरा एवं मेरे पुरे परिवार का कोटि -कोटि प्रणाम, आपका स्नेह रूपी आशीर्वाद हम सभी पर कल्पवृक्ष की छांव जैसा बना रहे तथा प्रभु के चरणों में हम सभी का नित्य नया प्रेमभाव पनपता रहे . जय जय कृपानिधान
श्री गणेशाय नमः अमृत भाग 838, प्रातः स्मरणीय संतो एवं प्रतिदिन इस अमृत रूपी मानसरोवर में सुन्दर हंस जैसे विहार करने वाले आप सभी आदरणीय को प्रभु श्रीराम का मन, कर्म एवं वचन से सेवक मानकर आपके चरणकमलोंमें मेरा एवं मेरे पुरे परिवार का कोटि -कोटि प्रणाम, आपका स्नेह रूपी आशीर्वाद हम सभी पर कल्पवृक्ष की छांव जैसा बना रहे तथा प्रभु के चरणों में हम सभी का नित्य नया प्रेमभाव पनपता रहे . जय जय कृपानिधान
श्री गणेशाय नमः अमृत भाग 838, प्रातः स्मरणीय संतो एवं प्रतिदिन इस अमृत रूपी मानसरोवर में सुन्दर हंस जैसे विहार करने वाले आप सभी आदरणीय को प्रभु श्रीराम का मन, कर्म एवं वचन से सेवक मानकर आपके चरणकमलोंमें मेरा एवं मेरे पुरे परिवार का कोटि -कोटि प्रणाम, आपका स्नेह रूपी आशीर्वाद हम सभी पर कल्पवृक्ष की छांव जैसा बना रहे तथा प्रभु के चरणों में हम सभी का नित्य नया प्रेमभाव पनपता रहे . जय जय कृपानिधान
