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राजस्थान की धरती पर स्थित चितौड़गढ़ केवल एक किला नहीं, बल्कि त्याग, स्वाभिमान और बलिदान का अमर प्रतीक है। इसे "जौहर भूमि" इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां मातृभूमि, धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए राजपूत क्षत्राणियों ने तीन बार जौहर किया।

1. प्रथम जौहर (1303 ई.)

जब रानी पद्मिनी के समय अलाउदीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ को घेरा, तब हजारों राजपूत महिलाओं ने सम्मान की रक्षा हेतु जौहर किया और वीरों ने साका कर रणभूमि में प्राण न्यौछावर कर दिए।

2. द्वितीय जौहर (1535 ई.)

रानी कर्णावती के नेतृत्व में बहादुर शाह के आक्रमण के समय फिर से जौहर हुआ और मेवाड़ के वीरों ने अंतिम सांस तक युद्ध किया।

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समाज की बेटी को बधाई नहीं दोगे ?

भिंड जिले की प्रतिभाशाली बेटी आशी तोमर ने कठिन परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर UPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त कर GST विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयनित होकर जिले और प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है।

यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि भिंड जिले की बेटियों और युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्रोत है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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25 साल का युवक 42 साल की 3 बच्चों की मां के साथ रह रहा था लिव इन में, 6 महीने से रह रही थी साथ..😱😱

हरियाणा के करनाल (मॉडल टाउन क्षेत्र की सैनी कॉलोनी) से एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद मामला सामने आया है। यहाँ चंडीगढ़ के रहने वाले 25 वर्षीय युवक रोहित कुमार का शव उसके ही कमरे में पंखे से लटका हुआ बरामद हुआ है। पुलिस जांच और परिजनों के आरोपों के मुताबिक, रोहित अपनी उम्र से 17 साल बड़ी और तीन बच्चों की मां के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। मौत से ठीक पहले दोनों के बीच फोन पर गंभीर बहस हुई थी, जिसके बाद रोहित ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

⏳ जब ड्यूटी पर नहीं पहुंचा रोहित — ऐसे खुला मौत का राज:
कोर्ट में करता था नौकरी: मूल रूप से चंडीगढ़ का रहने वाला रोहित कुमार (25 वर्ष) करनाल कोर्ट में काम करता था और यहाँ सैनी कॉलोनी में किराए पर रहता था। शनिवार को जब वह समय पर ड्यूटी नहीं पहुंचा, तो उसके साथी कर्मचारी ने उसे लगातार कई फोन किए।
दरवाजा तोड़ा तो सामने आई लाश: कोई जवाब न मिलने पर साथी कर्मचारी रोहित के कमरे पर पहुंचा। दरवाजा अंदर से लॉक था और अनहोनी की आशंका होने पर पड़ोसियों और पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा, तो अंदर रोहित का शव फंदे से लटका हुआ था। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

🤫 42 साल की महिला, 3 बच्चे और 'लिव-इन' की पूरी कहानी 👇
शादी में हुई थी मुलाकात: परिजनों ने पुलिस के सामने बेहद हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में एक शादी समारोह के दौरान रोहित की मुलाकात अपनी ही दूर की मौसी की बेटी पिंकी (42 वर्ष) से हुई थी, जो उत्तराखंड के नैनीताल की रहने वाली है।
खुद को बताती थी पत्नी: रोहित अविवाहित था, जबकि महिला 42 साल की थी और उसके तीन बच्चे हैं। परिजनों का आरोप है कि महिला ने रोहित को अपने प्रभाव में ले रखा था। वह करीब 6 महीने से करनाल में रोहित के साथ लिव-इन में रह रही थी और खुद को उसकी पत्नी बताती थी।

📞 5 जून की वो आखिरी कॉल और आत्मघाती जिद:
"करनाल आओ, नहीं तो फांसी लगा लूंगा": परिजनों के मुताबिक, 5 जून की रात को रोहित और पिंकी के बीच फोन पर किसी बात को लेकर बहुत तीखा विवाद हुआ था। रोहित ने महिला को तुरंत नैनीताल से करनाल आकर आमने-सामने बात करने की जिद पकड़ी थी।
बहस के बाद लगा ली फांसी: बातचीत के दौरान रोहित ने आवेश में आकर महिला को धमकी भी दी थी कि अगर वह नहीं आई, तो वह फांसी लगा लेगा। महिला उस रात करनाल नहीं पहुंची और गुस्से व अवसाद में आकर रोहित ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी।

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आरक्षण पर दिए गए मेजर जनरल जेडी बक्शी के बयान का कौन - कौन समर्थन करते है? अपनी राय कमेंट में जरूर दे।

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👶❤️
दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह कोई महल नहीं,
माँ की गोद होती है।
जब तक माँ का हाथ सिर पर रहता है,
हर डर छोटा लगता है और हर रात सुकून से गुजरती है।

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*।। तीये की बैठक।।*
*अत्यन्त दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी (बूआजी) श्रीमती गुल्ली देवी का देवलोकगमन शनिवार, 06 जून 2026 को हो गया है जिनकी तीये की बैठक सोमवार, 08 जून 2026 को निवास स्थान केश्यावाला में *सायं 40 से 50 बजे तक रखी गई है*

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"अपणी वेशभूषा, अपणी पहचान — यही उत्तराखंड की असली शान।" ✨
अपनी पारंपरिक "वेशभूषा, लोक संस्कृति और उत्तराखंड की गौरवशाली पहचान" को आत्मसात किए मातृशक्ति की यह उपस्थिति मन को विशेष आनंद देती है।
४ जून को अल्मोड़ा में "परिवर्तन शंखनाद रैली" में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी के विचारों को सुनने और लोकतंत्र के इस महापर्व में सहभागी बनने के लिए दूर-दूर से पहुंची हमारी बहनों का यह उत्साह उत्तराखंड की जागरूक चेतना का परिचायक है।
आप सभी का स्नेह, विश्वास और सहभागिता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

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