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कहते हैं कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी अपने चेहरे पर उस तनाव को नहीं आने देते थे, लेकिन चेतक ने जब उनकी गोद में सिर रखकर प्राण त्यागे, तो महाराणा एक बालक की भांति रोने लगे थे

ये मित्रता ऐसी थी जो स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर कर गई

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1582 ई. में विजयादशमी के पवित्र दिन 'मेवाड़ का मैराथन' कहे जाने वाले दिवेर के युद्ध में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने अकबर के सेनापति सुल्तान खां को परास्त कर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी
पेंटिंग में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप द्वारा सुल्तान खां के हाथी का कुम्भ फोड़ते हुए दिखाया गया है
जब सुल्तान खां ने घोड़े पर बैठकर युद्ध लड़ना प्रारंभ किया तो कुंवर अमरसिंह के भाले के भीषण प्रहार ने उसे घोड़े समेत मौत के घाट उतार दिया
इस विजय का परिणाम ऐसा रहा कि एक ही वर्ष में मेवाड़ी बहादुरों ने 36 मुगल थाने उखाड़ फेंके
दिवेर विजय की स्मृति के लिए दिवेर (राजसमन्द) में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का भव्य स्मारक स्थित है
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत

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