image

image

image

image
3 ans - Traduire

भस्म उड़ा कर मिट्टी की, सर हाथी के चढ़ जाता था।
राणा प्रताप तेरा घोड़ा भी रजपूती धर्म निभाता था ।।

चेतक की हस्ति मिटा सकें अकबर तेरी औकात नहीं।
मेरे ह्रदय में राणा धड़कता है जिसका तुमको आभास नही ।।

रामप्रसाद से हाथी ने जीवन को अर्पित कर डाला ।
सौगंध वीर महाराणा की एक कण भी मुख में नही डाला।

रोइ थी हल्दी घाटी मंजर रक्त विलीन था।
दिल्ली की गद्दी कंपि है जिसपर अकबर आसीन था।।

चीख पड़ी है हल्दी घाटी चेतक अध बेहोश है।
अखंड सौर्य ले उड़ा है चेतक मृत्यु तक ख़ामोश है।।

हरण करे तलवार प्राण जिन्हें बरन करे म्रत्यु रानी।
लाखों जाने अर्पित हैं चेतक को छोड़ दे महारानी।।

image
3 ans - Traduire

'जिमि सरिता सागर महुं जाही।
जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएं।
धरमसील पहिं जाहिं सुभाएं।।'
मंत्र बालकांड से लिया गया है. इसका मतलब यह है कि नदियां बहती हुई सागर की ओर ही जाती हैं, चाहे उनके मन में उधर जाने की कामना हो या नहीं. ठीक उसी तरह, सुख-संपत्ति भी बिना चाहे ही धर्मशील और विचारवान लोगों के पास चली आती हैं.
लक्ष्मी 'चंचला' बताई गई हैं. ऐसी मान्यता है कि वे हमेशा के लिए एक जगह टिककर नहीं रहती हैं. लेकिन जिन घरों में लोग एक-दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक, शांति व संतोष से रहते हैं, वहां लक्ष्मी स्थाई रूप से बस जाती हैं.

image
3 ans - Traduire

NERU 🔥
FROM 21 DECEMBER

image
3 ans - Traduire

Malaikottai Vaaliban🔥

image

image

image