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"बर्मा नहीं है जो निकल जाएंगे 35 करोड हैं हलक में अटक जाएंगे, मोदी, शाह सुधर जाओ या गुजर जाओ"
बुरा लग रहा है क्या बैनर पढ कर?
सही तो लिखा है इन मजहबी कीटाणुओं ने। ये हमें भविष्य का आईना ही तो दिखा रहे हैं। यही तो समझा रहे हैं कि अभी आबादी कम है तब भी हलक में अटक रहे हैं।
जिस दिन आबादी बढ़ जाएगी, उस दिन से काफिरों का कत्लेआम करेंगे, उनकी बहन बेटियों के साथ बला त्कार करेंगे। यही तो समझा रहे हैं कि तुम फ्री के चक्कर में हमारी समर्थित सरकार को चुनते रहो और फिर एक दिन तुम्हारी जमीन मकान सब हमारे होगें,
बस थोड़ा आबादी तो बढने दो..
और कौन सी नई बात लिखी है बैनर पर। इतिहास गवाह रहा है। लेकिन दोगले हिंदू कभी नहीं सुधरोगे।
दोगलों को फ्री की दो रोटियाँ डालो और वो पीछे पुछ हिलाते हुए आओगे। बस थोड़ी सी आबादी तो बढने दो।