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उत्तराखंड में अल्मोडा जिले के मौलेखाल गांव के एक साधारण चाय विक्रेता शंभू दयाल आज अपनी असाधारण भक्ति के कारण चर्चा में हैं।

दिनभर चाय की दुकान चलाने वाले शंभू दयाल अपने खाली समय में कुछ ऐसा करते हैं, जो हर किसी को हैरान कर देता है—वे नोटबुक में बार-बार भगवान राम का नाम लिखते हैं।

शंभू दयाल का दावा है कि
📚 पिछले 35 वर्षों में 250 नोटबुक भर चुके हैं
🕉️ और इनमें उन्होंने करीब 35 करोड़ बार “राम” नाम लिखा है

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देहरादून में नदी पार करने के अभ्यास के दौरान, भारतीय सेना के जांबाज कैप्टन प्रशांत चौरसिया (140वां एनडीए कोर्स) अपने साथियों की जान बचाते हुए शहीद हो गए। तेज बहाव में फंसे जवानों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में वे स्वयं बह गए। उनके इस सर्वोच्च बलिदान को देश सलाम करता है। 🇮🇳🙏
शहीद प्रशांत चौरसिया को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 💐
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राजकीयः प्राथमिकः विद्यालयः- भैस्वाड़ा 🏫
विकासः क्षेत्रम - पाबौ, पौड़ी गढ़वाल

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राजकीयः प्राथमिकः विद्यालयः- भैस्वाड़ा 🏫
विकासः क्षेत्रम - पाबौ, पौड़ी गढ़वाल

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राजकीयः प्राथमिकः विद्यालयः- भैस्वाड़ा 🏫
विकासः क्षेत्रम - पाबौ, पौड़ी गढ़वाल

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आदिशक्ति के छठे स्वरूप, अजेय शक्ति और अपार तेज की प्रतीक माँ कात्यायनी के पूजन की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

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बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSE के इंटरमीडिएट 2026 के नतीजों में नवादा जिले की एक और प्रतिभा ने राज्य स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है. जिले के कौआकोल थाना क्षेत्र के छोटे से गांव नावाडीह की रहने वाली सपना कुमारी ने साइंस स्ट्रीम में पूरे बिहार में दूसरा स्थान (रैंक-2) प्राप्त किया है. साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली सपना की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि मेहनत के आगे संसाधन कभी बाधा नहीं बनते.

सपना कुमारी नवादा के कौआकोल प्रखंड के नावाडीह गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता सुधीर चौरसिया गांव में ही एक छोटी सी किराना की दुकान चलाते हैं. एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सपना शुरू से ही पढ़ाई में काफी अनुशासित और होनहार रही हैं. उनकी सफलता की खबर मिलते ही पूरे नावाडीह गांव और नवादा जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है. परिवार और रिश्तेदारों का उनके घर बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है.

सपना के पिता सुधीर चौरसिया मेहनत-मजदूरी और अपनी छोटी सी दुकान के जरिए परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी बेटी की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी. पिता के संघर्ष को देखते हुए सपना ने तय किया है कि वह आगे चलकर डॉक्टर बनेंगी. उनका सपना है कि वे चिकित्सा के क्षेत्र में जाकर गरीब और जरूरतमंद समाज की सेवा करें.सपना ने बताया कि उनकी सफलता का कोई 'शॉर्टकट' नहीं था. उन्होंने गांव में रहकर ही नियमित पढ़ाई, कड़े अनुशासन और शिक्षकों के नोट्स पर भरोसा किया. उनके अनुसार, सेल्फ-स्टडी और टॉपिक्स को गहराई से समझना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही.

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