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कांग्रेस देश का क्या हाल बनाना चाहती है
यह बहुत चिंताजनक ओर डरावना है...!
हमारे देश मैं कांग्रेस पार्टी ने 65 साल तक राज किया,सत्ता चलाई,और संविधान को ओर लोकतंत्र को ताक पर रख कर चलाई,क्यों कि कांग्रेस को यह गुमान था कि देश मैं ऐसी कोई पार्टी या संगठन इतना मजबूत नहीं पाएगा जो हम से सत्ता छीन सके,
ओर यही सोच को ध्यान में रखते हुए इमर जेंसी देश पर थोपना हो या देश का विभाजन करना हो या वक्फ बोर्ड जैसे जमीन पर कब्जा करने वाले बोर्ड बनाना हो यह सब इसी सोच की उपज का कारण बना,
जब तक देश मैं कांग्रेस ओर उसके समर्थित पार्टियों की सरकार रही उन्होंने कभी जनता की आवाज को सरकार के खिलाफ उठने का मौका नहीं दिया जो सरकार चाहती जो कानून लाना चाहती ले आती थी,
लेकिन साल 2014 मैं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आने के बाद सरकार जनता के हित मैं कानून लाती रही ओर जहां जनता को भरोसे की कमी नजर आई जनता ने पुर जोर विरोध भी किया,
ओर सरकार ने ससम्मान उस विरोध के बाद या तो कमेटी बनाकर या प्रतिनिधि को सहमति के साथ संशोधन ओर लागू किया,
अब कांग्रेस ओर उनके इंडी गठबंधन के सहयोगी केंद्र की सत्ता मैं आने का तो सोच नहीं सकते लेकिन अब वह राज्यों की सरकार मैं आके राज्यों में अपने दबाव की ओर तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रहे है,
जिसका जीता जागता उदाहरण तेलंगाना और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार है
इन दोनों ही राज्यों मैं कांग्रेस के खुराफाती सोच वाले युवराज के आदेश पर हिंदू और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है,
इन दोनों राज्यों में जब से कांग्रेस सत्ता में आई तब से ही हिन्दू विरोधी कानून ओर हिन्दू के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग ओर हिन्दू मंदिरों के पैसों को खुलकर मुस्लिम वोट बैंक के लिए उड़ाया जा रहा है,
पहले कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य के किसी भी सरकारी टेंडर मैं 4प्रतिशत की आरक्षण की घोषणा की गई,
उसके बाद तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा के द्वारा 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण की घोषणा की गई,
लेकिन इन दोनों राज्यों मैं ना कोई संगठन के द्वारा आवाज उठाई गई ना किसी जाति वाद के रक्षकों के द्वारा उठाई है केवल भारतीय जनता पार्टी ने वहां की सरकार का विरोध किया,
क्यों कि आज जो UGC कानून संशोधन पर नरेंद्र मोदी सरकार को दोषी मान रहे है उनके लिए इन कांग्रेसी तुष्टिकरण सरकार के खिलाफ बोलने के लिए या तो मन नहीं है या तो वो ठीक समझते नहीं है,
जैसे ही UGC संशोधन की बात आई तो जो दिन भर नरेंद्र मोदी सरकार के नाम की माला जपते थे वो भी मोदी को गाली देने लगे उनका राष्ट्र प्रेम ओर सनातन हिन्दू प्रेम उसी वक्त समाप्त हो गया,
फिर तो यहां तक कि मोदी को 2029 मैं प्रधानमंत्री ना बनने देने की बात करने लगे,
लेकिन जो अपने आप को मोदी से ऊपर समझ बैठे थे वो ये भूल गए कि मोदी ही है जो हिंदुत्व के बारे मैं सोचता है,
माना गलती हुई है लेकिन लोग ये क्यू भूल गए कि ये सब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोदी सरकार को करना पड़ा,
एक बात जरूर ध्यान रखें
मोदी को सरकार से हटा दोगे तो वो लोग सत्ता मैं आयेंगे
जिनके लिए आप ना सवर्ण हो ना पिछड़े ना ही दलित
उनके लिए आप सिर्फ ओर सिर्फ हिंदू हो ओर वो हिन्दू विरोधी।
भारत मराठा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की रचनात्मकता को निखारने का नायाब उपकरण
केडी विश्वविद्यालय में एआई के प्रभाव पर विद्वतजनों से साझा किए अनुभव
मथुरा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जो कभी एक चर्चित शब्द हुआ करती थी, अब हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार दे रही है और उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धि का विकल्प नहीं है लेकिन यह मानव रचनात्मकता और प्रतिभा को बढ़ाने का एक नायाब उपकरण जरूर है। उक्त सारगर्भित उद्गार केडी विश्वविद्यालय द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव विषय पर आयोजित सम्मेलन में अतिथि वक्ताओं ने व्यक्त किए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की रचनात्मकता को निखारने का नायाब उपकरण
केडी विश्वविद्यालय में एआई के प्रभाव पर विद्वतजनों से साझा किए अनुभव
मथुरा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जो कभी एक चर्चित शब्द हुआ करती थी, अब हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार दे रही है और उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धि का विकल्प नहीं है लेकिन यह मानव रचनात्मकता और प्रतिभा को बढ़ाने का एक नायाब उपकरण जरूर है। उक्त सारगर्भित उद्गार केडी विश्वविद्यालय द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव विषय पर आयोजित सम्मेलन में अतिथि वक्ताओं ने व्यक्त किए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव की रचनात्मकता को निखारने का नायाब उपकरण
केडी विश्वविद्यालय में एआई के प्रभाव पर विद्वतजनों से साझा किए अनुभव
मथुरा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जो कभी एक चर्चित शब्द हुआ करती थी, अब हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार दे रही है और उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धि का विकल्प नहीं है लेकिन यह मानव रचनात्मकता और प्रतिभा को बढ़ाने का एक नायाब उपकरण जरूर है। उक्त सारगर्भित उद्गार केडी विश्वविद्यालय द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव विषय पर आयोजित सम्मेलन में अतिथि वक्ताओं ने व्यक्त किए।
