إستكشف المشاركات استكشف المحتوى الجذاب ووجهات النظر المتنوعة على صفحة Discover الخاصة بنا. اكتشف أفكارًا جديدة وشارك في محادثات هادفة
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज का मानना था कि ईश्वर की सच्ची सेवा प्रेम और करुणा के साथ मानवता की सेवा करके ही प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दूसरों की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। इसका तात्पर्य यह है कि व्यक्ति केवल आध्यात्मिक विकास हेतु समाज की भलाई के लिए खुद को समर्पित करके परमात्मा से जुड़ सकता है। कृपालु जी महाराज के दर्शन में प्रेम और करुणा के साथ दूसरों की सेवा करना न केवल एक नैतिक दायित्व है बल्कि आंतरिक शांति और आध्यात्मिक पूर्णता प्राप्त करने का एक साधन भी है। उनका मानना था कि सच्ची सेवा किसी स्वार्थ से प्रेरित नहीं होती बल्कि दूसरों की पीड़ा को कम करने की सच्ची इच्छा से उत्पन्न होती है। संक्षेप में, कृपालु जी महाराज की शिक्षाएँ व्यक्तियों को उनकी परम आध्यात्मिक क्षमता को साकार करने के मार्ग के रूप में निस्वार्थ सेवा का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।