पश्चिम बंगाल में स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय दुनिया की पहली लिविंग हेरिटेज यूनिवर्सिटी बनी

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यूनाईटेड अरब अमीरात के सदर "शैख़ मुहम्मद बिन ज़ायेद अल-नहयान" ने तुर्की और सीरिया में आए ज़लज़ले से मची तबाही के बाद तुर्की और सीरिया के लिए 100 मिलियन डॉलर की मदद करने का ऐलान किया है।

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तुर्की और सीरिया में आए ज़लज़ले से मची तबाही के बाद दुनियाभर की कंट्रीज़ अपने स्तर से तुर्की और सीरिया में मदद पहुंचा रही हैं। भारत की एनडीआरएफ़ टीम भी तुर्की पहुंची हुई है। भारतीय एनडीआरएफ़ टीम की तुर्की में लोगों की मदद करती तसावीर..

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तुर्की और सीरिया में आए ज़लज़ले से मची तबाही के बाद दुनियाभर की कंट्रीज़ अपने स्तर से तुर्की और सीरिया में मदद पहुंचा रही हैं। भारत की एनडीआरएफ़ टीम भी तुर्की पहुंची हुई है। भारतीय एनडीआरएफ़ टीम की तुर्की में लोगों की मदद करती तसावीर..

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तुर्की और सीरिया में आए ज़लज़ले से मची तबाही के बाद दुनियाभर की कंट्रीज़ अपने स्तर से तुर्की और सीरिया में मदद पहुंचा रही हैं। भारत की एनडीआरएफ़ टीम भी तुर्की पहुंची हुई है। भारतीय एनडीआरएफ़ टीम की तुर्की में लोगों की मदद करती तसावीर..

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तुर्की और सीरिया में आए ज़लज़ले से मची तबाही के बाद दुनियाभर की कंट्रीज़ अपने स्तर से तुर्की और सीरिया में मदद पहुंचा रही हैं। भारत की एनडीआरएफ़ टीम भी तुर्की पहुंची हुई है। भारतीय एनडीआरएफ़ टीम की तुर्की में लोगों की मदद करती तसावीर..

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यह थे पण्डित
#श्रीराममंदिर_रक्षक_पण्डित_देवीदीन_पाण्डे
पंडित देवीदीन जो सनेथू गांव अयोध्या के रहने वाले थे, जिनका जन्म सर्यूपारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वो एक कर्मकांडी पुरोहित थे लेकिन जब मुग़ल सेना राममंदिर को ध्वस्त करने के उद्देश्य से अयोध्या की ओर बढ़ी तब पण्डित देवीदीन पाण्डे ने पुरोहित का कार्य त्यागकर आसपास के ब्राह्मणों व क्षत्रियों को लेकर बाबर सेना के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए हथियार उठा लिया और मीर बाकी के नेतृत्व वाली मुगल सेना से युद्ध किया।
ये युद्ध इतना विकराल था की युद्ध करते समय पण्डित जी ने ७०० मुगलों को अपने हाथों से काट डाला। एक मुगल सैनिक ने पण्डित जी के पीछे आकर तलवार से ऐसा वार किया कि वह तलवार पण्डित जी का ऊपरी सर काटते हुए आर-पार हो गई और उनका सिर दो भागों में फट कर खुल गया। लेकिन उन्होंने अपने गमछे से सर को बांधकर लड़ाई लड़नी शुरू कर दी और अंत में मुगल सैनिकों द्वारा एक के बाद एक किये गए वार से वे काफी घायल हुए और वहीं पर वीरगति को प्राप्त हुए !
सेनापति देवीदीन के वीरगति प्राप्त हो जाने के बाद मुगल सेना जीत गई ! पण्डित जी ने अपने जीवित रहते श्रीराममंदिर को आंच नहीं आने दी। इतिहासकार कनिंघम अपने 'लखनऊ गजेटियर' के 66वें अंक के पृष्ठ 3 पर लिखता है कि 1,74,000 हिन्दुओं की लाशें गिर जाने के पश्चात मीर बाकी राममंदिर ध्वस्त करने के अभियान में सफल हुआ।
किसको गलतफहमी है कि ब्राह्मण हथियार उठाने में कमजोर है!!!मैं प्रत्यक्ष उदाहरण हूँ, धर्मरक्षण हेतु जीवन समर्पित है और जिसने मृत्यु का वरण किया उसके समक्ष टिकना असंभव तो नहीं लेकिन मुश्किल बहुत ही ज्यादा है।

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Daniel Rosyse إنشاء مقالة جديدة
3 سنوات - ترجم

Top benefits of building a deck | #swimming #wood pool #composite decking

Daniel Rosyse غير صورته الشخصية
3 سنوات

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