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आज के दिन क्रांतिवीर खुदीराम बोस को फाँसी दी गई थी। वे मात्र 18 वर्ष के थे। कोई देशद्रोही ही होगा जो आज अंतिम बार इन्हें श्रृद्धाजंलि देकर नहीं जाएगा।

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सर्दी से बचने के लिए बा/ली अंगूठी बनी 'का/ल'
#tarntaran #punjab #smoke #husband #wife #latestnews

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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले एकजुट होकर आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है।गुरुवार को प्रेस क्लब देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंच से जुड़े संगठनों ने 10 जनवरी को गांधी पार्क से मशाल जुलूस और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का एलान किया। साथ ही सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से समर्थन देने की अपील की।
महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत ने कहा कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआइपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश में भी वीआइपी का उल्लेख है और अंकिता व उसके मित्र के बीच हुई व्हाट्सएप चैट में भी इसका जिक्र सामने आया है। लेकिन एसआइटी ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में पूरे मामले की सीबीआइ जांच की मांग दोहराई। यह आरोप लगाया कि मामले में रोज नए घटनाक्रम, नए चेहरे सामने आ रहे हैं, लेकिन बचाव की मुद्रा में है।उन्होंने वनंतरा रिजॉर्ट में साक्ष्य नष्ट किए जाने के मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि साक्ष्य किसके निर्देश पर और किन लोगों द्वारा मिटाए गए। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने सरकार पर मामले को भटकाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता लगातार सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह कहना कि यदि माता-पिता चाहेंगे तो जांच कराई जाएगी, केवल टालने वाला बयान है।आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, इसके बावजूद इसे प्रदेश का माहौल बिगाड़ने वाला बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह किसी एक दल या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता की लड़ाई है।
संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्यों ने बताया कि वे गुरुवार सुबह अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले। अंकिता का नाम आते ही आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं और परिवार भविष्य की चिंताओं से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा अंकिता के परिवार की मदद के लिए सरकारी घोषणाओं की प्रगति भी बताई जाए।
पत्रकार वार्ता में गढ़वाल सभा के सचिव गजेंद्र भंडारी, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल, उक्रांद प्रवक्ता शांति भट्ट, ज्ञान विज्ञान समिति से उमा भट्ट, उत्तराखंड समानता पार्टी के राष्ट्रीय महासिचव टीएस नेगी और अखिल भारतीय समानता मंच के प्रदेश अध्यक्ष विनोद धस्माना सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
#dehradun #ankitabhandaricase #uttarakhand

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अंकिता भंडारी के माता-पिता पहले ही बहुत कुछ झेल चुके हैं, वो अभी भी असहनीय पीड़ा में हैं, उन पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उनका दिल और मत दुखाओ!
अंकिता की माँ ने कहा - "जिस VIP के लिए मेरी बेटी की जान ली गई, उसे हमारे सामने लाया जाए। हम भी उस VIP को देखें — आखिर कौन है वो, जिसके कारण मेरी अंकिता आज हमारे बीच नहीं है।"
वो आगे बोलती हैं कि हम माँ-बाप हैं ना! हमको तो अपनी औलाद से बढ़कर कुछ नहीं है। हम तो बोलते हैं कि अगर इसमें हमारी जान भी चली जाए तो हमें कोई गम नहीं। क्योंकि हमारी बेटी ने हमारे साथ रहते हुए गरीबी के दिन देखे, बहुत दुख झेले। जब उसके सुखी के दिन आने वाले थे, तो आप सबको पता है। हमने उसका बचपन देखा है, हमारे बच्चे एक छोटी सी चीज के लिए भी तरसे हैं, लेकिन आज हम इतने दुखी हैं कि हम बोल भी नहीं पाते हैं। उसके भाई ने अब तक राखी नहीं बांधी और तब तक नहीं बांधेगा, जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिल जाता। हम भी इसीलिए कोई त्यौहार नहीं मनाते। जब हमारी बेटी ने अपनी आखिरी सांस तक अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया, तो हम कैसे कर सकते हैं!"
आगे वो कहते हैं कि हमारी बेटी तो चली गई, वो अब लौटकर वापस नहीं आएगी। लेकिन ये लड़ाई हम उन बेटियों के लिए लड़ रहे हैं, जो घर से दूर पढ़ने-लिखने, नौकरी करने जाएंगी, और उनके साथ ऐसा न हो, जैसा हमारी अंकिता है साथ हुआ।"
सीएम से मुलाकात के बाद अंकिता के माता–पिता ने अपना दुःख व्यक्त करते हुए बताया कि कुछ लोग उन पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं कि वो बिक गए!
ऐसा नहीं है कि उन पर कभी कोई दबाव नहीं बनाया गया होगा, लेकिन जिनकी बेटी ने म-रते दम तक समझौता नहीं किया, उसके माँ-बाप भी कभी समझौता नहीं कर सकते।

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हरिद्वार में पंजाबी समाज द्वारा आयोजित 26वें लोहड़ी महोत्सव में मा. राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh जी की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया।
लोहड़ी पर्व सांस्कृतिक चेतना, भाईचारे और मानवता के मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे लोकपर्व समाज को एक सूत्र में बाँधते हुए राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं तथा विकसित भारत–2047 के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
Madan Kaushik Adesh Chauhan

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हरिद्वार में पंजाबी समाज द्वारा आयोजित 26वें लोहड़ी महोत्सव में मा. राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh जी की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया।
लोहड़ी पर्व सांस्कृतिक चेतना, भाईचारे और मानवता के मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे लोकपर्व समाज को एक सूत्र में बाँधते हुए राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं तथा विकसित भारत–2047 के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
Madan Kaushik Adesh Chauhan

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हरिद्वार में पंजाबी समाज द्वारा आयोजित 26वें लोहड़ी महोत्सव में मा. राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh जी की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया।
लोहड़ी पर्व सांस्कृतिक चेतना, भाईचारे और मानवता के मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे लोकपर्व समाज को एक सूत्र में बाँधते हुए राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं तथा विकसित भारत–2047 के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
Madan Kaushik Adesh Chauhan

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हरिद्वार में पंजाबी समाज द्वारा आयोजित 26वें लोहड़ी महोत्सव में मा. राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh जी की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया।
लोहड़ी पर्व सांस्कृतिक चेतना, भाईचारे और मानवता के मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे लोकपर्व समाज को एक सूत्र में बाँधते हुए राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं तथा विकसित भारत–2047 के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
Madan Kaushik Adesh Chauhan

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✊ जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलेगा—यह आवाज़ थमेगी नहीं। ✊
#ankitabhandari हत्याकांड की #cbi जाँच कराने की माँग को लेकर #congress पार्टी द्वारा राज्य भर में चलाए जा रहे आंदोलन के तहत मेरा विधानसभा ऋषिकेश एवं डोईवाला का पदयात्रा कार्यक्रम
“अंकिता भंडारी को न्याय दो – पदयात्रा”
🗓️ दिनांक: 09 जनवरी, 2026
⏰ दोपहर 20 बजे
📍 विधानसभा ऋषिकेश — ऋषिकेश बाजार में पदयात्रा
⏰ सायं 4:30 बजे
📍 विधानसभा डोईवाला — श्री गुरुद्वारे से शुगर मिल तक पदयात्रा
✊ जब तक न्याय नहीं — तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ✊
#justiceforankitabhandari
#ankitabhandarikonyaydo #cbiinquiry #incuttarakhand

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दुनिया का सबसे, लंबा शिवलिंग ,पहुंचा बिहार, आस्था में डूबा पूरा इलाका

बिहार के पूर्वी चंपारण, (मोतिहारी) ज़िले में इन दिनों आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा है। दुनिया का सबसे लंबा ,और विशाल शिवलिंग अब चंपारण की धरती पर प्रवेश कर चुका है। करीब 210 मीट्रिक टन वजनी, यह भव्य शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया था, जिसे अब केसरिया ,प्रखंड के कैथवलिया स्थित नवनिर्मित विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाना हैl
करीब 33 फुट ऊंचा और 33 फुट लंबा यह दिव्य शिवलिंग 45 दिनों में लगभग, 2378 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर गोपालगंज से होते हुए पूर्वी चंपारण की सीमा में दाखिल हुआ। इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती गोपालगंज, और चंपारण को जोड़ने वाला डुमरियाघाट पुल रहा, जो पहले से ही जर्जर स्थिति में थाl। लेकिन जिला प्रशासन, अभियंताओं और तकनीकी टीम की संयुक्त तत्परता से बिना किसी क्षति के इतने भारी वाहन को सुरक्षित पार करा लिया गयाll

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