हमारे #सनातन धर्म का दर्शन कराती अति सुंदर घड़ी।।
120 बजने के स्थान पर आदित्य लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं।
10 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है ।एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।
20 बजने की स्थान पर अश्विन और लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।
30 बजने के स्थान पर त्रिगुणः लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं ---- सतोगुण रजोगुण तमोगुण।
40 बजने के स्थान पर चतुर्वेद लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद।
50 बजने के स्थान पर पंचप्राणा लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं ।
60 बजने के स्थान पर षड्र्स लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं ।
70 बजे के स्थान पर सप्तर्षि लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं ।
80 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धियां लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है ।
90 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं।
100 बजने के स्थान पर दश दिशः लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है।
110 बजने के स्थान पर रुद्रा लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं।

image

कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है !
सोना
सोना एक गर्म धातु है ! सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है !
चाँदी
चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है ! शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है !
कांसा
काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है ! लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है ! कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं !
तांबा
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है !
पीतल
पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती ! पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं !
लोहा
लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है ! लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है ! लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है !
स्टील
स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता !
एलुमिनियम
एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है ! इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है ! यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए ! इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है ! उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है ! एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं !
मिट्टी
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे ! इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं ! आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए ! भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है ! दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन ! मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं ! और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है!✍🏻

image

image

image

जय श्री महाकाल!

image

image
दिल्ली में आफताब ने साथ रहने वाली प्रेमिका श्रद्धा के शरीर के कई टुकड़े कर दिल्ली में जगह-जगह फेंके।
6 महीने बाद हुआ खुलासा।

आफताब जिसने दिल्ली में इस प्रेमिका श्रद्धा को 35 टुकड़ों में काटा और 20 दिन तक ये टुकड़े दिल्ली के जंगल में फेंकता रहा।
श्रद्धा तुमने अपना प्यार पहचानने में बड़ी गलती कर दी।

image

बेटियां कभी अपने मां बाप के लिए बोझ नहीं होती है
जब हम किसी लड़की से शादी करते हैं तो उसकी
देखभाल की
जिम्मेदारी हमारी होती है लड़की की मां बाप की नहीं होती है
मर्द वही होता है जो रिश्तो में बराबर देखभाल रखें हम लोग ज्जबात मे‌ बहकर शादी तो कर लेते हैं
लेकिन शादी को निभाना भी है ऐ हम भूल जाते हैं इसके नतीजे कुछ ही महीनों में पति पत्नी के बीच दीवार खड़ी होनी चालू हो जाती हैं
ऐ दीवार खड़ा करने में लड़के के मां बाप का सबसे बड़ा हाथ होता है इनकी नजर मे ओ लड़की इनकी सबसे बड़ी दुश्मन होती है
शादी प्यार करके करें या मां-बाप की मर्जी से करें लेकिन लड़के के मां बाप उस लड़की को वक्त के तौर पर पसंद करते हैं
और अपनी रजामंदी का इजहार भी कर देते हैं लेकिन उनके दिल में ओ लड़की उनकी सबसे बड़ी दुश्मन होती है क्योंकि ऐ समझते हैं
कि ऐ है ओ लड़की जिसने हमसे हमारा बेटा छीना और लड़के के बेहन भी समझती हैं यही है वो लड़की जिसने हमसे हमारा भाई छीना। है फिर उसके बाद उस हंसते खेलते घर ऐसी तीली लगाती हैं कि जो लड़का कुछ महीने पहले अपनी पत्नी के साथ सारा दिन मोहब्बत की बातें करता था और अब उस लड़की का नाम सुन्ना भी पसंद नहीं करता और इसी तरह वो बसा बसाया घर कुछ ही महीनों में उजाड़ ने के करीब पहुंचा दिया जाता है और उस लड़की को उसके घर पहुंचा दिया जाता है बेटियां कभी अपने मां बाप के लिए बोझ नहीं होती है लेकिन मां-बाप अपनी बेटी का दुख बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और बेटी के ससुराल वालों के पैरों तक गिर जाते हैं और
ससुराल वाले ऐ समझते हैं की

image

थोङी क्षमा मेरे लिए भी रखिए
जिससे किसी को परेशानी हो या गलत लगे तो कृपया गलत कॉमेंट ना करें अगर आपको पसंद ना है तो माफी मांग रहा हूं
#नंगापन एक संक्रामक रोग है
यह अधिकतर कामुक अभिनेत्रियों व फूहङ बालाओं द्वारा फैलाया जाता है।
जब इच्छुक नारियां इनकी नग्नता को देखती हैं
तो यह विषाणु आंखों के माध्यम से उनके हृदय तक मार करता है। उनके मन में भी वही नंगापन करने की तीव्र इच्छा मचल जाती है
#रोग_के_लक्षण
@ऐसी औरतें नंगेपन को सभ्यता, विकास आजादी, व टेलैंट समझती हैं।
@ जिस नारी में गुणों का अभाव होता है या वो मेहनत नही चाहती वो #नंगेपन का सहारा लेकर दुनिया का ध्यान आकर्षित करती है
@नंगापन सभी नग्नातुर नारियों पर समान प्रभाव डालता है। जाति पाति, ऊंच नीच, गोरी काली ,सशक्त कमजोर, शिक्षित अशिक्षित, अमीर गरीब में कोई भेदभाव नही करता
बल्कि पेट भर जाने पर और पैसे आ जाने पर , प्रसिद्धि मिल जाने पर नंगेपन से प्रभावित होने के आसार अधिक होते है
@अपनी टांगों को रोज वैक्सिंग, रेजर से चमकाती है। ब्लीच से रोएं जलाकर खाल गोरी दिखाती हैं।
2000 ₹ की पुताई के बाद मुंह दिखाने लायक बनता है
@वस्त्र ये सोच कर पहनती है शरीर दिखाना अधिक है ढकना कम हैं।
@ कुछ गे (समलैंगिक) फैशन डिजाइनर जो मर्जी पोशाक बना दें, कहीं से भी फाङ दें। इन्हे वो पहननी जरूरी होती है मातृत्व और उत्सर्जन अंगों का ढका प्रदर्शन मुख्य उद्देश्य होता है।
@ कला के नाम पर मिनी स्कर्ट पहन कर टांगे चौङी करके नाचना बहुत आवश्यक समझती हैं।
@ऐसी नारी अपनी आयु छिपाती है और पूछने पर भङक जाती है। बहनजी और माता जी शब्द इन्हे अपमान लगते हैं।
@पर पुरूषो से उम्मीद करती हैं कि वो उनको देखते ही उनका प्रशंसक बन जाए।
@ पहले इन्हे नंगेपन को फैलाने के लिए सिनेमा और मीडिया जैसे मंच की जरूरत होती थी लेकिन अब टिकटाक और अन्य एप आने से ये अपने घर से ही इस कामुकतापूर्ण अभियान को बढावा देती हैं।
@कोई इनकी हरकतों को गलत कहे तो
ये उस व्यक्ति की सोच को तुच्छ और गलत बताती है और सोच बदलने की रटी रटाई सलाह देती हैं
@हर समय नारी स्वतंत्रता और नारी शोषण के मुददे का रोना रोती हैं इसकी आङ में नंगापन फैलाती हैं।
@विवाह के बाद अक्सर कोर्ट में पाई जाती हैं तलाक और यौन शोषण के फर्जी मुकदमों में।
@ इनके बच्चे किराए की कोख से पैदा होतें हैं दर्द ममता और चीखों का सौदा होता है।
@उम्र ढलने पर तथाकथित नारी उत्थान संस्थाओं में उच्च पदों पर काबिज मिलती है
राजनेताओं की सेवा करके
और नारी को हक दिलाने के फर्जी दावे करती हैं

image