जय मर्यादा पुरुषोत्तम राम🎪🚩♥️
जय श्री राम ♥️🎪🚩
https://m.facebook.com/story.p....hp?story_fbid=177910
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4700 Years Old Religious Objects Found In Indus Valley Civilization Sites of Mohenjo Daro, Harappa , Kalibanga , Banawali.
Now in National Museum , Delhi.
Har Har Mahadev 🙏
#ancient #sculpture #mahadev #sanatandharma #india
महान सम्राट #प्रथ्वीराज_चौहान की कुछ महान बातेँ''
(1) प्रथ्वीराज चौहान ने 12 वर्ष कि उम्र मे बिना किसी हथियार के खुंखार जंगली शेर का जबड़ा फाड़ ड़ाला ।
(2) चौहान ने 16 वर्ष की आयु मे महाबली नाहरराय को हराकर माड़वकर पर विजय प्राप्त करना ।
(3) चौहान ने तलवार के एक वार से जंगली हाथी का सिर धड़ से अलग कर देना ।
(4) महान सम्राट प्रथ्वीराज चौहान कि तलवार का वजन 84 किलौ होना और उसे एक हाथ से चलाना ।
(5) पशु-पक्षियो के साथ बाते करना अर्थार्त उनकी भाषा का ज्ञात होना ।
(6) प्रथ्वीराज चौहान का 1166 मे अजमेर की गद्दी पर
बैठना और दो वर्ष केबाद यानि 1168 मे दिल्ली के
सिहासन पर बैठकर पुरे हिन्दुस्तान पर राज करना ।
(7) गौरी को 16 बार हराकर जीवन दान देना और 16 बार कुरान की कसम का खिलाना।
(8) गौरी का 17 वी बार चौहान को हराना अपने देश ले जाना और चौहान का उसके राजदरबार मे अपनी आँखो का फड़वा लेना पर निचे ना करना ।
(9) गौरी का महान सम्राट को अनेको प्रकार कि पिड़ा
देना और कई महिनो तक भुखा रखना पर सम्राट का न मरना ।
(1 महान सम्राट की सबसे बड़ी बात जन्मसे शब्द भेदी बाण का ज्ञात होना ।
(11) चौहान का गौरी को उसी के भरे दरबार मे शब्द भेदी बाण से मारना ।
(12) गौरी को मारने के बाद मुल्लो के हाथो न मरना
अर्थार्त स्वंय को खुद मार लेना ।।। ।
जय वीर पुत्र प्रथ्वीराज चौहान🚩
जय माताजी री सा🚩
ना डरे,
ना जिम करे,
आशीष नेहरा हूं बेटा।
नारियल पानी पीते पीते ट्रॉफी जीत लू,
जब मेरा मन करे।।
🐐 कोच
आशीष नेहरा 🙌🏻
#ipl2022
मैं नहीं सिखा पाऊँगी अपनी बेटी को बर्दाश्त करना एक ऐसे आदमी को जो उसका सम्मान न कर सके।
कैसे सिखाए कोई माँ अपनी फूल सी बच्ची को कि पति की मार खाना सौभाग्य की बात है?
मैंने तो सिखाया है कोई एक मारे तो तुम चार मारो।
हाँ, मैं बेटी का घर बिगाड़ने वाली बुरी माँ हूँ, .........
लेकिन नहीं देख पाऊँगी उसको दहेज के लिए बेगुनाह सा लालच की आग में जलते हुए।
मैं विदा कर के भूल नहीं पाऊँगी, अक्सर उसका कुशल पूछने आऊँगी। हर अच्छी-बुरी नज़र से, ब्याह के बाद भी उसको बचाऊँगी।
बिटिया को मैं विरोध करना सिखाऊँगी।
ग़लत मतलब ग़लत होता है, यही बताऊँगी। देवर हो, जेठ हो, या नंदोई, पाक नज़र से देखेगा तभी तक होगा भाई।
ग़लत नज़र को नोचना सिखाऊँगी, ढाल बनकर उसकी ब्याह के बाद भी खड़ी हो जाऊँगी।
“डोली चढ़कर जाना और अर्थी पर आना”, ऐसे कठिन शब्दों के जाल में उसको नहीं फसाऊँगी।
बिटिया मेरी पराया धन नहीं, कोई सामान नहीं जिसे गैरों को सौंप कर गंगा नहाऊँगी।
अनमोल है वो अनमोल ही रहेगी।
रुपए-पैसों से जहाँ इज़्ज़त मिले ऐसे घर में मैं अपनी बेटी नहीं ब्याहुँगी।
औरत होना कोई अपराध नहीं, खुल कर साँस लेना मैं अपनी बेटी को सिखाऊँगी।
मैं अपनी बेटी को अजनबी नहीं बना पाऊँगी।
हर दुःख-दर्द में उसका साथ निभाऊँगी,
ज़्यादा से ज़्यादा एक बुरी माँ ही तो कहलाऊँगी।