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ये हैं परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव जिन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में 15 गोलियाँ खाने के बावजूद दुश्मनों को हराकर तिरंगा लहराया था। योगेंद्र सिंह यादव की शादी की मेहंदी फीकी भी नहीं पड़ी थी कि शादी के 15 दिन बाद कारगिल से बुलावा आ गया।
10 मई, 1980 को जन्मे योगेंद्र यादव महज 16 साल और 5 महीने की छोटी उम्र में सेना की 18 ग्रेनेडियर में भर्ती हो गए थे। कारगिल में दुश्मनों के हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन विजय के दौरान योगेंद्र 18वीं ग्रेनेडियर्स की घातक प्लाटून के सदस्य थे। इस प्लाटून को जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में टाइगर हिल टॉप कब्जाने का जिम्मा मिला था।
रविंद्रनाथ अपने साथियों के साथ बंगाल की खाड़ी में हल्दिया के पास मछली पकड़ने गया था। तभी अचानक समुद्र का रुख बदल गया तेज़ तूफान उठा, लहरें बेकाबू हो गईं और देखते ही देखते नाव पलट गई। रविंद्रनाथ के 11 साथी समंदर की विशाल लहरों में बह गए।
लेकिन रविंद्रनाथ ने हार नहीं मानी।
वो तैरता रहा… तैरता रहा… ऊपर बस आसमान, नीचे अथाह पानी। घंटे बीते, दिन बीत गए।
5 दिन तक रवीन्द्रनाथ समंदर में अकेले तैरता रहा, न खाना, न पीने का पानी, सिर्फ़ ज़िंदा रहने की जिद। तैरते रहने के दौरान मैंने कुछ नहीं खाया। रुक-रुक कर बारिश हो रही थी और बड़ी-बड़ी लहरें उठ रही थीं। बारिश होने पर ही मैंने पानी पिया।
जम्मू-कश्मीर में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए पिता के पार्थिव शरीर को देखकर एक साल की बेटी पापा..पापा बोलने लगी। इस सीन को जिसने भी देखा भावुक हो गया।
उधमपुर के माजलता में शहीद हुए अमजद खान का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद जवान का पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो उनकी एक साल की बेटी अपने पिता को आखिरी देने पहुंची। पिता के शव को देखकर मासूम बेटी पापा..पापा...पुकारती रही लेकिन अमजद खान नहीं जागे।
बेटी को पता ही नहीं था कि अब उसके पापा कभी नहीं जागेंगे। बेटी का पापा के प्रति लगाव देखकर हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ❣️🇮🇳
#indianarmy
जब रावण ने जटायु के दोनों पंख काट डाले तब काल जटायु को लेने आया !
और जैसे ही काल आया। गिद्धराज जटायु ने मौत को ललकार कहा: "सावधान ऐ काल !आगे बढ़ने की कोशिश मत करना...!”
मैं मृत्यु को स्वीकार तो करूँगा...लेकिन तू मुझे तब तक नहीं छू सकता जब तक मैं सीता जी की सुधि प्रभु "श्रीराम" को नहीं सुना देता...!”
मौत उन्हें छू नहीं पा रही है प्रतीक्षा कर रही खड़ी हो कर..! और मौत तब तक खड़ी रही, जब तक जटायु ने प्राण नहीं त्यागे।