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🚫 मंच:-राजस्थान गौसेवा समिति
🚫 वर्ष:-13 मार्च 2013
🚫 स्थान:-उधोग मैदान जयपुर
🚫 संख्या:- 30 हजार गोभक्त व 500 गोभक्त सन्त
🚫 उद्देश्य:-सरकारी स्तर पर गौ आधारित नीति निर्धारण
🚫 परिणाम:-आजाद भारत में पहली बार राजस्थान में गोशालाओं को स्थाई अनुदान प्रारम्भ और गोनिदेशालय का गठन (जो बाद में गो मंत्रालय बना)
राजस्थान गौसेवा समिति की कथा कहानी बहुत लम्बी है दृढ़ इच्छा शक्ति संकल्प व निस्वार्थ गौसेवा का भाव ही आधार रहा है की वर्तमान में सम्पूर्ण भारत में इकलौता प्रदेश राजस्थान हैं जहां सरकारी स्तर पर गौआधारित नीतियां सबसे पहले व प्रभावी बनी हुई है। आजादी के काल से लेकर आजाद भारत के गोभक्त हुतात्माओ की ऊर्जा के साथ 18 वर्ष से अधिक राजस्थान गौसेवा समिति के लम्बे संघर्ष का परिणाम है ये....!!
सनद:-रहे हिमालय से गंगा नदी के साथ एक पत्थर परवाहित होता-होता जब पृथ्वी पर आता है तो वो एक आकार ले लेता है और पूज्य योग्य हो जाता है।
संघर्षों की आग की भट्टी में इतने तप लिए की गोसेवा के सम्मान को किंचित भी कम नही होने देंगे कोई खत्म करने की सोचने वाला तो नादान बुद्धि का ही होगा।।
समाज,सरकार,सन्यासी हो या सदग्रहस्थ सभी को गोसेवा आधारित भाव बिंदु का सम्मान भारत में करना ही पड़ेगा गो मां का कर्ज चुकाने के लिए सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार है।।
कोई हल्के में ना ले...गौसेवा भाव के वजन को
धरती भी सहन नही कर पाई गो अपराध को
🚫 नोट:-छोटी सी संघर्ष की कहानी तस्वीर सहित प्रस्तुत
🚫 मंच:-राजस्थान गौसेवा समिति
🚫 वर्ष:-13 मार्च 2013
🚫 स्थान:-उधोग मैदान जयपुर
🚫 संख्या:- 30 हजार गोभक्त व 500 गोभक्त सन्त
🚫 उद्देश्य:-सरकारी स्तर पर गौ आधारित नीति निर्धारण
🚫 परिणाम:-आजाद भारत में पहली बार राजस्थान में गोशालाओं को स्थाई अनुदान प्रारम्भ और गोनिदेशालय का गठन (जो बाद में गो मंत्रालय बना)
राजस्थान गौसेवा समिति की कथा कहानी बहुत लम्बी है दृढ़ इच्छा शक्ति संकल्प व निस्वार्थ गौसेवा का भाव ही आधार रहा है की वर्तमान में सम्पूर्ण भारत में इकलौता प्रदेश राजस्थान हैं जहां सरकारी स्तर पर गौआधारित नीतियां सबसे पहले व प्रभावी बनी हुई है। आजादी के काल से लेकर आजाद भारत के गोभक्त हुतात्माओ की ऊर्जा के साथ 18 वर्ष से अधिक राजस्थान गौसेवा समिति के लम्बे संघर्ष का परिणाम है ये....!!
सनद:-रहे हिमालय से गंगा नदी के साथ एक पत्थर परवाहित होता-होता जब पृथ्वी पर आता है तो वो एक आकार ले लेता है और पूज्य योग्य हो जाता है।
संघर्षों की आग की भट्टी में इतने तप लिए की गोसेवा के सम्मान को किंचित भी कम नही होने देंगे कोई खत्म करने की सोचने वाला तो नादान बुद्धि का ही होगा।।
समाज,सरकार,सन्यासी हो या सदग्रहस्थ सभी को गोसेवा आधारित भाव बिंदु का सम्मान भारत में करना ही पड़ेगा गो मां का कर्ज चुकाने के लिए सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार है।।
कोई हल्के में ना ले...गौसेवा भाव के वजन को
धरती भी सहन नही कर पाई गो अपराध को
🚫 नोट:-छोटी सी संघर्ष की कहानी तस्वीर सहित प्रस्तुत
🚫 मंच:-राजस्थान गौसेवा समिति
🚫 वर्ष:-13 मार्च 2013
🚫 स्थान:-उधोग मैदान जयपुर
🚫 संख्या:- 30 हजार गोभक्त व 500 गोभक्त सन्त
🚫 उद्देश्य:-सरकारी स्तर पर गौ आधारित नीति निर्धारण
🚫 परिणाम:-आजाद भारत में पहली बार राजस्थान में गोशालाओं को स्थाई अनुदान प्रारम्भ और गोनिदेशालय का गठन (जो बाद में गो मंत्रालय बना)
राजस्थान गौसेवा समिति की कथा कहानी बहुत लम्बी है दृढ़ इच्छा शक्ति संकल्प व निस्वार्थ गौसेवा का भाव ही आधार रहा है की वर्तमान में सम्पूर्ण भारत में इकलौता प्रदेश राजस्थान हैं जहां सरकारी स्तर पर गौआधारित नीतियां सबसे पहले व प्रभावी बनी हुई है। आजादी के काल से लेकर आजाद भारत के गोभक्त हुतात्माओ की ऊर्जा के साथ 18 वर्ष से अधिक राजस्थान गौसेवा समिति के लम्बे संघर्ष का परिणाम है ये....!!
सनद:-रहे हिमालय से गंगा नदी के साथ एक पत्थर परवाहित होता-होता जब पृथ्वी पर आता है तो वो एक आकार ले लेता है और पूज्य योग्य हो जाता है।
संघर्षों की आग की भट्टी में इतने तप लिए की गोसेवा के सम्मान को किंचित भी कम नही होने देंगे कोई खत्म करने की सोचने वाला तो नादान बुद्धि का ही होगा।।
समाज,सरकार,सन्यासी हो या सदग्रहस्थ सभी को गोसेवा आधारित भाव बिंदु का सम्मान भारत में करना ही पड़ेगा गो मां का कर्ज चुकाने के लिए सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार है।।
कोई हल्के में ना ले...गौसेवा भाव के वजन को
धरती भी सहन नही कर पाई गो अपराध को
🚫 नोट:-छोटी सी संघर्ष की कहानी तस्वीर सहित प्रस्तुत
