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मुझे खेसारी लाल यादव के गानों से आपत्ति है - और ये कोई नई बात नहीं। अश्लीलता और फूहड़ता ने भोजपुरी संगीत की आत्मा को गहराई से चोट पहुँचाई है।
लेकिन ये कहना कि सिर्फ़ खेसारी ने भोजपुरी इंडस्ट्री को बदनाम किया, सच से ज़्यादा एक “सुविधाजनक आरोप” लगता है।
अगर भोजपुरी में अश्लीलता की जड़ खोजनी हो, तो फिर सिर्फ़ खेसारी नहीं - मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ और पवन सिंह जैसे नाम भी उसी पंक्ति में खड़े दिखाई देंगे।
फर्क बस इतना है कि अब कुछ लोग जिम्मेदारी से बचने के लिए
उँगली किसी और पर उठा रहे हैं।
लेकिन आज मैं बात खेसारी लाल यादव के राजनीतिक सफ़र की करना चाहता हूँ - जिसकी शुरुआत उन्होंने हाल ही में RJD के साथ की है।
दूसरी तरफ़ एक संस्कारित और शिक्षित आवाज़ भी है - मैथिली ठाकुर, जो अपनी तरह से राजनीति की नई पारी खेलने उतरी हैं।
अगर इन सभी भोजपुरी सितारों को एक तरफ रख दें और खेसारी को दूसरी तरफ - तो कहना पड़ेगा कि जिस आत्मविश्वास और सहजता से वो मीडिया और जनता से बात कर रहे हैं, वो किसी नए नेता जैसी नहीं लगता।
उनके शब्दों में गुस्सा भी है, दर्द भी है, और जमीनी समझ भी। हो सकता है राजनीति में खेसारी का अंदाज़ बाकी भोजपुरी सितारों से अलग और असरदार हो!
अब सवाल बस इतना है -
क्या खेसारी लाल यादव वाकई भोजपुरी के मंच से उठकर
जनता के नेता बन पाएंगे? या यह भी एक “इलेक्शन सीज़न का शोर” बनकर रह जाएगा?
मुझे खेसारी लाल यादव के गानों से आपत्ति है - और ये कोई नई बात नहीं। अश्लीलता और फूहड़ता ने भोजपुरी संगीत की आत्मा को गहराई से चोट पहुँचाई है।
लेकिन ये कहना कि सिर्फ़ खेसारी ने भोजपुरी इंडस्ट्री को बदनाम किया, सच से ज़्यादा एक “सुविधाजनक आरोप” लगता है।
अगर भोजपुरी में अश्लीलता की जड़ खोजनी हो, तो फिर सिर्फ़ खेसारी नहीं - मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ और पवन सिंह जैसे नाम भी उसी पंक्ति में खड़े दिखाई देंगे।
फर्क बस इतना है कि अब कुछ लोग जिम्मेदारी से बचने के लिए
उँगली किसी और पर उठा रहे हैं।
लेकिन आज मैं बात खेसारी लाल यादव के राजनीतिक सफ़र की करना चाहता हूँ - जिसकी शुरुआत उन्होंने हाल ही में RJD के साथ की है।
दूसरी तरफ़ एक संस्कारित और शिक्षित आवाज़ भी है - मैथिली ठाकुर, जो अपनी तरह से राजनीति की नई पारी खेलने उतरी हैं।
अगर इन सभी भोजपुरी सितारों को एक तरफ रख दें और खेसारी को दूसरी तरफ - तो कहना पड़ेगा कि जिस आत्मविश्वास और सहजता से वो मीडिया और जनता से बात कर रहे हैं, वो किसी नए नेता जैसी नहीं लगता।
उनके शब्दों में गुस्सा भी है, दर्द भी है, और जमीनी समझ भी। हो सकता है राजनीति में खेसारी का अंदाज़ बाकी भोजपुरी सितारों से अलग और असरदार हो!
अब सवाल बस इतना है -
क्या खेसारी लाल यादव वाकई भोजपुरी के मंच से उठकर
जनता के नेता बन पाएंगे? या यह भी एक “इलेक्शन सीज़न का शोर” बनकर रह जाएगा?
मुझे खेसारी लाल यादव के गानों से आपत्ति है - और ये कोई नई बात नहीं। अश्लीलता और फूहड़ता ने भोजपुरी संगीत की आत्मा को गहराई से चोट पहुँचाई है।
लेकिन ये कहना कि सिर्फ़ खेसारी ने भोजपुरी इंडस्ट्री को बदनाम किया, सच से ज़्यादा एक “सुविधाजनक आरोप” लगता है।
अगर भोजपुरी में अश्लीलता की जड़ खोजनी हो, तो फिर सिर्फ़ खेसारी नहीं - मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ और पवन सिंह जैसे नाम भी उसी पंक्ति में खड़े दिखाई देंगे।
फर्क बस इतना है कि अब कुछ लोग जिम्मेदारी से बचने के लिए
उँगली किसी और पर उठा रहे हैं।
लेकिन आज मैं बात खेसारी लाल यादव के राजनीतिक सफ़र की करना चाहता हूँ - जिसकी शुरुआत उन्होंने हाल ही में RJD के साथ की है।
दूसरी तरफ़ एक संस्कारित और शिक्षित आवाज़ भी है - मैथिली ठाकुर, जो अपनी तरह से राजनीति की नई पारी खेलने उतरी हैं।
अगर इन सभी भोजपुरी सितारों को एक तरफ रख दें और खेसारी को दूसरी तरफ - तो कहना पड़ेगा कि जिस आत्मविश्वास और सहजता से वो मीडिया और जनता से बात कर रहे हैं, वो किसी नए नेता जैसी नहीं लगता।
उनके शब्दों में गुस्सा भी है, दर्द भी है, और जमीनी समझ भी। हो सकता है राजनीति में खेसारी का अंदाज़ बाकी भोजपुरी सितारों से अलग और असरदार हो!
अब सवाल बस इतना है -
क्या खेसारी लाल यादव वाकई भोजपुरी के मंच से उठकर
जनता के नेता बन पाएंगे? या यह भी एक “इलेक्शन सीज़न का शोर” बनकर रह जाएगा?

बिहार चुनाव में खेसारी लाल लगभग राजनेता बनने की और अग्रसर है ! क्युकी बेहतरीन मुद्दा उठा रहे है!
और आजकल के नए नवेले राजनेता और नए नए बीजेपी में आए निरहुआ साहब आजकल नफ़रत की राजनीति में लींन है !
क्युकी खेसारी लाल यादव ने ऐसे लोगो को आईना दिखाया हैं! उन्होंने कहा है की सारी उम्र मुस्लिम बनकर मूवी बनाने वाले आजकल नए नए हिंदू बने फिर रहे है ! और ज्ञान दे रहे है !
खेसारी फुल नेता बनने की और अग्रसर है ! और ऐसे ऐसे लोगो को आइना दिखा रहे है !
क्या लगता है आपको ?? खेसारी फुल नेता बन गए है ??
बिहार चुनाव में खेसारी लाल लगभग राजनेता बनने की और अग्रसर है ! क्युकी बेहतरीन मुद्दा उठा रहे है!
और आजकल के नए नवेले राजनेता और नए नए बीजेपी में आए निरहुआ साहब आजकल नफ़रत की राजनीति में लींन है !
क्युकी खेसारी लाल यादव ने ऐसे लोगो को आईना दिखाया हैं! उन्होंने कहा है की सारी उम्र मुस्लिम बनकर मूवी बनाने वाले आजकल नए नए हिंदू बने फिर रहे है ! और ज्ञान दे रहे है !
खेसारी फुल नेता बनने की और अग्रसर है ! और ऐसे ऐसे लोगो को आइना दिखा रहे है !
क्या लगता है आपको ?? खेसारी फुल नेता बन गए है ??