“नर्मदा नदी के हर पत्थर में है शिव, आखिर क्यों ?”
नर्मदेश्वर शिवलिंग के सम्बन्ध में एक धार्मिक कथा है –भारतवर्ष में गंगा, यमुना, नर्मदा और सरस्वती ये चार नदियां सर्वश्रेष्ठ हैं। इनमें भी इस भूमण्डल पर गंगा की समता करने वाली कोई नदी नहीं है। प्राचीनकाल में नर्मदा नदी ने बहुत वर्षों तक तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने वर मांगने को कहा। तब नर्मदाजी ने कहा–’ब्रह्मन्! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे गंगाजी के समान कर दीजिए।’ब्रह्माजी ने मुस्कराते हुए कहा–’यदि कोई दूसरा देवता भगवान शिव की बराबरी कर ले, कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु के समान हो जाए, कोई दूसरी नारी पार्वतीजी की समानता कर ले और कोई दूसरी नगरी काशीपुरी की बराबरी कर सके तो कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान हो सकती है। ब्रह्माजी की बात सुनकर नर्मदा उनके वरदान का त्याग करके काशी चली गयीं और वहां पिलपिलातीर्थ में शिवलिंग की स्थापना करके तप करने लगीं। भगवान शंकर उन पर बहुत प्रसन्न हुए और वर मांगने के लिए कहा। तब नर्मदा ने कहा–’भगवन्! तुच्छ वर मांगने से क्या लाभ? बस आपके चरणकमलों में मेरी भक्ति बनी रहे। नर्मदा की बात सुनकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हो गए और बोले–’नर्मदे! तुम्हारे तट पर जितने भी प्रस्तरखण्ड (पत्थर) हैं, वे सब मेरे वर से शिवलिंगरूप हो जाएंगे। गंगा में स्नान करने पर शीघ्र ही पाप का नाश होता है, यमुना सात दिन के स्नान से और सरस्वती तीन दिन के स्नान से सब पापों का नाश करती हैं, परन्तु तुम दर्शनमात्र से सम्पूर्ण पापों का निवारण करने वाली होगी। तुमने जो नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की है, वह पुण्य और मोक्ष देने वाला होगा।’ भगवान शंकर उसी लिंग में लीन हो गए। इतनी पवित्रता पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गयीं। इसलिए कहा जाता है–‘नर्मदा का हर कंकर शंकर है।
#शंकर के सेवक..🙏🚩🚩

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स्वास्थ्य मंत्री को फांसी देने के बाद क्या बोले लाखा सिधाना? हर एक बात सुनने लायक है। इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
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यह रामायण सीरियल का वह दृश्य है जहाँ एक अदभुद घटना घटी (सत्य घटना)
1985-86 में समुद्र के किनारे पर रामायण सीरियल की शूटिंग चल रही थी... राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल एक शिला पर बैठे हुए थे... समुद्र के पास में ही एक छोटा सा गाँव था, उस गाँव के लोग कभी कभी रामायण की शूटिंग देखने आ जाते थे...
एक दिन उस गाँव में एक बच्चे को सर्प ने डस लिया, बच्चा एक दम बेहोश हो गया और उसके मुँह से सफेद झाग आने लगे...! जैसे ही उसकी माँ को पता चला, वो अपने बच्चे को गोदी में लेकर वहां दौड़ी जहाँ रामायण की शूटिंग चल रही थी... सभी रामायण की शूटिंग में व्यस्त थे... महिला रोती रोती एक दम वहाँ पहुँची और जहाँ रामजी (अरुण गोविल) बैठे हुए थे...
महिला ने बच्चे को रामजी के चरणों मे पटक दिया और जोर जोर से रोने लगी, रामजी मेरे बच्चे को बचाओ... इसे सर्प ने डस लिया है... आप भगवान हो, मेरे बच्चे को बचाओ... प्रभु मेरे बच्चे को बचाओ...
सभी शूटिंग करने वाले हैरान होकर महिला की तरफ देखते रहे, कुछ समय के लिये शूटिंग रोक दी गई... जब महिला रामजी के सामने जोर जोर से रोने लगी, तब रामजी एक दम खड़े हो गए और बच्चे को देख कर उसके ऊपर अपना हाथ फेरने लगे...
और जैसे ही रामजी ने बच्चे पर हाथ फेरा बच्चे को होश आने लगा, आँखे खोलने लगा... सभी शूटिंग करने वाले लोग और कुछ महिला के साथ आये लोग दंग रह गए और बच्चा खड़ा हो गया...!
महिला का भाव देखो कि उधर एक अभिनेता के अंदर प्रभु की शक्ति पैदा हो गयी!
यह घटना खुद अरुण गोविल ने अपने मुँह से सुनाई थी... 1995 में किसी स्टेज प्रोग्राम में उनको आमंत्रित किया, तब किसी व्यक्ति ने अरुण गोविल जी से पूछा कि रामायण की शूटिंग करते समय आपका कोई ऐसा अनुभव जो आपके लिए अविस्मरणीय रहा हो... तब उन्होंने यह घटना सभी को बताई...
जब सच्चे भाव और भावना से पत्थर में भगवान प्रकट हो सकते हैं तो व्यक्ति में क्यों नहीं... कौन कहता सच्चे मन से पुकारे तो भगवान प्रकट नहीं होते...
सियाराम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोर जुग पानी...!
जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी...।।
जय श्रीराम

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पुरी जगन्नाथ मंदिर की रसोई हर दिन 100,000 लोगों को खिलाती है और यह दुनिया की सबसे बड़ी खुली हवा में रसोई है।
यहां के ऑपरेशनों का पैमाना देखकर आपका होश उड़ जाएगा।
प्रत्येक कार्य में कुछ व्यक्ति निर्दिष्ट होते हैं।
कुछ पुरुष कुएं से पानी खींचते हैं, कुछ सब्जी काटने के प्रभारी होते हैं, कुछ लकड़ी काटने के प्रभारी होते हैं और कुछ खाना पकाने के प्रभारी होते हैं।
भोजन केवल मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करके तैयार किया जाता है; प्रतिदिन 15,000 मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है और उनमें से किसी का भी पुन: उपयोग नहीं किया जाता है।
भोजन एक अनूठी तकनीक का उपयोग करके तैयार किया जाता है।
सात मिट्टी के बर्तनों को एक दूसरे के ऊपर व्यवस्थित किया जाता है, जूट की रस्सियों से सुरक्षित किया जाता है, और फिर पूरे सेटअप को जलाऊ लकड़ी पर रखा जाता है।
हर बार, सबसे ऊपर वाले बर्तन की चीज़ें पहले पक जाती हैं और सबसे नीचे वाले बर्तन तक क्रम वही रहता है।
हर दिन, 56 वस्तुओं को पकाया जाता है और भगवान जगन्नाथ को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है, जिसके बाद यह महाप्रसाद (धन्य भोजन) बन जाता है।
फिर, लगभग 2-3 बजे, आगंतुकों और भक्तों को परिसर के अंदर आनंद बाजार नामक स्थान पर महाप्रसाद खरीदने के लिए मिलता है।
महाप्रसाद शानदार है और इसका एक निवाला किसी भी दिन बर्बाद नहीं होता है।

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CM MAAN ने अपने ही मंत्री पर लिया बड़ा एक्शन, कैबिनेट मंत्री विजय सिंगला को पद से हटाया, LIVE दी जानकारी
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कैलाश नगर चौक का कट न खोलने पर विधायक बग्गा का लोगों ने किया विरोध, विधायक से बात की तो दिए नए खुलासे
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