Знакомьтесь сообщенийИзучите увлекательный контент и разнообразные точки зрения на нашей странице «Обнаружение». Находите свежие идеи и участвуйте в содержательных беседах
ऑटोमैटिक पार्किंग सिस्टम हुआ फेल, तालाब में जा गिरी कार
चीन में एक कार उस वक्त तालाब में जा गिरी जब उसका ऑटोमैटिक पार्किंग सिस्टम फेल हो गया. कार के तालाब में गिरने के बाद मालिक ने कंपनी से हर्जाना मांगा है, वहीं कंपनी का कहना है कि ऑटोपार्क का इस्तेमाल करने से पहले ड्राइवर को रास्ता देखना चाहिए था.
#china #automaticparkingfail #viralvideo
हर हर महादेव 🙏
आईए हम लोग जानते हैं l की सनातन धर्म के आधार स्तंभ कौन कौन से हैं l जिनके कारण सनातन धर्म 🕉️ सभी धर्मों से सबसे प्राचीन है l और जिसे कोई मिटा नहीं सकता है l वो ताकत है l हमारा सत्य सनातन धर्म l
क्योंकि जो सत्य है l वही सनातन धर्म है l
#सत्यसनातनधर्म #सनातनहमारीपहचान
श्री कृष्ण जी की वंशावली को शास्त्रीय परंपरा (हरिवंश पुराण, भागवत पुराण, महाभारत) के आधार पर स्पष्ट, क्रमबद्ध और पूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया है।
🌿 श्री कृष्ण जी की वंशावली (यदुवंश)
🔱 1. मूल वंश
चन्द्रदेव
↓
बुध
↓
पुरूरवा
↓
आयु
↓
नहुष
↓
ययाति
🔱 2. यदुवंश की स्थापना
राजा ययाति
पुत्र: यदु (इन्हीं से यदुवंश चला)
🔱 3. यदु से वृष्णि वंश
यदु
↓
सहस्रजित
↓
शतजित
↓
हैहय
↓
धर्मनेत्र
↓
कुन्ति
↓
वृष्णि (वृष्णि वंश की स्थापना)
🔱 4. वृष्णि वंश → यादव वंश
वृष्णि
↓
अंधक
↓
देवक
↓
उग्रसेन
पुत्र: कंस
🔱 5. श्री कृष्ण जी के माता-पिता
उग्रसेन
↓
देवक
पुत्री: देवकी
शूरसेन
पुत्र: वसुदेव
👉 वसुदेव + देवकी = श्री कृष्ण
🌸 श्री कृष्ण जी की संतानें
🔱 प्रमुख पुत्र
प्रद्युम्न (रुक्मिणी के पुत्र)
सांब (जाम्बवती के पुत्र)
अनिरुद्ध (प्रद्युम्न के पुत्र)
👉 शास्त्रों में श्री कृष्ण के 16,108 पुत्र बताए गए हैं।
🌸 श्री कृष्ण जी के पौत्र
अनिरुद्ध
विवाह: उषा
वंश आगे चला
🕉️ संक्षिप्त वंश क्रम (लाइन फॉर्मेट)
चन्द्र → बुध → पुरूरवा → आयु → नहुष → ययाति → यदु → वृष्णि → अंधक → देवक → उग्रसेन → देवकी → श्री कृष्ण
✨ विशेष तथ्य
श्री कृष्ण यदुवंशी क्षत्रिय थे।
उनका वंश चन्द्रवंश से संबंधित है।
महाभारत काल में यादव वंश अत्यंत शक्तिशाली था
अगर जानकारी में किसी को भी प्रकार कि त्रुटि हुई है तो उसके लिए हम क्षमा प्रार्थी है l
मेरा मानना है l कि कृष्ण जी सबके है l और उन्हें जाती में कोई नहीं बांध सकता है l
#jaishreekrishna #socialmedia
माँ #बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। इन्हें स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। शत्रु की वाणी, विचार, क्रिया और अहंकार को रोक देना—यही माँ बगलामुखी की मूल शक्ति है। पीतवर्ण, पीत वस्त्र, पीत आसन और पीत तेज इनके स्वरूप की पहचान हैं।
बगलामुखी कौन हैं और किसका अवतार हैं
माँ बगलामुखी को आदिशक्ति पार्वती का उग्र-रहस्यमय स्वरूप माना गया है। देवी भागवत, तंत्र चूड़ामणि और रुद्रयामल जैसे ग्रंथों में वर्णन आता है कि जब सृष्टि में अराजकता और विनाश की स्थिति उत्पन्न हुई, तब माँ ने ब्रह्मास्त्र रूपी प्रलयकारी शक्ति को स्तम्भित करने के लिए अवतार लिया। इस कारण इन्हें स्तम्भन महाविद्या कहा जाता है।
विराट कोहली ने श्री प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम जाने से पहले तुलसी माला पहनी, जिसकी ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल पर कीमत ₹124 रुपए है। बता दें कि तुलसी माला का महत्व धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभों से भरा है, जो मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, भगवान विष्णु और लक्ष्मी का आशीर्वाद, नकारात्मकता से बचाव और आध्यात्मिक विकास प्रदान करती है, ध्यान और जप में सहायक होती है और कई तरह के शारीरिक व मानसिक रोगों को दूर करने में मददगार मानी जाती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
1997 में, Richard Lee Norris, 22 वर्षीय युवक, एक प्रोजेक्टाइल उपकरण की सफाई कर रहा था, यह सोचकर कि यह खाली है, जब उसने गलती से ट्रिगर दबा दिया और उसके चेहरे पर गंभीर विस्फोट हो गया। इस हादसे ने उसकी नाक, होंठ, जबड़ा, दांत और जीभ का हिस्सा नष्ट कर दिया, जिससे उसके चेहरे की हर विशेषता प्रभावित हुई। अगले 15 वर्षों में, Norris ने 30 से अधिक सर्जरी करवाईं, जिनमें से एक सबसे लंबी मानी जाती है, जो 36 घंटे तक चली, जिसमें उसका पूरा चेहरा प्रत्यारोपित किया गया। इस तरह, उसने अपनी बुनियादी क्षमताएं वापस पा लीं और फिर से सूंघने, बोलने, सांस लेने, दाढ़ी बनाने और मुस्कुराने में सक्षम हो गया।