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छोटी उम्र बड़ा confidence 😤
Train में चढ़ते ही full action
अब बोलो गलत कौन

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142 करोड़ दिल जीतने वाली भारत की बेटियां आज भी आशीर्वाद की राह देख रही हैं। गिल या सूर्य की टीम होती तो जश्न मनता, लेकिन अपनी बेटियों की मेहनत पर समाज चुप है।

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संशोधित पाठ्यक्रम लागू होने के साथ ही, कक्षा 8 की इतिहास की पाठ्यपुस्तक में भारत के अतीत को अधिक स्पष्टता और ऐतिहासिक सटीकता पर अधिक ज़ोर देते हुए प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बाबर को एक क्रूर आक्रमणकारी और औरंगज़ेब को मंदिर विध्वंसक के रूप में वर्णित किया गया है, जिससे छात्रों को उनके शासनकाल और प्रभाव की अधिक प्रत्यक्ष समझ मिलती है।
यह अद्यतन इस लंबे समय से चली आ रही मांग को दर्शाता है कि इतिहास को सच्चाई से पढ़ाया जाए—बिना किसी अतिशयोक्ति, महिमा मंडन या चुनिंदा कहानियों के। दशकों तक, मुगल काल को अक्सर नरम या रोमांटिक ढंग से प्रस्तुत किया जाता रहा, जबकि धार्मिक उत्पीड़न, सांस्कृतिक क्षति और सामाजिक दमन जैसे पहलुओं पर सीमित ध्यान दिया गया।
संशोधित पाठ्यपुस्तक इन कम चर्चित वास्तविकताओं को सामने लाती है, जिससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि भारतीय इतिहास केवल शासकों और लड़ाइयों का क्रम नहीं है। यह सांस्कृतिक संघर्षों, धार्मिक संघर्षों और चुनौतीपूर्ण समय में भारतीय समाज के लचीलेपन से भी आकार लेता है।
कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बदलाव देश के ऐतिहासिक वृत्तांत को दस्तावेजी तथ्यों के साथ अधिक निकटता से जोड़ने की दिशा में एक साहसिक और आवश्यक कदम है। शिक्षाविद, इतिहासकार और नागरिक सभी मानते हैं कि यह कदम एक लंबे समय से चली आ रही अपेक्षा को पूरा करता है - कि युवा पीढ़ी को इतिहास साक्ष्य और सत्य के आधार पर सीखना चाहिए, न कि अतीत की परिकल्पित व्याख्याओं के आधार पर।

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28 दिसंबर, डॉ. मोहन भागवत जी ने विश्वभर के हिंदुओं से आह्वान किया कि वे अपने आचरण, संस्कार और जीवन-शैली के माध्यम से दुनिया में “हिंदू जीवन-पद्धति” का आदर्श प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि विश्व को शक्ति या धन के बल से नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और निःस्वार्थ सेवा पर आधारित जीवन से प्रेरणा की आवश्यकता है। जब हिंदू समाज अपने जीवन में आदर्श स्थापित करेगा, तभी विश्व स्वतः उसका अनुसरण करेगा।
#mohanbhagwat #hinduliving #dharma #selflessservice #indianvalues #rss #globalhindu #panchjanya

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28 दिसंबर, डॉ. मोहन भागवत जी ने विश्वभर के हिंदुओं से आह्वान किया कि वे अपने आचरण, संस्कार और जीवन-शैली के माध्यम से दुनिया में “हिंदू जीवन-पद्धति” का आदर्श प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि विश्व को शक्ति या धन के बल से नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और निःस्वार्थ सेवा पर आधारित जीवन से प्रेरणा की आवश्यकता है। जब हिंदू समाज अपने जीवन में आदर्श स्थापित करेगा, तभी विश्व स्वतः उसका अनुसरण करेगा।
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28 दिसंबर, डॉ. मोहन भागवत जी ने विश्वभर के हिंदुओं से आह्वान किया कि वे अपने आचरण, संस्कार और जीवन-शैली के माध्यम से दुनिया में “हिंदू जीवन-पद्धति” का आदर्श प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि विश्व को शक्ति या धन के बल से नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और निःस्वार्थ सेवा पर आधारित जीवन से प्रेरणा की आवश्यकता है। जब हिंदू समाज अपने जीवन में आदर्श स्थापित करेगा, तभी विश्व स्वतः उसका अनुसरण करेगा।
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1. तीन तरफ से दुश्मनों से घिरा हुआ....भारत
2. देश के गद्दारों से भरा हुआ....भारत
3. सिर्फ अपने प्रधानमंत्री का झुका हुआ सिर देखने के इच्छुक राजनैतिक दलों से भरा हुआ....भारत
4. हजारों केजरियों, खालिदों, कन्हैयाओं, के बोझ से दबा हुआ....भारत
5. पैसे के लिए जमीर बेच देने वाले भांड चैनलों की भीड़ से घिरा हुआ....भारत
6. देश की आत्मा को चोट पहुँचाने वाले दलालों के मुंह की गंदगी से सना हुआ.... आर्यव्रत भारत

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सर्दी में यह बहुत बढ़िया जुगाड़ है यह जुगाड़ किस-किस को पसंद आया कमेंट में जरूर बताना 😂 credit original creator 🙏

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#वैकुंठ_एकादशी: #दिव्य_मुक्ति_का_द्वार.
वैकुंठ एकादशी हिंदू परंपराओं में सबसे पवित्र पर्वों में से एक है, जिस दिन सत्य के साधकों के लिए स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं। यह पवित्र दिन मोक्ष का वादा समेटे हुए है, जो जन्म और मृत्यु के अंतहीन चक्र से मुक्ति है।
इसका नाम ही इसके सार को दर्शाता है। भगवान विष्णु का दिव्य निवास वैकुंठ, आत्मा का अंतिम गंतव्य है, दुखों से परे एक ऐसा लोक जहाँ दिव्य आनंद शाश्वत रूप से व्याप्त रहता है।
पवित्र महत्व।
इस दिन, भक्तों का मानना है कि भगवान विष्णु चार महीने की अपनी ब्रह्मांडीय नींद, जिसे चतुर्मास्य के नाम से जाना जाता है, से जागते हैं। जैसे ही वे ब्रह्मांडीय सागर पर अपने योगिक विश्राम से जागते हैं, ब्रह्मांड स्वयं नई आध्यात्मिक ऊर्जा से जीवंत हो उठता है। इस अवसर पर उपवास, प्रार्थना और रात्रि जागरण किया जाता है।
परंपरा के अनुसार, वैकुंठ एकादशी का सच्चे मन से पालन करने से अनगिनत जन्मों के कर्मफल मिट जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन का आदर करने मात्र से ही आध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे पिछले कर्मों का संचित प्रभाव धुल जाता है और उच्च चेतना के मार्ग खुल जाते हैं।

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