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यह #आस्था_सिंह है, जो HDFC बैंक में एक कर्मचारी है, एक ग्राहक बैंक की सेवाओं को लेकर पहले बहस करने लगा, और बाद में बातचीत का स्तर गिराते हुए अभद्रता पर उतर आया।
जब ग्राहक लगातार बदतमीज़ी करता रहा, तो #आस्था_सिंह ने उसे जवाब देते हुए सख़्त लहजे में अपनी बात रखी, उसी बातचीत का एक छोटा सा क्लिप अब सोशल मीडिया पर संदर्भ से अलग करके फैलाया जा रहा है।
इसके बाद लोगों को जैसे एक नया #क्षत्रिय विरोध में कंटेंट मिल गया हो, रीच और लाइक्स के चक्कर में बिना पूरी सच्चाई जाने तरह तरह की बातें लिखी जा रही है, सच यह है कि हर कर्मचारी भी एक इंसान होता है।
लगातार अपमान और दुर्व्यवहार के बाद संयम टूट जाना कोई #अपराध नहीं है, लेकिन अधूरी क्लिप के आधार पर किसी को कटघरे में खड़ा करना भी सही नहीं, सोशल मीडिया पर जज बनने से पहले तथ्यों को समझना और दोनों पक्षों को सुनना ज़रूरी है।
भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने एक इवेंट में ब्राह्मण बच्चे को उनके पैर छूने से मना किया लेकिन खुद बच्चे के पैर छूकर इसे संस्कार बताया. उन्होंने कहा- "आप पैर मत छुआ करो. आप ब्राह्मण कुल के आदमी हो. हमारे यहां संस्कार है कि हम ब्राह्मण बच्चों के भी पैर छूते हैं" यूजर्स ने इसे जातिवाद और मानसिक गुलामी बताया, जिसके बाद वो फिर से ट्रोल्स के निशाने पर हैं!
सोमनाथ का मन्दिर लूट कर महमूद गजनबी वापिस गजनी जा रहा था। उसके साथ एक लाख सेना थी।
एक पड़ाव पर जैसे ही सेना पहुँची कि डेढ़ सौ घुड़सवारों का एक जत्था लोहा लेने के लिये तीर की तरह बढ़ता आ रहा था ।
टुकड़ी का नेतृत्व एक सत्तर वर्ष का बूढ़ा राजपूत कर रहा था ।
महमूद गजनबी समझ नहीं सका कि इतनी छोटी टुकड़ी आखिर क्यों एक लाख सेना से लड़ कर अपने को समाप्त करने आ रही है।
उसने दूत भेजा और इन लड़ाकुओं का मंतव्य पुछवाया।
बूढ़े नायक ने कहा— बादशाह से कहना कि संख्या और साधन बल में इतना अन्तर होने पर भी लड़ने का क्या परिणाम हो सकता है सो हम जानते हैं।
पर भूलें यह भी नहीं कि अनीति को जीवित रहते कभी सहन नहीं करना चाहिये।
घुड़सवारों की टुकड़ी जान हथेली पर रख कर इस तरह लड़ी कि डेढ़ सौ ने देखते−देखते डेढ़ हजार को धराशायी बना दिया।
भारी प्रतिरोध में वह दल मर खप कर समाप्त हो गया।
पर मरते दम तक वे कहते रहे कि यदि हम आज एक हजार भी होते तो इन एक लाख से निपटने के लिये पर्याप्त थे ।
इस बिजली झपट लड़ाई का महमूद पर भारी प्रभाव पड़ा।
वह राजपूतों की अद्भुत वीरता पर अवाक् रह गया।
भविष्य की नीति निर्धारित करते हुए उसने नया आधार ढूँढ़ा।
भारतीयों को बल से नहीं जीता जा सकता, उन पर विजय पाने के लिए छल का प्रयोग करना चाहिए।
क्योंकि इस देश के निवासी छल से परिचित ही नहीं है।।
और आज भी कुछ लोग हिन्दुओ में जाती, पाती, ऊच, नीच, दलित, स्वर्ण जेसे छल का प्रयोग करके उन्हें बाँट रहे है ।
यही हमारी कमजोरी है और यही हमारा पतन भी ।
अंग्रेजो ने धोखे से हमारी शिक्षा व्यवस्था बदल दी, संस्कृति बदल दी।
आज भी बहुत सारे वामपंथी, जिहादी व् हिन्दू विरोधी इन्ही चीजो का प्रयोग कर रहे है।
हर हर महादेव 🚩❤️🙏
#we_support_hindutava_unity