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पगड़ी के सामने तख़्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब में हुए नतमस्तक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज।
#jathedargianikuldeepsinghgargajj #takhtsrikeshgarhsahib #srianandpursahib #sikhism #punjabnews #dailypostpunjabi

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पगड़ी के सामने तख़्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब में हुए नतमस्तक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज।
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संस्कार क्यों महत्वपूर्ण हैं ? एक तरफ रविंद्र जाडेजा है , जिसने अपने कुलवंश और वर्ण परंपरा के अनुसार विवाह किया और रीवाबा सोलंकी जैसी जीवन संगिनी पायी जिसमे भारतीय संस्कार है , जिसे सर पर पल्लू रखने और पति को सार्वजानिक मान सम्म्मान देने में एतराज नहीं , दूसरी तरफ विराट कोहली है जिसने बॉलीवुड हीरोइन से शादी की जिसने उसका देश भी छुड़वा दिया। इसलिए विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है।

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संघर्ष एक यात्रा है, और आप अकेले यात्री नहीं हैं।
हर राह पर एक योद्धा मिलता है, जो चुपचाप अपनी जीत की कहानी लिख रहा है।"नज़रें उठाओ और देखो! हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक मौन तपस्या है।
इसलिए खुद कमजोर और हारा हुआ मानना बंद कीजिए......!

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फ़िलिस्तीन से लेकर ईरान तक टोपी वालो को सबक सिखाने वाले नेतन्याहू का आज जन्मदिन है शुभकामनाओ में कमी नहीं रहनी चाहिए

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जय हिन्द 🇮🇳
इन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के हत्या की सुपारी ली थी SCO समिट के दौरान मोदी जी का तो कुछ नहीं हुआ लेकिन इनको अज्ञात वीरों ने ऊपर भेज दिया ... जय सियाराम 🙏🏻💫🌟🎉
रात ढली थी और ढाका के तंग गलियों में बातें फुसफुसा रही थीं. एक US स्पेशल फोर्सेज ऑपरेटिव और कुछ बांग्लादेशी मिल्ट्री फोर्सेज के लोग, ढाका के एक होटल में मिलते हैं.
योजना बन रही थी: उत्तर-पूर्व भारत के कुछ सैन्य ठिकानों में सेंध लगाने की साज़िश, इस प्लान में पाकिस्तानी खुफिया संगठन (ISI) भी बांग्लादेशी सैनिकों और US ऑपरेटिव को मदद कर रहा था.
सब कुछ जल्दी-जल्दी तय हो रहा था — नक्शे, हथियार, प्लान, लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेश, सब सेट हो चुका था.
पर तभी रात ने दूसरा मोड़ दिखाया: उसी होटल के नजदीक एक कार आकर रूकती है, उसमें से कुछ "अज्ञात" लोग उतर कर होटल के पास के गलियों में गायब हो जाते है.
फिर होटल की बगल वाली बिल्डिंग के सुनसान छत पर अचानक अँधेरे में कुछ कदम चले, होटल के उस रूम में जहां वो US कमांडर रुका था कुछ हलचल होती है, फिर सब कुछ शांत, जिसके भरोसे ये सारा प्लान बन रहा था उसे बीच में ही खत्म कर दिया गया.
प्लान टूट गया, लोगों के चेहरों पर शक उभर आया और जो चालें महीनों में बनी थीं, वे धुंए की तरह उड़ गईं. अमरीकी दूतावास ने उस स्पेशल फोर्सेज की सैनिक की पहचान तो की, लेकिन बात को आगे बढ़ाने से खुद को रोक लिया और कोई कमेंट नहीं किया. उधर बांग्लादेशी आर्मी के चीफ पसीने से लथपथ भारतीय ईस्टर्न कमांड के कमांडर से अचानक मिलकर बात करने का रिक्वेस्ट डालते है.
शहर वापस अपनी रफ्तार पर लौटा, पर उन रातों की खामोशी कभी नहीं मिटती — क्योंकि जहाँ भारत विरोधी इरादे होते हैं, वहां "अज्ञात लोग" भी अक्सर पाए जाते है.
साभार सोशल मीडिया 👏

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