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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, अद्वितीय राष्ट्रभक्त एवं आज़ाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" जैसे ओजस्वी मंत्र से राष्ट्रवासियों के हृदय में स्वाधीनता की ज्योति प्रज्वलित करने वाले नेताजी का जीवन अदम्य साहस, संकल्प और राष्ट्रप्रेम का अनुपम उदाहरण है।
सबसे पहले, आकाश चोपड़ा की व्याख्या महत्वपूर्ण है: उन्होंने स्पष्ट कहा कि "मुझे नहीं लगता कि उन्हें (धोनी कोचिंग में) रुचि है। कोचिंग एक मुश्किल काम है" और "यह एक साल में 10 महीने की प्रतिबद्धता है। मुझे नहीं पता कि धोनी के पास इतना समय होगा या नहीं" । यह तथ्य धोनी के वर्तमान व्यक्तिगत प्राथमिकताओं—विशेषकर परिवार को समय देने के—they जिक्र करता है।
इसके अलावा, बीसीसीआई के नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति भारत टीम का पूरा-समय मुख्य कोच बनना चाहता है, उसे सभी प्रारूपों से सेवानिवृत्त होना आवश्यक है। लेकिन धोनी अभी भी आईपीएल (IPL) में सक्रिय खिलाड़ी हैं, जो उन्हें फिलहाल इस भूमिका के लिए अयोग्य बनाता है । यह एक महत्त्वपूर्ण बाधा है।
हालाँकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह उल्लेख है कि विराट कोहली के बचपन के कोच, राजकुमार शर्मा, ने धोनी को एक संभावित विकल्प के रूप में सुझाया था—that “यदि धोनी सेवानिवृत्त हो जाते हैं, तो वह एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं” । लेकिन यह सुझाव भी उस स्थिति में ही लागू होगा जब धोनी पूर्ण रूप से क्रिकेट से संन्यास ले लें।
तो वास्तव में, वर्तमान परिदृश्य में धोनी का टीम इंडिया के मुख्य कोच बनना निम्न कारणों से असंभव प्रतीत होता है:
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प्रमुख कारण:
धोनी की निजी प्राथमिकताएँ और रुचियों का अभाव — कोचिंग में समय-प्रतिबद्धता और यात्रा शामिल होती है, जो धोनी के लिए उपयुक्त नहीं लगती है ।
नियमपूर्वक अनुपालन की कमी — अभी भी सक्रिय खिलाड़ी होने के कारण BCCI नियमों के अनुसार, उन्हें कोच पद के लिए योग्य नहीं माना जाता है ।
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