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44 ث - ترجم

स्थान: वाराणसी एयरपोर्ट रनवे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्लेन से उतर कर खड़े हैं, तीन सीनियर अफसर उनके सामने... कुल चार लोग।
न कोई माइक, न कोई मीडिया, सिर्फ रनवे की गर्म हवा और चेहरे पर गंभीरता की परछाईं।
बातचीत किसने सुनी? किसी के पास रिकॉर्डिंग नहीं, कोई बयान नहीं...
लेकिन पूरे सिस्टम में मानो अलार्म बज गया हो, "पीएम ने कमिश्नर को सख्त निर्देश दिए हैं।"
मुद्दा? वाराणसी गैंगरेप।
लहजा? सख़्त।
मैसेज? बिल्कुल क्लियर, "कड़ी कार्रवाई चाहिए।"
बस... एक रनवे मीटिंग ने वो कर दिखाया जो कई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर पातीं।
किसी ने कुछ कहा नहीं, लेकिन सब समझ गए, "प्रधानमंत्री नाराज़ हैं!"
Public Relations के छात्रों के लिए इससे बेहतर केस स्टडी क्या होगी?
कैसे सिर्फ एक विज़ुअल, एक मोमेंट और बिना बोले एक्शन, एक पूरा नैरेटिव सेट कर देता है।
ये है पावर ऑफ परसेप्शन। और यही है मास्टरस्टोक!

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