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कबीर परमात्मा ने काशी में केशव बंजारा रूप में 18 लाख साधु-संतों सहित जनसमूह को तीन दिन का दिव्य भंडारा कराया। बिना पकाए मिठाइयों, लड्डुओं, खीर व हलवे के ढेर लग गए। हर कोई तृप्त होकर परमात्मा की महिमा गा रहा था।

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कठिनाइयाँ चाहे पहाड़ सी हों,
पर “जय हनुमान” बोलते ही राह आसान हो!
संकटमोचन हनुमान की जय!

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ये जिंदगी है मंजिल का लालच देकर,
सारी उम्र सफ़र में रखती है.

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जाकी न फ़टे विमाई, वो क्या जाने पीर पराई

कुछ लोगो की आँखे गड्ढे में गिरने के बाद ही खुलती है।

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बिहार में नेता लोग कहता है बड़ा फैक्टरी लगाने में बिहार में जमीन की दिक्कत है। सरकार को एक पैनल गठित करके भोजपुरी गीतकारों से मिलकर बात करना चाहिए कि कौन से तकनीकी से "ढोढ़ी पर पटना में मेट्रो चली", इस तकनीकी का राज जैसे ही भोजपुरी गीतकारों के पास से बाहर आएगा फिर सरकार के पास फैक्टरी के लिए जमीन का बहाना नहीं रह जाएगा। टाटा, बिड़ला, अडानी, अम्बानी सब ढोढ़ी पर फैक्टरी खोलते फिरेगा।

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