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ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
इस श्लोक का अर्थ है:
हे नारायणी, आपको नमस्कार है.
जो समस्त मंगलों में मंगलमय हैं, स्वयं मंगलमय हैं.
समस्त मंगलमय गुणों से पूर्ण हैं.
जो भक्तों के समस्त पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को पूर्ण करती हैं.
हे नारायणी, जो शरण देने वाली हैं.
जिनके तीन नेत्र हैं और जिनका मुख चमकता है.
इस श्लोक का उच्चारण इस तरह किया जाता है - ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।.
इस श्लोक का उच्चारण माँ आदिशक्ति की उपासना के महापर्व नवरात्रि और माँ गौरी की उपासना के पर्व 'दुर्गाष्टमी' पर किया जाता है.
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'रसभारती' इंदौर में 'रंग पंचमी' के अवसर पर रसवंत कविता के आयोजन में श्रेष्ठ कविताओं,रसज्ञ श्रोताओं एवं ह्रदयग्राही आतिथ्य से कल की शाम सुखद स्मृतियों की पुस्तिका में एक पृष्ठ बन कर अंकित हो गयी।
कुछ चित्र संलग्न कर रही हूँ।🌼
प्रारम्भिक संचालन : श्री संजय पटेल
आमंत्रित कविगण : डॉ. सरिता शर्मा,डॉ.प्रवीण शुक्ल (कवितापाठ सह संचालन ),श्री बुद्धिप्रकाश दाधीच और मैं।