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विश्व वन्य जीव दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। राजस्थान जैव विविधता से समृद्ध है और वन्य जीवों के संरक्षण में विशिष्ट स्थान रखता है।

आइए, इस विश्व वन्य जीव दिवस पर हम सभी मिलकर जैव विविधता के संरक्षण का संकल्प लें और इस धरती को सुरक्षित और समृद्ध बनाने में अपना योगदान दें।

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अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व, जहां 2008 तक एक भी बाघ नहीं बचा था, आज 42 बाघों (शावकों सहित) का घर बन चुका है।

बाघों की वापसी के साथ जंगल की रौनक लौट आई है—पेड़-पौधे, झीलें, और पूरी जैव विविधता फिर से खिल उठी है।

अगर आप दिल्ली या जयपुर के आसपास हैं और इस सुहाने बसंत के मौसम में एक परफेक्ट वीकेंड गेटवे की तलाश में हैं, तो अलवर एक शानदार विकल्प हो सकता है।

अरावली की हरियाली, स्वच्छ हवा, शांत झीलें, जंगल सफारी, राजस्थानी हेरिटेज और स्थानीय खानपान—यह सब मिलकर आपको एक यादगार अनुभव देंगे।

दिल्ली और जयपुर से सिर्फ 3-4 घंटे की दूरी पर स्थित अलवर सड़क और रेलमार्ग से शानदार कनेक्टिविटी रखता है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व के अलावे भी 50-60 किलोमीटर के दायरे में बहुत कुछ देखने, एक्सप्लोर करने के लिए है.

📍 Sariska Tiger Reserve
📍 Siliserh Lake
📍 Garbhaji Waterfall
📍 City Palace
📍 Moosi Maharani ki Chhatri
📍 Bhangarh Fort
📍 Neelkanth Mahadev Temple
📍 Bala Quila (अलवर किला)

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अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व, जहां 2008 तक एक भी बाघ नहीं बचा था, आज 42 बाघों (शावकों सहित) का घर बन चुका है।

बाघों की वापसी के साथ जंगल की रौनक लौट आई है—पेड़-पौधे, झीलें, और पूरी जैव विविधता फिर से खिल उठी है।

अगर आप दिल्ली या जयपुर के आसपास हैं और इस सुहाने बसंत के मौसम में एक परफेक्ट वीकेंड गेटवे की तलाश में हैं, तो अलवर एक शानदार विकल्प हो सकता है।

अरावली की हरियाली, स्वच्छ हवा, शांत झीलें, जंगल सफारी, राजस्थानी हेरिटेज और स्थानीय खानपान—यह सब मिलकर आपको एक यादगार अनुभव देंगे।

दिल्ली और जयपुर से सिर्फ 3-4 घंटे की दूरी पर स्थित अलवर सड़क और रेलमार्ग से शानदार कनेक्टिविटी रखता है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व के अलावे भी 50-60 किलोमीटर के दायरे में बहुत कुछ देखने, एक्सप्लोर करने के लिए है.

📍 Sariska Tiger Reserve
📍 Siliserh Lake
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📍 City Palace
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📍 Bala Quila (अलवर किला)

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अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व, जहां 2008 तक एक भी बाघ नहीं बचा था, आज 42 बाघों (शावकों सहित) का घर बन चुका है।

बाघों की वापसी के साथ जंगल की रौनक लौट आई है—पेड़-पौधे, झीलें, और पूरी जैव विविधता फिर से खिल उठी है।

अगर आप दिल्ली या जयपुर के आसपास हैं और इस सुहाने बसंत के मौसम में एक परफेक्ट वीकेंड गेटवे की तलाश में हैं, तो अलवर एक शानदार विकल्प हो सकता है।

अरावली की हरियाली, स्वच्छ हवा, शांत झीलें, जंगल सफारी, राजस्थानी हेरिटेज और स्थानीय खानपान—यह सब मिलकर आपको एक यादगार अनुभव देंगे।

दिल्ली और जयपुर से सिर्फ 3-4 घंटे की दूरी पर स्थित अलवर सड़क और रेलमार्ग से शानदार कनेक्टिविटी रखता है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व के अलावे भी 50-60 किलोमीटर के दायरे में बहुत कुछ देखने, एक्सप्लोर करने के लिए है.

📍 Sariska Tiger Reserve
📍 Siliserh Lake
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📍 Bhangarh Fort
📍 Neelkanth Mahadev Temple
📍 Bala Quila (अलवर किला)

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बुर्का बैन होना चाहिए... सरकार से मांग करें

सरकारी कार्यों में बुर्का और नकाब पहनकर व्यवधान उत्पन्न करेंगे लेकिन जब बात पैसे की हो दिया मिर्जा से लेकर सायमा की तरह चेहरे के साथ मॉडलिंग करेंगे और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनेंगे

भारत सरकार को कानून बनाकर बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए

ऐसे दोगलापन नही चलेगा
यह देश कानून से चलता है, सरिया कानून से नही

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भूले तो नहीं हैं.. दुर्गा शक्ति नागपाल को..??

“ज्यादा पुरानी नही सन् 2013 की बात है”

जिहादी “आजम खान” के नेतृत्व में अखिलेश यादव की सरकार ने पूरे यूपी को शर्मसार कर दिया था।

दुर्गा शक्ति नागपाल (IAS) ने गौतमबुद्ध नगर जिले में उस समय के समाजवादी खनन माफियाओं के खिलाफ अभियान छेड़ने की गलती कर बैठीं।

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UP के प्रयागराज में शादी के मात्र 2 दिन बाद ही दुल्हन माँ बन गई। ससुराल में नव विवाहिता ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। करछना के युवक की बारात गांव जसरा गई थी। अगले दिन रिसेप्शन हुआ। तीसरे दिन बहू बच्चे की माँ बन गई।

युवक ने अपनाने से किया इंकार...

बच्चे के जन्म के बाद युवक ने पत्नि को अपनाने से इंकार कर दिया।युवक का कहना था की शादी 4 माह पहले तय हुई थी। उसका इस बच्चे से कोई जुड़ाव नहीं हैं। वही लड़की पक्ष ने बताया युवक व युवती विवाह से पहले संपर्क में थे..
समस्या समाधान...
अब DNA टेस्ट ही इसका राज खोलेगा।
फिलहाल..
गांव में पंचायत हुई.. फिलहाल जच्चा - बच्चा को मायके भेज दिया गया हैं।

फोटो वरमाला के बाद स्टेज की हैं। 👇🏻 जिसमे दूल्हा दुल्हन बैठे हुए हैं।

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