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स्वर्गाश्रम बर्रा-2 में टिन शेड के लोकार्पण अवसर पर क्षेत्रीय सांसद भाई श्री रमेश अवस्थी जी एवं बड़े भाई श्री विजय कपूर जी( कोऑपरेटिव इस्टेट) के साथ उद्घाटन किया ।
यह प्रयास लोगों की सुविधा एवं सेवा के प्रति एक सार्थक कदम है।
यहाँ कानपुर भाजपा दक्षिण अध्यक्ष श्री शिवराम सिंह जी, स्वर्गाश्रम समिति चेयरमैन श्री ओंकारनाथ मल्होत्रा जी, समिति अध्यक्ष श्री बलदेव राज मल्होत्रा जी, उपाधक्ष श्री सीताराम खत्री जी, उपाध्यक्ष श्री सुनील नारंग जी, श्री जगदीश कपूर जी, उप चेयरमैन श्री राजेश भल्ला जी, पार्षदगण श्री सुधीर यादव जी, श्री अनिल यादव जी, गोलू शुक्ला जी, पार्षद प्रतिनिधि नीरज चड्ढा जी, मंडल अध्यक्ष श्री बिट्टू परिहार जी, श्री दीपू पासवान जी समेत संगठन पदाधिकारी एवं समिति सदस्य उपस्थित रहे….

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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर के पिता एयर कमोडोर मंगत्तिल करक्कड़ चंद्रशेखर का निधन हो गया। बेंगलुरु के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। एम. के. चंद्रशेखर 1954 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए। 1986 में एयर कमोडोर के पद से रिटायर हुए।
#rajeevchandrasekhar #aircmdemkchandrasekhar

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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर के पिता एयर कमोडोर मंगत्तिल करक्कड़ चंद्रशेखर का निधन हो गया। बेंगलुरु के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। एम. के. चंद्रशेखर 1954 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए। 1986 में एयर कमोडोर के पद से रिटायर हुए।
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर के पिता एयर कमोडोर मंगत्तिल करक्कड़ चंद्रशेखर का निधन हो गया। बेंगलुरु के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। एम. के. चंद्रशेखर 1954 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए। 1986 में एयर कमोडोर के पद से रिटायर हुए।
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दुर्गा सप्तशती, जिसे देवी महात्म्यम भी कहते हैं, मार्कंडेय पुराण का एक भाग है। इसमें तीन प्रमुख चरित्र हैं - राजा सुरथ, समाधि नामक वैश्य और मेधा ऋषि। ये तीनों ऋषि से ज्ञान प्राप्त करते हैं और देवी महात्म्यम की कथाएँ सुनते हैं।
​दुर्गा सप्तशती में तीन प्रमुख खंड या "चरित" हैं, और प्रत्येक चरित में एक महत्वपूर्ण कथा का वर्णन किया गया है।
​प्रथम चरित: महाकाली की कथा
​प्रमुख कथा: मधु-कैटभ वध की कथा।
​वर्णन: सृष्टि के आरंभ में, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन थे, तब उनके कानों से मधु और कैटभ नामक दो महाशक्तिशाली असुर उत्पन्न हुए। ये दोनों असुर ब्रह्मा जी का वध करने के लिए तैयार हो गए। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु को जगाने के लिए महाकाली (योगनिद्रा) की स्तुति की। ब्रह्मा जी की स्तुति से प्रसन्न होकर देवी प्रकट हुईं और भगवान विष्णु को जगाया। जब भगवान विष्णु उठे, तो उन्होंने उन असुरों से युद्ध किया। अंत में, देवी महाकाली की माया के कारण, वे दोनों असुर मारे गए।
​महत्व: यह कथा बताती है कि देवी महाकाली ही सृष्टि की मूल शक्ति हैं, जो शुभ और अशुभ दोनों को नियंत्रित करती हैं। वे योगनिद्रा के रूप में विष्णु को भी नियंत्रित करती हैं।

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इंसान कहता है कि पैसा आए तो मैं कुछ करके दिखाऊं ,

और पैसा कहता है कि तू कुछ करके दिखा तो मैं आऊं...

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