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एक ये खिलाड़ी है.. जो जिंदगी भर अभाव से लड़ा... जो जिंदगी भर ताने सुनता रहा, समाज के अनावश्यक प्रश्नों को झेलता रहा.....तिरस्कार और अपमान का घूँट पीता रहा.... लेकिन इसने हार नहीं मानी.
नवदीप सिंह पिछले Paralympic में चौथे स्थान पर आया...खूब मेहनत की और इस बार Gold जीता.
ये भी हरियाणा से ही हैं... इनके पिता किसान हैं... ये भी गरीब परिवार से है.. लेकिन कोई शिकायत नहीं.. कोई नखरा नहीं... कोई ऊँचे बोल नहीं.
तभी Gold medal मिला है.. वरना हवा में उड़ने वालों को तो असली मैडल भी नसीब नहीं होते.
खाप वाले दूर रहे।