8 w - Translate

हाई-प्रोफाइल विवाद का सुखद अंत, चर्चित PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और आलोक फिर रहने लगे साथ

PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात उनके पति आलोक मौर्या के बीच करीब ढाई साल से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है.

#jyotimaurya #alok

image
8 w - Translate

🚨 बड़ा बदलाव! अप्रैल में ही मिलेगा 3 महीने का राशन
सरकार ने राशन वितरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे लाखों लोगों की दिनचर्या बदल सकती है। अब अप्रैल महीने में ही अप्रैल, मई और जून का राशन एक साथ दिया जाएगा।
लेकिन सवाल ये है…
क्या ये सिर्फ सुविधा है या कोई बड़ी रणनीति?
✔️ किन लोगों को मिलेगा फायदा
✔️ कैसे होगा पूरा वितरण
✔️ क्या हैं नए नियम
👉 पूरी जानकारी पढ़ें और दूसरों के साथ शेयर करें

image
8 w - Translate

दिल्ली की सियासत से लेकर पंजाब और मुंबई तक इन दिनों एक चर्चा तेज़ हो रही है—कि आम आदमी पार्टी के युवा चेहरा राघव चड्ढा, अब कांग्रेस में आने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की एक महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष स्तर की नेता, पंजाब के सुपर CM कहे जाने वाले वरिष्ठ चेहरे और 2–3 बड़े कांग्रेसी नेताओं के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही है।
बताया जा रहा है कि यह सिर्फ सामान्य मुलाकातें नहीं हैं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। खास बात यह भी सामने आ रही है कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ प्रभावशाली लोगों के जरिए भी उनकी छवि और एंट्री को लेकर माहौल बनाया जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में नई जगह बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने की चाहत के बीच, राघव चड्ढा के लिए कांग्रेस एक नया प्लेटफॉर्म बन सकता है। वहीं कांग्रेस भी एक युवा, पढ़ा-लिखा और आक्रामक वक्ता अपने साथ जोड़कर नई ऊर्जा लाना चाहती है।
हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से अंदरखाने बातचीत की खबरें सामने आ रही हैं, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

image
8 w - Translate
रमेश गुप्ता की 2019 में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। उम्र सिर्फ 54 साल।

उनके पास ₹50 लाख की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी थी। 11 साल तक एक भी प्रीमियम मिस नहीं किया।

उनकी पत्नी ने क्लेम फाइल किया।
इंश्योरेंस कंपनी बोली: “हमें जांच करनी होगी।”

जांच 3 साल तक चली।
बार-बार नए दस्तावेज मांगे गए।
वह हर बार देती रहीं, और हर बार नई मांग आ जाती।

इस बीच हालात बिगड़ गए—
घर की EMI नहीं भर पाईं,
गाड़ी बेचनी पड़ी,
रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा।

2022 में कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया।
कारण बताया “पहले से बीमारी छुपाई गई थी।”

वो “बीमारी” क्या थी?
सिर्फ हल्का ब्लड प्रेशर,
जो 2015 के एक रूटीन चेकअप में नोट हुआ था।
न कोई इलाज, न कोई दवा।

पत्नी ने हार नहीं मानी।
IRDAI और फिर कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट का साफ फैसला आया—
जिस बीमारी का कभी इलाज नहीं हुआ,
जो कभी स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती,
उसे 11 साल बाद क्लेम रिजेक्ट करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

आदेश दिया गया:
₹50 लाख की पूरी राशि,
2019 से 9% ब्याज के साथ,
और ₹1 लाख मानसिक उत्पीड़न के लिए।

3 साल तक एक विधवा को घुमाया गया।
लेकिन अदालत ने उसका हक वापस दिलाया—पूरा, ब्याज सहित।

याद रखिए:
अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम “नॉन-डिस्क्लोज़र” के नाम पर खारिज हो
तो चुप मत बैठिए, लड़िए।

अदालतें बार-बार कह चुकी हैं
छोटी, बिना इलाज वाली स्थितियों को आधार बनाकर क्लेम रिजेक्ट करना गलत है।

8 w - Translate

ये अमेरिकन बच्चों का तारतम्य भरा खेल कैसा लगा?

सभी ताल से ताल मिलाकर खेल रहे हैं।