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साल की सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी बनीं एरिना सबालेंका
बेलारूस की खिलाड़ी ने 2024 में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते
लगभग एक करोड़ डॉलर की पुरस्कार राशि जीती
खेलपथ संवाद
सेंट पीटर्सबर्ग (अमेरिका)। स्टार टेनिस खिलाड़ी एरिना सबालेंका को पहली बार डब्ल्यूटीए की साल की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार मिला। बेलारूस की 26 वर्षीय सबालेंका ने 2024 में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और दुनिया की नम्बर एक महिला टेनिस खिलाड़ी भी बनीं।

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साल की सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी बनीं एरिना सबालेंका
बेलारूस की खिलाड़ी ने 2024 में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते
लगभग एक करोड़ डॉलर की पुरस्कार राशि जीती
खेलपथ संवाद
सेंट पीटर्सबर्ग (अमेरिका)। स्टार टेनिस खिलाड़ी एरिना सबालेंका को पहली बार डब्ल्यूटीए की साल की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार मिला। बेलारूस की 26 वर्षीय सबालेंका ने 2024 में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और दुनिया की नम्बर एक महिला टेनिस खिलाड़ी भी बनीं।

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साल की सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी बनीं एरिना सबालेंका
बेलारूस की खिलाड़ी ने 2024 में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते
लगभग एक करोड़ डॉलर की पुरस्कार राशि जीती
खेलपथ संवाद
सेंट पीटर्सबर्ग (अमेरिका)। स्टार टेनिस खिलाड़ी एरिना सबालेंका को पहली बार डब्ल्यूटीए की साल की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार मिला। बेलारूस की 26 वर्षीय सबालेंका ने 2024 में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और दुनिया की नम्बर एक महिला टेनिस खिलाड़ी भी बनीं।

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#सरकार से अनुरोध है कृपया संज्ञान लें
बार बार अनुरोध है #दहेज बंद करो कितनी हंसती खेली कूदती #जिंदगियां बर्बाद होगी 🙏😥
उदाहरण 👇

#बंगलोर

जहांँ तक सोशल मीडिया पर पूरी बात का पता चला है उससे लगता है 100% गलती महिला की है बाकी पूरी बात की सत्यता का मुझको नहीं पता ,हो सकता है पुरुष ही गलत हो ,फिर भी कोई अकेले गलत नहीं हो सकता।परंतु जब तलाक लेना था ,तो महिला को आउट ऑफ कोर्ट शांति के साथ सेटलमेंट कर लेना चाहिए था ।

कल पूरे दिन ट्विटर पर अतुल सुभाष का नाम ट्रेंड करता रहा।
बैंगलोर अतुल सुभाष जो महिंद्रा ऑटो में ai इंजीनियर के रूप में काम करते थे ने 24 पन्नों का सुसाइड नोट लिखकर और 90 मिनिट का डिटेल्ड वीडियो बनाकर कई हफ्तों की तैयारी के बाद सुसाइड कमिट कर लिया।
अतुल की शादी जौनपुर निवासी सिंघानिया से हुई थी जो स्वयं एसेंचर में जॉब करती थी।
शादी में अनबन हुई..
पत्नी ने घर छोड़ा..
अतुल पर दहेज का केस ठोक दिया .. उसके परिवार वालों को भी इसमें लपेट लिया..

अतुल रहते थे बंगलौर..
केस चल रहा था जौनपुर..अतुल अपने सुसाइड नोट में लिखते हैं कि
पिछले 24 महीने में उन्हें 120 बार मुकदमे की तारीखों पर उपस्थित होने के लिए जौनपुर जाना पड़ा..
वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से पेश होने की अर्जी लगाई गई.. जो पेंडिंग ही रही..
कोर्ट के आदेश से 40 हजार रुपए महीना वे अपनी उस पत्नी को देते थे जो स्वयं एक mnc में जॉब कर रही थी..और ये उस 4 साल के बच्चे की परवरिश के लिए था जिसकी शक्ल पिछले तीन साल से अतुल ने देखी भी नहीं थी..
उनकी पत्नी के इस धनराशि को बढ़ाकर 1 लाख करने की अर्जी कोर्ट में डाली हुई थी ..साथ ही तीन करोड़ रुपए की राशि केस को निबटाने के लिए ऑफिशियल मांगी गई थी।
अतुल कोर्ट की एक बहस का जिक्र करते हुए लिखते हैं कि कोर्ट में उन्होंने जज साहिबा से कहा कि ncrb के डेटा के अनुसार फर्जी दहेज मुकदमों की वजह से हर वर्ष इतना आदमी आत्महत्या कर लेता है तो उनकी पत्नी ने कहा कि " तुम भी क्यों नहीं कर लेते"

इस पर जज साहिबा हंसी और उनकी पत्नी को बाहर जाने को बोल दिया।

अतुल आगे लिखते हैं कि अपने ही शत्रुओं को खुद से हर महीने पैसे देना ये जानते हुए भी कि वह पैसा वो मेरे ही खिलाफ कानूनी लड़ाई को फ्यूल करने में use करेंगे..मुझसे अब और नहीं हो सकता..

और वे तैयारी करते हैं..
मरने की तैयारी..

वे एक प्रॉपर चेक लिस्ट बनाते हैं ..
कौन कौन से डॉक्यूमेंट साइन करने हैं..
101 बार नमः शिवाय का जप करना है..
स्नान करना है..
खिड़कियां खोल देनी हैं..
दरवाजा बंद कर लेना है..
राष्ट्रपति को चिट्ठी भेजने है..
इन इन लोग को मेल करना है..
अलग अलग फोल्डर बनाकर गूगल ड्राइव पर सब कुछ अपलोड करना है..
उसका लिंक शेयर करना है..
वीडियो बनाना है और अपलोड करना है..
एक कविता लिखते हैं..
और फिर चेकलिस्ट का काम पूरा होने लगता है..

फिर सब खत्म..

मुझे नहीं लगता कि इससे ज्यादा प्रिपरेशन के साथ कोई आज तक आत्महत्या किया होगा।

दहेज कानून ने जजों, वकीलों और पुलिस का एक ऐसा भ्रष्ट गठजोड़ तैयार कर दिया है जिसके चंगुल में आते ही पुरुष पूरी तरह टूट जाता है।

अपने ऊपर दायर हुए 9 फर्जी मुकदमों से लड़ते हुए अतुल सुभाष चले गए..
कुछ दिन ज़िक्र होगा..
फिर शांति हो जाएगी..
फिर दहेज कानून से जूझता हुआ कोई पुरुष फंदे पर लटक जाएगा ..
तब शायद कोई जिक्र भी न होगा..

दहेज कानून इतना विसंगतियों से भरा हुआ है कि एक महिला को सिर्फ वकील के पास जाने भर की ही देर है..पुरुष और उसके पूरी परिवार का जीवन बर्बाद होना तय है।

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आइंस्टीन के जो ड्राइवर थे, उन्होंने एक दिन आइंस्टीन से कहा- " सर,आप हर सभा में जो भाषण देते हैं, वह मैंने याद कर लिया है।''

-आइंस्टीन हैरान रह गये!

फिर उन्होंने कहा, "ठीक है, मैं अगली बैठक में जहां जा रहा हूं, वे मुझे नहीं जानते, आप मेरे स्थान पर भाषण दीजिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।"

- ऐसे ही हुआ अगले दिन बैठक में ड्राइवर मंच पर चढ़ गई और ड्राइवर ने हूबहू आइंस्टीन की भाषण देने लगा....

दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं. फिर वे यह सोचकर गाड़ी के पास आए कि ड्राइवर आइंस्टीन है।

- तभी एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा, ''सर, रिश्तेदार ने क्या कहा, क्या आप एक बार फिर संक्षेप में बताएंगे?''

- असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा !!

इस बार ड्राइवर पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वह हैरान रह गये....

ड्राइवर ने उत्तर दिया. -"क्या यह साधारण बात आपके दिमाग में नहीं आई?

मेरे ड्राइवर से पूछिए वह आपको समझाएंगे "

नोट : "यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही सदा उठेंगे-बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी..!!
#alberteinstein
साभार सोशल मीडिया 👏

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बहुत ही अच्छा लगा पढ़ने के बाद आप लोग भी पढ़िए.... ।।।👇

#नागासाधू
जब अहमद शाह अब्दाली दिल्ली और मथुरा में मार काट करता गोकुल तक आ गया और लोगों को बर्बरतापूर्वक काटता जा रहा था. महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे थे, तब गोकुल में अहमदशाह अब्दाली का सामना नागा साधुओं से हो गया।
कुछ 5 हजार चिमटाधारी पूज्य नागा साधु तत्काल सेना में तब्दील होकर लाखों की हबसी, जाहिल जेहादी सेना से भिड गए।
पहले तो अब्दाली साधुओं को मजाक में ले रहा था किन्तु कुछ देर में ही अपने सैनिकों के चिथड़े उड़ते देख अब्दाली को एहसास हो गया कि ये साधू तो अपनी धरती की अस्मिता के लिए साक्षात महाकाल बन रण में उतर गए।
तोप तलवारों के सम्मुख चिमटा त्रिशूल लेकर पहाड़ बनकर खड़े 2000 नागा साधू इस भीषण संग्राम में वीरगति को प्राप्त हो गए लेकिन सबसे बड़ी बात ये रही कि दुश्मनों की सेना चार कदम भी आगे नहीं बढ़ा पाई जो जहाँ था वहीं ढेर कर दिया गया या फिर पीछे हटकर भाग गया..

इसके बाद से ऐसा आतंक उठा कि अगर किसी जिहादी आक्रांता को यह पता चलता कि युद्ध में नागा साधू भाग ले रहे हैं तो वह आक्रांता लड़ता ही नहीं था । डर कर दुम दबा कर भाग जाता था।

हमारा इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं है कि आज हम औरंगजेब, तैमूर,अकबर जैसे बर्बर लुटेरो को तो याद रखते हैं, पर इन भारतीय वीर योद्धाओं के बारें में कुछ नहीं जानते जिन्होंने पग पग पर देश धर्म के लिए अपने बलिदान दिए हैं....
हर हर महादेव 👏

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