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कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव देवेश्वर श्री हरि परशुराम अपनी समाधि से उठकर सर्वप्रथम अपनी माता से मिलते हैं इस उपलक्ष हिमांचल में देवउठनी एकादशी का पर्व (दशमी से पूर्णिमा तक रेणुका जी मेला) भी मनाया जाता है 🙏
पूर्णिमा तक भगवान अपनी माई के साथ ही रहते हैं 🙏
इस वर्ष 10 नवंबर से 15 नवंबर देव दीवाली कार्तिक पूर्णिमा तक यह पावन मुहूर्त है
महामाई रेणुका और श्री परशुराम के पावन पवित्र मिलन एंव महापूजा पर्व की अग्रिम बधाइयां 💐🙏
#देवउठनी #एकादशी #कार्तिक #पूर्णिमा #नारायण #परशुरामजी #हरि #रेणुका #माँ #जय_त्रिशक्ति
4 साल की आयरा एस गाडिया ने केवल 30 किलो वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड बनाकर सबको चौंका दिया है। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना अपने आप में एक अद्भुत काम है। आयरा की मेहनत और समर्पण ने न केवल उन्हें बल्कि उनके परिवार और देश को भी गर्वित किया है। इतनी कम उम्र में ऐसी ताकत और हौसला दिखाना हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।
आयरा की इस असाधारण उपलब्धि पर उन्हें दिल से बधाई और ढेरों शुभकामनाएं! 🌟💪 हम आशा करते हैं कि आयरा इसी तरह आगे बढ़ती रहें और अपने सपनों को साकार करें।
जय भीम _जय जोहार गर्व की बात है बिटिया...नागपुर ...वंदे भारत ट्रेन की बैतूल जिले की बेटी काजोल झोड़ पाटिल बनी सिनीयर अस्सिटेंट लोको पायलेट ....
पापा राजेन्द्र झोड़ व पति पवन पाटील सहित पूरे परिवार और जिलेवासियों का गर्व है काजोल झोड़ पाटिल को हार्दिक बधाई मंगलकामनाये -💐💐💐💐
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कर्णम मल्लेश्वरी भारत की पहली महिला वेटलिफ्टर हैं, जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीतकर इतिहास रचा। उनका जन्म 1 जून 1975 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। मल्लेश्वरी ने कठिन मेहनत और संघर्ष के बल पर खुद को वेटलिफ्टिंग में स्थापित किया और कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
2000 के सिडनी ओलंपिक में मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता, जो किसी भारतीय महिला का पहला ओलंपिक पदक था। उन्होंने 69 किग्रा वर्ग में 110 किग्रा स्नैच और 130 किग्रा क्लीन एंड जर्क का वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की। उनकी इस सफलता ने न केवल भारतीय खेल जगत में एक नई क्रांति लाई, बल्कि देश की युवा महिलाओं को भी खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।
मल्लेश्वरी को उनकी उपलब्धियों के लिए "राजीव गांधी खेल रत्न" और "पद्म श्री" जैसे सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। उनकी कहानी संघर्ष, समर्पण, और भारतीय महिलाओं के लिए एक मिसाल है, जो यह दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
सर्दियों में बम्पर फ्लावरिंग के लिए गेंदा, कैलेंडुला, पॉपी, गुलदाउदी , पेटुनिया और डायंथस के बीजों को लगाने का बेस्ट टाइम चल रहा है। बीजों को लगाने के लिए मिट्टी तैयार करें, जिसमें 50% मिट्टी, 25% वर्मीकम्पोस्ट / गोबर की खाद और 25% कोकोपीट / रेत मिलाएं। इस मिश्रण को गमले या सीडलिंग ट्रे में भरें और फूलों के बीजों को मिट्टी के ऊपर बिखेर दें। फिर पोटिंग मिक्स की एक पतली सी लेयर से बीजों को कवर करें और पानी डालें। गमले / सीडलिंग ट्रे को प्लास्टिक की पन्नी से ढ़क कर सेमी-शेड वाली जगह पर रखें, जहां सुबह की 2-3 घंटे की हल्की धूप आती हो। 1 हफ्ते के बाद बीज अंकुरित होने लगेंगे। जब पौधे थोड़े बड़े हो जाए तो उन्हें अलग-अलग गमलों में ट्रांसप्लांट कर दें।