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ईश्वर के दरबार में कोई भी VVIP नहीं होता🙏🙏
हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि
VIP लोग जाते हैं और आराम से बड़ी ही सुख सुविधा के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाकर चले आते हैं, वहीं
आम आदमी जाए तो
पहले 15-20KM पैदल चलता है
धक्के मुक्के खाता है
भगदड़ हो जाए तो दबकर मर जाता है
ट्रेन में चढ़ने के लिए संघर्ष करता है
ईश्वर के पास जाने के लिए VVIP और साधारण लोग बने हुए हैं मगर याद रहे जिस दिन भगवान के घर पहुंचोगे वहां कोई VVIP नहीं होता।
ईश्वर के दरबार में कोई भी VVIP नहीं होता🙏🙏
हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि
VIP लोग जाते हैं और आराम से बड़ी ही सुख सुविधा के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाकर चले आते हैं, वहीं
आम आदमी जाए तो
पहले 15-20KM पैदल चलता है
धक्के मुक्के खाता है
भगदड़ हो जाए तो दबकर मर जाता है
ट्रेन में चढ़ने के लिए संघर्ष करता है
ईश्वर के पास जाने के लिए VVIP और साधारण लोग बने हुए हैं मगर याद रहे जिस दिन भगवान के घर पहुंचोगे वहां कोई VVIP नहीं होता।
ईश्वर के दरबार में कोई भी VVIP नहीं होता🙏🙏
हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि
VIP लोग जाते हैं और आराम से बड़ी ही सुख सुविधा के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाकर चले आते हैं, वहीं
आम आदमी जाए तो
पहले 15-20KM पैदल चलता है
धक्के मुक्के खाता है
भगदड़ हो जाए तो दबकर मर जाता है
ट्रेन में चढ़ने के लिए संघर्ष करता है
ईश्वर के पास जाने के लिए VVIP और साधारण लोग बने हुए हैं मगर याद रहे जिस दिन भगवान के घर पहुंचोगे वहां कोई VVIP नहीं होता।
