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साक्षी मलिक, भारतीय महिला कुश्ती में एक ऐसा नाम है जिसे सुनकर हर भारतीय गर्व से भर जाता है। साक्षी का जन्म 3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गाँव में हुआ था। उनके पिता, सुखबीर मलिक, दिल्ली परिवहन निगम में बस कंडक्टर के रूप में काम करते थे और उनकी माता सुदेश मलिक, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं। साक्षी का कुश्ती के प्रति जुनून बचपन से ही स्पष्ट था और उनके परिवार ने हमेशा उनके सपनों का समर्थन किया।
साक्षी ने अपने कुश्ती करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र में कर दी थी। उनके कोच ईश्वर दहिया ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू किया। साक्षी ने अपने कड़ी मेहनत और समर्पण से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2016 के रियो ओलंपिक में आई, जब उन्होंने 58 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
साक्षी की इस सफलता ने उन्हें रातोंरात देश की एक लोकप्रिय हस्ती बना दिया। उनके इस पदक ने न सिर्फ भारतीय कुश्ती को एक नई दिशा दी, बल्कि पूरे देश में महिलाओं के खेल के प्रति दृष्टिकोण को भी बदला। साक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, कोच और सभी समर्थकों को दिया है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।
साक्षी मलिक ने न सिर्फ अपनी खेल प्रतिभा से, बल्कि अपने संघर्ष और दृढ़ संकल्प से भी लोगों को प्रेरित किया है। वह महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी हैं, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं। साक्षी की कहानी यह बताती है कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो और समर्थन मिले, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।
आज भी साक्षी मलिक भारतीय कुश्ती में सक्रिय हैं और नए प्रतिभाओं को प्रेरित करने के लिए विभिन्न मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती हैं। उनके योगदान और समर्पण को हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद किया जाएगा।
इस फोटो में जो सज्जन हैं
उनका नाम श्रीमान #कृष्णमूर्ति_अय्यर है -जोकि #किट्टू_मामा के नाम से प्रसिद्ध हैं। #अयंगर_ब्राह्मण हैं।
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