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हरियाणा के नूंह जिले के तावडू नगर के रहने वाले सलमान खान ने नेशनल गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता है। बेहतरीन रोइंग खिलाड़ी सलमान ने सेना का प्रतिनिधित्व करते हुए गोवा में आयोजित 37वीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में तटीय नौकायन स्पर्धा में यह उपलब्धि हासिल की। इस प्रतियोगिता में पहली बार कोस्टल बीच स्प्रिंट को शामिल किया गया था, जिसमें सलमान ने भारतीय सेना की ओर से पुरुष वर्ग में हिस्सा लिया।
सलमान ने 500 मीटर की दूरी को मात्र 2 मिनट 33 सेकंड में पूरा करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस कामयाबी से न केवल नूंह जिले का, बल्कि पूरे हरियाणा का गौरव बढ़ा है। उनकी जीत पर क्षेत्र के लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें ढेरों बधाइयां दी हैं।
गोवा में चल रहे 37वें राष्ट्रीय खेलों में देशभर के करीब दस हजार एथलीट 43 अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं। सलमान की इस सफलता ने तटीय नौकायन स्पर्धा में एक नया मानदंड स्थापित किया है, और वे भविष्य में भी अपनी प्रतिभा से देश को गर्वित करने का वादा करते हैं।

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मीडिया का दोगलापन देखिए
गंदी फ़िल्म को तो खूब प्रमोट करते है ,लेकिन लोगो का भला करने वाली लड़की की किसी को कोई कदर नहीं है

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"मेरे सबसे मुश्किल दिनों में, आपने मुझे ताकत दी। आपकी वजह से ही आज मैं यहां हूं, माँ।"
मिशेलिन स्टार शेफ विकास खन्ना ने सोशल मीडिया पर अपनी माँ, बिंदु खन्ना के लिए एक प्यार भरा और दिल को छू लेने वाला मैसेज लिखा है। इसमें उन्होंने माँ को अपनी सफलता का श्रेय दिया है।
उन्होंने बताया कि खाना बनाने का उनका सफ़र 13 साल की उम्र से शुरू हुआ, जब वह अपनी माँ के साथ विवेक पब्लिक स्कूल में छोले-भटूरे बेचने जाया करते थे।
उन्होंने आगे लिखा, "इस अगस्त में मुझे इस कमाल के पेशे में 40 साल पूरे हो जाएंगे।"
शेफ ने अपनी माँ को मुश्किल समय में उनका सहारा बने रहने के लिए शुक्रिया कहा। उन्होंने लिखा कि वह माँ ही थी जिन्होंने लॉरेंस गार्डन में पहला बिजनेस खोलने में उनकी मदद की और जब वह न्यू यॉर्क तक पहुंच गए तब भी हर मोड़ पर उनका साथ देती रहीं।
विकास याद करते हैं वो वक्त जब अमृतसर में उनके छोटे से रेस्टोरेंट में कोई मुश्किल आती, या कभी कोई जब उनसे बेरूखी से बात करता, तो भी माँ कैसे मुस्कुरा के, प्यार व सम्मान के साथ कस्टमर को जवाब देती थी और उनसे कहती थी, "विकु, यह हमारी जगह है, हमारा काम है, हमारा अभिमान है।"
आखिर में वह लिखते हैं, "आज जब मैं अपने बंगले या रेस्टोरेंट के बाहर लंबी लाइनें देखता हूं, तो लगता है कि ये सब उन्हीं के त्याग, उनकी सीख और मेहनत का नतीजा है।"
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