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उत्तराखंड की वो बहादुर बेटी, जिसने 200 गांवों की महिलाओं को जोड़ा और जंगलों के साथ कोसी नदी को भी नया जीवन दिया ❤️
उत्तराखंड की धरती हमेशा ऐसे लोगों को जन्म देती रही है, जिन्होंने अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और प्रकृति के लिए जीवन समर्पित कर दिया। ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं बसंती बहन, जिनकी कहानी संघर्ष, साहस और सेवा की मिसाल है।

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*⛳जय भारत🌞वन्दे मातरम्*⛳
*🪂 संस्कृति अपनी एकचिरन्तन*🪂

*कामदेवः कामपालः कामीकान्तः कृतागमः।*
*अनिर्देश्यवपुर्विष्णुः वीरोऽनन्तो धनञ्जयः।।83।।*

*ब्रह्मण्यो ब्रह्मकृद् ब्रह्मा ब्रह्म ब्रह्मविवर्धनः।*
*ब्रह्मविद्ब्राह्मणो ब्रह्मी ब्रह्मज्ञो ब्राह्मणप्रियः।।84।।*

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23 जुलाई/जन्म-दिवस
व्यवस्था प्रिय श्रीकृष्णदास माहेश्वरी

संघ के काम में अलग-अलग रुचि और प्रवृत्ति के लोग जुड़ते हैं। किसी की रुचि शारीरिक कार्यक्रमों में होती है, तो किसी की बौद्धिक में। कोई अस्त व्यस्त रहना पसंद करता है, तो कोई घोर व्यवस्थित। कोई मस्ती और शरारत पसंद करता है, तो कोई अनुशासन और गंभीरता। कोई शांतिप्रिय होता है, तो कोई क्रोधी और लड़ाई झगड़े में पैर फंसाने वाला। आगे चलकर उन्हीं में से फिर प्रचारक भी बनते हैं। तब उनके जीवन में कुछ बदल तो आती है; पर मूल स्वभाव प्रायः बना ही रहता है।

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23 जुलाई/जन्म-दिवस

स्वतन्त्रता आंदोलन में उग्रवाद के प्रणेता लोकमान्य तिलक

बीसवीं सदी के प्रारम्भ में भारतीय स्वतन्त्रता के आन्दोलन में एक म॰च के रूप में कार्यरत कांग्रेस में स्पष्टतः दो गुट बन गये थे। एक नरम तो दूसरा गरम दल कहलाता था। पहले के नेता गोपाल कृष्ण गोखले थे, तो दूसरे के लोकमान्य तिलक। इतिहास में आगे चलकर लाल-बाल-पाल नामक जो त्रयी प्रसिद्ध हुई, उसके बाल यही बाल गंगाधर तिलक थे, जो आगे चलकर लोकमान्य तिलक के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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