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ये मैडम थाना बिजोली की प्रभारी हैं और अपने कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल के कमरों की सफ़ाई कर रही हैं। जो सिपाही हवलदार थाना प्रभारी के बैठने वाले कक्ष को चमकाकर रखते हैं और ख़ुद थाना प्रभारी उनके कमरे की सफ़ाई करे तो देखकर मन में अच्छी अनुभूति होगी। अपने सहकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार एक परिवार की भावना को बल देता है और अच्छे व्यक्ति की पहचान बताता है। #policeofficer #ladypolice #family
एक बार एक सुनार की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसका ख़ानदान मुसीबत में पड़ गया औऱ उसके पूरे परिवार को भोजन के भी लाले पड़ गए।
एक दिन मृत सुनार की पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा बेटा! इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ, कहना ये बेच कर कुछ पैसे दे दें ।
बेटा वो हार लेकर अपने चाचा के पास गया ।
चाचा ने हार को अच्छी तरह देख और परख कर कहा बेटा! माँ से कहना कि अभी मार्केट बहुत मंदा है। थोड़ा रुक कर फ़रोख़त करना, अच्छे दाम मिलेंगे।फ़िर उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि तुम कल से मेरे दुकान पर आकर बैठना।
अगले दिन से वो लड़का रोज़ दुकान पर जाने लगा और वहाँ हीरों-जवाहरात की परख का काम सीखने लगा ।कुछ ही दिनों में वो बड़ा माहिर बन गया, लोग दूर दूर से अपने हीरे व जेवरात की परख कराने उसके पास आने लगे।
एक दिन उसके चाचा ने कहा: बेटा अपनी माँ से वो हार लेकर आना और कहना कि अब मार्केट में बहुत तेज़ी है, उसके अच्छे दाम मिल जाऐंगे ।
दूसरे दिन माँ से हार लेकर जब लड़के ने उसे परखा तो पाया कि वो तो नक़ली है।फिर उसने कुछ सोचकर उस हार को घर पर ही छोड़ दिया और दुकान लौट आया ।
चाचा ने पूछा: हार नहीं लाए?
उसने कहा: वो तो नक़ली था ।
तब चाचा ने कहा "जब तुम पहली बार उस हार को लेकर आए थे, उस वक़्त अगर मैंने उसे नक़ली बता दिया होता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक़्त आया तो चाचा हमारी चीज़ को भी जाली बताने लगे, आज जब तुम्हें खुद ज्ञात हो गया तो पता चल गया कि हार नक़ली है।
सच तो यही है कि इल्म के बग़ैर इस दुनिया में ऐसे ही ग़लतफ़हमी का शिकार होकर पारिवारिक औऱ बेहद क़रीबी रिश्ते बिगड़ते हैं।
क्या आप सोच सकते हैं कि सिर्फ 3 साल का एक बच्चा शतरंज की दुनिया में इतिहास रच सकता है? कोलकाता के नन्हे अनीश सरकार ने यह करिश्मा कर दिखाया है। महज 3 साल 8 महीने और 19 दिन की उम्र में फिडे रेटिंग हासिल कर, अनीश ने दुनिया के सबसे कम उम्र के फिडे रेटेड खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उनकी अद्वितीय प्रतिभा, गहरी सोच और समर्पण का जीता-जागता प्रमाण है।
शतरंज की इस अद्भुत यात्रा की शुरुआत पश्चिम बंगाल राज्य अंडर-9 टूर्नामेंट से हुई। कोलकाता के कैखली इलाके में रहने वाले अनीश ने ग्रैंडमास्टर दिब्येंदु बरुआ की देखरेख में अपने खेल को निखारा। इतनी छोटी उम्र में उनकी रणनीतिक समझ और खेल पर पकड़ ने हर किसी को आश्चर्यचकित कर दिया।
अनीश का यह कारनामा न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए गर्व का विषय बन गया है। उनकी यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि उम्र चाहे कितनी भी छोटी हो, सच्ची लगन और मेहनत से हर मुकाम पाया जा सकता है। आज अनीश न केवल शतरंज प्रेमियों बल्कि हर युवा के लिए प्रेरणा बन गए हैं। 🎉♟️