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An end of a huge school of thought! Your simplicity, your novelty will inspire us always! Rest in power, Sir! India mourns today!
#ratantatasir

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#dgbsf paid tribute to soldiers who made the ultimate sacrifice in the line of duty at #tanotvijaystambh & offer prayers at #tanotmata Temple Jaisalmer #rajasthan

#ratantatasir रतन टाटा The Man #vettaiyanthehunter Nano #day8

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#dgbsf paid tribute to soldiers who made the ultimate sacrifice in the line of duty at #tanotvijaystambh & offer prayers at #tanotmata Temple Jaisalmer #rajasthan

#ratantatasir रतन टाटा The Man #vettaiyanthehunter Nano #day8

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#dgbsf paid tribute to soldiers who made the ultimate sacrifice in the line of duty at #tanotvijaystambh & offer prayers at #tanotmata Temple Jaisalmer #rajasthan

#ratantatasir रतन टाटा The Man #vettaiyanthehunter Nano #day8

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Words fall short today.

Mr. Ratan Tata's
profound humanity and selfless compassion shall always inspire us.

He will forever be remembered as our beloved mentor.

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भले लोगों की दुनिया का संसार याद आयेगा
आप जैसा रत्न सा किरदार याद आयेगा
जो सोचते थे सबसे ज़्यादा दुःखी लोगों के हित में रतन टाटा नाम हर बार याद आयेगा 😭🙏🏻
#भारतरत्न
#ratantatasir #rip_legend

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Watching his funeral, where devotees from all religions gathered to pray for peace is a powerful reminder of unity & respect he inspired.

His legacy will continue to guide us,transcending boundaries & bringing people together.

RIP, a true icon.

#ratantatasir #rip_legend

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जिंदगी ऐसी ही हो कि दुनिया से जाने के बाद हर हाथ तालियों के लिए उठे।
भारत के रत्न को नमन।
जिंदगी ऐसी जीयो की रतन टाटा जैसा नाम हो जाए।
आप सदैव हर भारतीय के दिल में रहेंगे।

#ratantata #ratantatasir

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श्री रतन टाटा के जीवन की सबसे बड़ी खुशी

"मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"

यह वाक्य रतन टाटा के जीवन का वह क्षण था, जिसने उन्हें सच्चे सुख का अर्थ समझाया। जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय अरबपति श्री रतन टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा, "सर, आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली?" तब उन्होंने एक मार्मिक जवाब दिया।

जीवन के चार चरणों में खुशी की तलाश
रतन टाटा ने कहा, "मैंने जीवन में चार चरणों से गुजरा और अंततः मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।"
पहला चरण धन और साधन संचय करने का था। इस दौरान, मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मुझे उम्मीद थी।
फिर दूसरा चरण आया, जब मैंने कीमती सामान और वस्त्रों को इकट्ठा करना शुरू किया। लेकिन मुझे जल्द ही यह एहसास हुआ कि इस सुख का प्रभाव भी अस्थायी है, क्योंकि इन वस्तुओं की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती।

तीसरा चरण तब आया जब मैंने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए। उस समय मेरे पास भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% हिस्सा था, और मैं भारत और एशिया में सबसे बड़े इस्पात कारखाने का मालिक था। फिर भी, मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मैंने कल्पना की थी।

चौथा और निर्णायक चरण
फिर चौथा चरण आया, जिसने मेरे जीवन की दिशा बदल दी। मेरे एक मित्र ने मुझे विकलांग बच्चों के लिए व्हीलचेयर खरीदने के लिए कहा। करीब 200 बच्चे थे। मैंने अपने दोस्त के अनुरोध पर तुरन्त व्हीलचेयर खरीदीं। लेकिन मेरे मित्र ने आग्रह किया कि मैं उनके साथ जाकर खुद उन बच्चों को व्हीलचेयर भेंट करूं।

मैंने बच्चों को अपनी हाथों से व्हीलचेयर दीं और उनकी आंखों में जो खुशी की चमक देखी, वह मेरे जीवन में एक नया एहसास लेकर आई। उन बच्चों को व्हीलचेयर पर घूमते और मस्ती करते देखना ऐसा था, मानो वे किसी पिकनिक स्पॉट पर हों और किसी बड़े उपहार का आनंद ले रहे हों।

जीवन बदल देने वाला पल
जब मैं वापस जाने की तैयारी कर रहा था, तभी एक बच्चे ने मेरी टांग पकड़ ली। मैंने धीरे से पैर छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसने और जोर से पकड़ लिया। तब मैं झुककर उससे पूछा, "क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?"

उस बच्चे का जवाब जीवन बदलने वाला था। उसने कहा, "मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"

सच्चे सुख का अर्थ
इस एक वाक्य ने न केवल रतन टाटा को झकझोर दिया, बल्कि उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल दिया। यह अनुभव उन्हें समझा गया कि सच्ची खुशी दूसरों की सेवा में है, न कि भौतिक संपत्तियों में।

जीवन का मर्म
इस कहानी का मर्म यह है कि हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि जब हम इस संसार को छोड़ेंगे, तो हमें किस लिए याद किया जाएगा। क्या हमारा जीवन किसी के लिए इतना महत्वपूर्ण होगा कि वह हमें फिर से देखना चाहे? यही सबसे बड़ा सवाल है, जो हमें अपने जीवन के सच्चे उद्देश्य पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

रतन टाटा: 25 वर्ष से 87 वर्ष तक का सफर
रतन टाटा ने अपने जीवन के इस सफर में, 25 वर्ष से 87 वर्ष तक, आखिरकार सच्चे सुख का अर्थ समझा, जो निस्वार्थ सेवा में निहित है।

विनम्र श्रद्धांजलि देश के सच्चे भारत रत्न स्वर्गीय श्री रतन टाटा जी को 🙏😥

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ये गरबा कर रही है ...ये कैसी लग रही है
अपने शब्दों में व्याख्या कर सकते हैं 👏
अलंकृत शब्दों की कोई सीमा नहीं है

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