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समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा॥
चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई॥4॥
भावार्थ:-युद्ध में श्री हरि के हाथ से तुम्हारी मृत्यु होगी, जिससे तुम मुक्त हो जाओगे और फिर संसार में जन्म नहीं लोगे। वे दोनों मुनि के चरणों में सिर नवाकर चले और समय पाकर राक्षस हुए॥4॥
🙏 जय श्री राम 🙏
🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏
बहुत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है कि माँ नर्मदा भक्त संत श्री सियाराम बाबा जी ने देह त्याग दी है, जिन्होंने अपनी 116 वर्ष की उम्र माँ नर्मदा जी की सेवा में लगा दिया और उन्हें मरते दम तक किसी से पानी तक नहीं मांगा ऐसे संतश्री के चरणों में बारंबार नमन करता हूँ।
मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों स्थान प्रदान करें।।🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग की 76 वर्षीय प्रभा देवी ने अपने जुनून से 500 से अधिक पेड़ लगाकर एक हरा-भरा जंगल तैयार कर दिया है। सागवान, बांज, रुद्राक्ष, और केसर जैसे पेड़ उनके जंगल की शोभा बढ़ाते हैं। गाँव से बाहर कभी न जाने वाली प्रभा देवी पर्यावरण संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण हैं। उनके लगाए पेड़ न सिर्फ गाँव की जरूरतें पूरी करते हैं, बल्कि आने-जाने वाले बच्चों को भी फल देते हैं। उन्होंने कभी किसी पेड़ को नुकसान नहीं पहुँचाया और दूसरों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया।