2 años - Traducciones

सबसे अच्छे पुराने दिन 😍😍
मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है
हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.
● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं
जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।
● हम वो आखिरी लोग हैं…
जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे
● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं
जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।
● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…
जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।
● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं
जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।
जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।
जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।
जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है
जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।
जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे 🥰🥰
जय हिंद जय भारत

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2 años - Traducciones

सबसे अच्छे पुराने दिन 😍😍
मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है
हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.
● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं
जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।
● हम वो आखिरी लोग हैं…
जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे
● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं
जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।
● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…
जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।
● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं
जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।
जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।
जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।
जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है
जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।
जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे 🥰🥰
जय हिंद जय भारत

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2 años - Traducciones

आदियोगी ❤️🔱

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2 años - Traducciones

पिछले एक दो सालों से काशी में धर्म का जितना छिछालेदर होना था हो रहा है ,और काशी वासी न चेते तो इससे ज्यादे होना बाकी है !
काशी विश्वनाथ कोरिडोर के बाद काशी में लोगो का आना शुरू हुआ ,आते पहले भी थे लेकिन दर्शन और तीर्थ के लिए ,अब आते है वीडियो ,फोटो, रील और मौज मस्ती के लिए !
ये सब भी ठीक है ,काशी तीर्थ है तो बनारस मस्तियों का शहर !
लेकिन यहां के मस्ती की परिभाषा तब अलग थी अब अलग है ,अब में दारू, गांजा,चिलम,भाड़पन ज्यादे है |
काशी में पहले धर्म के विद्वान थे साथ ही साथ वो धर्म के लिए लड़ने वाले थे और गलत का डटकर सामना करने वाले भी , अब सब मौन है |
काशी विद्वत परिषद में काशी के विद्वानों/पंडितों से ज्यादे सरकार और शासन के चाहने वालो का बोलबाला है !
खैर बहुत क्या ही लिखना
ताजा मामला देखिए और समझिए
बाबा काल भैरव के गर्भगृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया ,कल्पना करिए गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर | यही कल्पना किसी और धर्म के लिए करिए कि क्या वहा ऐसा हो सकता है ?
दूसरे पक्ष को देखे तो कुछ साल पहले आम काशीवासी बाबा के गर्भगृह में जाकर आराम से दर्शन करते हुए निकलते थे लेकिन बाहरी भीड़ के चलते अब उनको भी गर्भगृह में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है |
बाबा के श्रृंगार और अन्य दिनों में आप एक तस्वीर बाबा की नहीं ले सकते आपको नियमों का हवाला दे दिया जाएगा लेकिन कोई आराम से गर्भगृह में जाकर फोटो/वीडियो शूट करे तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं !
यहां साला दिन रात शांतिप्रिय कौम के लोग हिंदू धर्म को टारगेट करने में लगी है,
धर्म प्रिय लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लड़ रहे,FIR और मुकदमे झेल रहे और यहां चंद पैसों की लालच में धर्म को अपने ही बर्बाद कर रहे है 😢
हमारी लड़ाई और पोस्ट इसलिए भी होती रही है कि हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण न हो लेकिन ऐसी तस्वीरें देखकर मन विचलित हो जाता है और लगता है कम से कम वहा ऐसा कुछ हुआ तो सरकार का खुलकर विरोध तो कर सकते है ,यहां तो अपने ही लोग है |
बाबा विश्वनाथ एक बार दया कर सकते है
लेकिन ये भैरव है "भैरव यातना" जरूर देंगे और भैरव की यातना "यम यातना"से कई गुणी ज्यादे होती है !
वक्त है माफी मांगकर संभल जाओ 😄🙏
जय बाबा काल भैरव

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2 años - Traducciones

पिछले एक दो सालों से काशी में धर्म का जितना छिछालेदर होना था हो रहा है ,और काशी वासी न चेते तो इससे ज्यादे होना बाकी है !
काशी विश्वनाथ कोरिडोर के बाद काशी में लोगो का आना शुरू हुआ ,आते पहले भी थे लेकिन दर्शन और तीर्थ के लिए ,अब आते है वीडियो ,फोटो, रील और मौज मस्ती के लिए !
ये सब भी ठीक है ,काशी तीर्थ है तो बनारस मस्तियों का शहर !
लेकिन यहां के मस्ती की परिभाषा तब अलग थी अब अलग है ,अब में दारू, गांजा,चिलम,भाड़पन ज्यादे है |
काशी में पहले धर्म के विद्वान थे साथ ही साथ वो धर्म के लिए लड़ने वाले थे और गलत का डटकर सामना करने वाले भी , अब सब मौन है |
काशी विद्वत परिषद में काशी के विद्वानों/पंडितों से ज्यादे सरकार और शासन के चाहने वालो का बोलबाला है !
खैर बहुत क्या ही लिखना
ताजा मामला देखिए और समझिए
बाबा काल भैरव के गर्भगृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया ,कल्पना करिए गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर | यही कल्पना किसी और धर्म के लिए करिए कि क्या वहा ऐसा हो सकता है ?
दूसरे पक्ष को देखे तो कुछ साल पहले आम काशीवासी बाबा के गर्भगृह में जाकर आराम से दर्शन करते हुए निकलते थे लेकिन बाहरी भीड़ के चलते अब उनको भी गर्भगृह में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है |
बाबा के श्रृंगार और अन्य दिनों में आप एक तस्वीर बाबा की नहीं ले सकते आपको नियमों का हवाला दे दिया जाएगा लेकिन कोई आराम से गर्भगृह में जाकर फोटो/वीडियो शूट करे तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं !
यहां साला दिन रात शांतिप्रिय कौम के लोग हिंदू धर्म को टारगेट करने में लगी है,
धर्म प्रिय लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लड़ रहे,FIR और मुकदमे झेल रहे और यहां चंद पैसों की लालच में धर्म को अपने ही बर्बाद कर रहे है 😢
हमारी लड़ाई और पोस्ट इसलिए भी होती रही है कि हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण न हो लेकिन ऐसी तस्वीरें देखकर मन विचलित हो जाता है और लगता है कम से कम वहा ऐसा कुछ हुआ तो सरकार का खुलकर विरोध तो कर सकते है ,यहां तो अपने ही लोग है |
बाबा विश्वनाथ एक बार दया कर सकते है
लेकिन ये भैरव है "भैरव यातना" जरूर देंगे और भैरव की यातना "यम यातना"से कई गुणी ज्यादे होती है !
वक्त है माफी मांगकर संभल जाओ 😄🙏
जय बाबा काल भैरव

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पिछले एक दो सालों से काशी में धर्म का जितना छिछालेदर होना था हो रहा है ,और काशी वासी न चेते तो इससे ज्यादे होना बाकी है !
काशी विश्वनाथ कोरिडोर के बाद काशी में लोगो का आना शुरू हुआ ,आते पहले भी थे लेकिन दर्शन और तीर्थ के लिए ,अब आते है वीडियो ,फोटो, रील और मौज मस्ती के लिए !
ये सब भी ठीक है ,काशी तीर्थ है तो बनारस मस्तियों का शहर !
लेकिन यहां के मस्ती की परिभाषा तब अलग थी अब अलग है ,अब में दारू, गांजा,चिलम,भाड़पन ज्यादे है |
काशी में पहले धर्म के विद्वान थे साथ ही साथ वो धर्म के लिए लड़ने वाले थे और गलत का डटकर सामना करने वाले भी , अब सब मौन है |
काशी विद्वत परिषद में काशी के विद्वानों/पंडितों से ज्यादे सरकार और शासन के चाहने वालो का बोलबाला है !
खैर बहुत क्या ही लिखना
ताजा मामला देखिए और समझिए
बाबा काल भैरव के गर्भगृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया ,कल्पना करिए गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर | यही कल्पना किसी और धर्म के लिए करिए कि क्या वहा ऐसा हो सकता है ?
दूसरे पक्ष को देखे तो कुछ साल पहले आम काशीवासी बाबा के गर्भगृह में जाकर आराम से दर्शन करते हुए निकलते थे लेकिन बाहरी भीड़ के चलते अब उनको भी गर्भगृह में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है |
बाबा के श्रृंगार और अन्य दिनों में आप एक तस्वीर बाबा की नहीं ले सकते आपको नियमों का हवाला दे दिया जाएगा लेकिन कोई आराम से गर्भगृह में जाकर फोटो/वीडियो शूट करे तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं !
यहां साला दिन रात शांतिप्रिय कौम के लोग हिंदू धर्म को टारगेट करने में लगी है,
धर्म प्रिय लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लड़ रहे,FIR और मुकदमे झेल रहे और यहां चंद पैसों की लालच में धर्म को अपने ही बर्बाद कर रहे है 😢
हमारी लड़ाई और पोस्ट इसलिए भी होती रही है कि हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण न हो लेकिन ऐसी तस्वीरें देखकर मन विचलित हो जाता है और लगता है कम से कम वहा ऐसा कुछ हुआ तो सरकार का खुलकर विरोध तो कर सकते है ,यहां तो अपने ही लोग है |
बाबा विश्वनाथ एक बार दया कर सकते है
लेकिन ये भैरव है "भैरव यातना" जरूर देंगे और भैरव की यातना "यम यातना"से कई गुणी ज्यादे होती है !
वक्त है माफी मांगकर संभल जाओ 😄🙏
जय बाबा काल भैरव

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शिमला में तो ठंड से बुरे हाल है

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