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बहेलिए की तरह
दबे पाँव आया सुख
मन को छला और फाँस गया...
बहुरूपिये की तरह
ठाठ से आया दुःख
मन को छुआ और यहीं रह गया...
मैंने दोनों ही भोगे
पर दुःख की अवधि अधिक रही।
भोगी गयी इन दोनों अवधियों के
निपट एकान्त क्षणों में
मैंने महसूस किया,
"दुःख,
ईश्वर से जुड़ने का सबसे सच्चा और सरल माध्यम है।"
तुम लौटना
यह साल वापसी का है
बिछड़े अय्यार प्रेम के पुनर्वास का
मुझे उम्मीद है , तुम आओगे और सब ठीक हो जाएगा
तुम्हारें छूने भर से दारुणता समाप्त हो जाएगी
जर्जर क्षुब्ध देह की सुप्तता जाग उठेगी
तुम लौटना
घुमड़ते मेघ मालाओं के साथ
मुट्ठियों में खुशियां छिपाकर
जेबों में ठसाठस भर लाना अतीत के आलिंगन
हाथ थामकर ले चलना ठंडे पहाड़ों पर
जहां का हिमपात वेदनाओं के स्याह पड़े कर्कश चिह्नों को प्रेमानुराग से तृप्त कर देगा
तुम लौटना
उन एकांतिक क्षणों को उत्तर देने जिन्होंने मुझ पर क्रूर तंज कसे
तुम्हारें पाँव पर खड़े होकर अपने देह के भार से मुक्त
हम प्रेमिल सप्तपदी मंत्रों को पुनश्चः उच्चरित करेंगे
विक्षत हृदय के प्रेम की कठोरतम अंतहीन प्रतीक्षा में
मैं उन पुराने दिनों की याद में आकाश ताकती हूं ....
कमलेश तिवारी की हत्या के साजिशकर्ता सैयद आसिम अली को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है जानते हैं तर्क क्या दिया गया? तर्क संख्या 1, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है पहले से तर्क संख्या 2, बेचारा साढ़े 4 साल से जेल में है ऐसे चलती है न्यायपालिका? ऐसे होता है न्याय?
असीम अली पर गैंगस्टर एक्ट नहीं लगाया यूपी पुलिस ने तो इसी का बहाना बना कर सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत दे दी...!