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धन्य है वो वीर सपूत,जिन्होंने ऊँचा किया माँ भारती का माथा,रणबाँकुरो के पराक्रम की कारगिल स्वयं सुनाता गाथा।
अपने अदम्य साहस और वीरता से कारगिल में तिरंगे की आन-बान-शान बरक़रार रखने वाले वीर सैनिकों को कोटि-कोटि नमन।#vijaydiwas
यह जो स्व घोषित शंकराचार्य बनकर बैठे हैं श्रीमान अभी मुक्तेश्वरानंद यह व्यक्ति शंकराचार्य कहलन के योग्य नहीं है इस व्यक्ति ने शंकराचार्य के पद और भगवान शंकराचार्य की गरिमा को नीचे गिराया है यह व्यक्ति किसी भी लिहाजा से इस पद के काबिल नहीं है जो व्यक्ति भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा पर विरोध करके मुंह फुला कर बैठा रहा जहां हिंदुओं की आस्था जुडी थी कई सौ वर्ष बाद भगवान राम को एक भवन निर्माण हुआ वहां पर यह व्यक्ति नहीं गया मगर अंबानी के दरवाजे पर विवाह में चला गया क्या शंकराचार्य विवाह में आशीर्वाद बांटने के लिए होता है यही व्यक्ति कहता है हम राजनीतिक नहीं है फिर उद्धव ठाकरे के घर जाकर के जो राजनीतिक बयान बाजी करता है वह क्या था पहले मुझे भी शंकराचार्य के पद पर बहुत विश्वास था मगर अभी मुक्तेश्वर आनंद जैसे व्यक्तियों ने इस पद की गरिमा को धूमिल कर दिया जनता को मांग करनी चाहिए कि जिस तरह सिख पंथ ने अपने धर्म गुरुओं की पदवी किसी व्यक्ति को देना बंद कर दिया ठीक उसी प्रकार आदि शंकराचार्य की पदवी अबकिसी भी व्यक्ति को नहीं देना चाहिए क्योंकि यह कलयुग है और आज के युग में अब आदि शंकराचार्य मिलना महान विभूति मिलना मुश्किल है आप क्या सोचते हैं यह व्यक्ति शंकराचार्य पद के काबिल है मुझे पता है कि बहुत से लोगों को यह बात बुरी लगेगीऔर लोग गाली गलौज भी करेंगे मगर आंख बंद करने से कुछ नहीं होगा सच्चाई को देखिए

योगेश्वर श्रीकृष्ण जब धर्म के बारे में कहते हैं कि सब धर्मों को त्याग और मुझ एक की शरण में आ,, तब वे आपके बाहरी #सामाजिक दायित्व की बात करते हैं,, आप पिता हैं तो आपका पितृ धर्म है संतान के प्रति,, आप बेटे हैं तो पुत्र धर्म है,, आप छात्र हैं तो विद्यार्थी या शिष्य का जो धर्म होता है उसका पालन करना है,, तो वे कह रहे हैं कि कौन तेरा दादा है कौन बेटा है कौन भाई है,, तू ये सब धर्म छोड़ और मैं जो कहता हूं पहले उसे सुन फिर कर,,
महर्षि #कणाद जब धर्म की बात करते हैं तो वे पदार्थ के धर्म की बात करते हैं,, जैसे अग्नि का धर्म है ताप और प्रकाश, अगर अभिव्यक्त है जैसे चूल्हे में यज्ञ में बल्ब में दिए में तो ताप भी देगी और प्रकाश भी,, अनाभिव्यक्त है जैसे शरीर में या जठराग्नि में तो सिर्फ छुने पर ताप देगी,, जल का धर्म है शीतलता,, वो किसी भी हालत में शीतल ही रहता है, तुम लक्कड़ आदि लगाकर गैस पर चढ़ाकर गर्म कर भी दोगे तो सहायक कारण लक्कड़ आदि हटते ही जल फिर अपने स्वाभाविक धर्म शीतलता में आ जाएंगे,, इससे अन्य एक और महान व्याख्या महर्षि कणाद ने धर्म की दी है वह फिर कभी,,
ऐसे ही और भी अनेकों व्याख्या हैं,, लेकिन आज जो कहना है सीधे उसपर चलते हैं,, आपके एक मनुष्य के रूप में आंतरिक विकास के लिए आपकी चेतना के ऊर्ध्वरोहण के लिए महाराज #मनु ने धर्म को जरूरी बताया,, शिष्यों ने पूछा कि धर्म कैसा होता है हमे कैसे पता चलेगा,,?? तो महाराज मनु ने धर्म के दस लक्षण बताए वहां पर,,
दसों को यहां लिखने की जरूरत नहीं मैं पहला लक्षण लिख देता हूं,, धैर्य,, यानी जब आप मनुष्य होने की यात्रा पर चलते हैं तो आपके अंदर ये दस लक्षण होने चाहिएं तभी माना जायेगा आप धर्म पर चल रहे हैं,, तो प्रथम है #धैर्य,,
तेल की खोज एक काफिर ने की , तेल को जमीन के नीचे खोजने की जिओ सेन्सिंग तकनीक काफिरों ने बनाई , तेल को रिफाईंन करने की तकनीक काफिरों ने बनाई , तेल के इंजन काफिरों ने बनाए , गाड़ियाँ काफिरों ने बनाई!
अरब से तेल काफिरों की कम्पनियाँ ही निकाल रही है!
और भारत इस समय 80% तेल रशिया से ले रहा है , 10% अफ्रीका से ले रहा है!
अरब वाले जिन्हे मु****न ही नही मानते , वो अरब वालों को बाप समझते हैं!