विधानसभेच्या तोंडावर मनसेत जोरदार इनकमिंग!
तंटामुक्ति अध्यक्षासह, ग्रामपंचायत सदस्यांचा मनसेत प्रवेश
विधानसभेच्या तोंडावर दिवसागणिक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेची ताकद वाढताना दिसून येत आहे. अलीकडील काळातील जोरदार पक्षप्रवेशानंतर आज सुद्धा मारेगाव तालुक्यातील नरसाळा येथील तंटामुक्ती अध्यक्ष, ग्रामपंचायत सदस्यांसह इतर युवकांनी आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेचे उमेदवार राजू उंबरकर यांच्या हस्ते मनसेत पक्ष प्रवेश केला. निवडणुकीच्या रणधुमाळीत मनसेत होत असलेली जोरदार इनकमिंग पक्षाला बळकटी देणारी ठरत आहे. याचा फायदा या निवडणुकीत पक्षाला नक्की होणार असल्याची चर्चा मतदारसंघात आहे.
आज नरसाळा येथील तंटामुक्ती अध्यक्ष रवी बाभडे,ग्रामपंचायत सदस्य धनंजय तोडासे, महेंद्र तिखट, प्रदीप आत्राम, प्रशांत कडुकर,आदिवासी समाज संघटनेचे अमोल उईके,सोपान बोढे,रामदास डाहुले, विशाल गोहरकार, सुरज रायपुरे, ज्ञानेश्वर मोहूर्ले, गजानन नेहारे, ऋषिकेश उईके यांच्यासह अन्य सामाजिक संघटनांच्या पदाधिकारी व कार्यकर्त्यांनी पक्षांमध्ये प्रवेश केला. सर्वांचे राजू उंबरकर यांनी स्वागत करत त्यांना पुढील वाटचालीसाठी शुभेच्छा दिल्या.
प्रसंगी मनसेचे जिल्हा उपाध्यक्ष संतोष रोगे, महिला तालुकाध्यक्ष उज्वला चंदनखेडे, नागेश रायपुरे, विशाल रोगे, शुभम भोयर, प्रशांत तोरे, सुरज नागोसे यांच्यासह मारेगाव तालुक्यातील पदाधिकारी उपस्थित होते..

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डेढ़ महीना गांव में ठहर जाओ,तो गाँववाले बतियाएंगे "लगता है इसका नौकरी चला गया है
सुबह दौड़ने निकल जाओ तो फुसफुसाएंगे “लग रहा इसको शुगर हो गया है ...."
कम उम्र में ठीक ठाक कमाना शुरू कर दिये तो आधा गाँव मान लेगा कि बाहर में दू नंबरी काम करता है।
जल्दी शादी कर लिये तो “बाहर कुछ इंटरकास्ट चक्कर चल रहा होगा इसलिये बाप जल्दी कर दिये "।
शादी में देर हुईं तो_" ओकरे घरवा में बरम बा!....लइका मांगलिक है कवनो गरहदोष है, औकात से ढेर मांग रहे है "।
बिना दहेज़ का कर लिये तो “ लड़की प्रेगनेंट थी पहले से, इज़्ज़त बचाने के चक्कर में अरेंज में कन्वर्ट कर दिये लोग"।
खेत के तरफ झाँकने नही जाते तो “अबहिन बाप का पैसा है तनी"।
खेत गये तो “ देखे ना,अब चर्बी उतरने लगा है "।
मोटे होकर गांव आये तो कोई खलिहर ओपिनियन रखेगा “ बीयर पीता होगा "।
दुबले होकर आये तो “ लगता है गांजा चिलम पीता है टीबी हो गया "।
बाल बढ़ा के जाओ तो, लगता है, ई कोनो ड्रामा कंपनी में नचनिया का काम करता है....।
कुल मिलाकर गाँव में बहुत मनोरंजन है.....

इसलिये वहाँ से निकले लड़के की चमड़ी इतनी मोटी हो जाती है कि आप बाहर खडे होकर गरियाइये वो या तो कान में इयरफोन ठूंस कर सो जायेगा या फिर उठकर आपको लतिया देगा लेकिन डिप्रेशन में न जायेगा.......।
इस पर ज़ब गाँव से निकला लड़का बहुत उदास दिखे तो समझना कोई बड़ी त्रासदी है......

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परिणाम अगर हमारे पक्ष में ना हो
तो दुनिया हमारे प्रयासों को कोई महत्व नहीं देती...!❤️

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मित्रों मैं नहीं जानता की आधुनिकता के इस अग्रेजी दौर में मेरी बात आपको सही लगेगी या
दक़ियानूसी विचार ?
आप जन्मदिन जैसे भी मनाये पर मेरा व्यक्तिगत विचार है, की हमे अपने जन्मदिन पर सनातनी परम्परा को नही भूलना चाहिए l
आप सफलता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अपने जन्म दिन पर चाहें तो यह कार्य अवश्य करें
आप अपने जन्मदिवस पर जल्दी उठें
स्नान आदि करके अपने माता-पिता का व बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें, जिसे आज की युवा पीढ़ी भूलती जा रही है l

घर में घी का दीपक, घूपवत्ती जलाकर कुछ देर प्रार्थना करें और भगवान से अपने सुखी जीवन के लिए आशीर्वाद मांगे
मंदिर जाएं भगवान को प्रसाद चढ़ाये
आप अपनी आयु के बराबर लड्डू फल आदि भी चढ़ा सकते हैं मान लीजिये आप आयु 21 वर्ष है तो 22 लड्डू चढ़ा दें आप प्रसाद के रूप केवल एक लड्डू लें बाकी मंदिर में छोड़ दें या बाट दें l

आप मंदिर में शिवालय में अपनी आयु के बराबर दीपक जला सकते है , बेल पत्र भी चढ़ा सकते है

आप अपने वजन के बरावर आटा, चावल या अन्य कोई वस्तु किसी आश्रम या धर्म स्थान पर दे सकते है अपने सिर से एक नरियल ऊतारकर जल में प्रवाह कर सकते हैं, यदि कोई विपत्ति आने वाली है तो वह टल जाएगी l
यदि सम्भव हो तो गाय को अपने वजन या आयु जितना हरा चारा खिला दें गरीबों को भोजन करा सकते हैं l

पंछियों को भी सतनाजा व चीटियों को आटा भूनकर उसने चीनी मिलाकर दें l
यदि जन्मदिन शुभ अवसर आर्थिक समस्या हो तो विष्णु भगवान या कृष्ण जी को तुलसी पत्र ही अर्पित कर दें, शास्त्रों में कहा भी गया है,
एक तुलसी 56 भोग पर भारी l

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2 سنوات - ترجم

एक बार एक साधारण व्यक्ति ने खुश होकर एक पत्रकार महोदय को नई साइकिल भेंट कर दी , पर उसमें कैरियर नहीं था।
पत्रकार महोदय बहुत खुश हुए और कैरियर लगवाने एक दुकान पर चले गए ।
पत्रकार महोदय ने दुकानदार से बड़े तेवर में कहा कि " मैं एक बड़ा पत्रकार हूँ इसलिए मुनासिब दाम में एक बढ़िया सा कैरियर इस साइकिल में झटपट लगा दो "।
दुकानदार ने कैरियर तो लगा दिया, लेकिन फ़िर पता नहीं उसके दिमाग में क्या सूझा कि उसने साइकिल से स्टैंड खोलकर हटा दिया।
पत्रकार ने बड़े अचरज़ में इसका कारण पूछा, तो दुकानदार बोला— " श्रीमान एक पत्रकार का कैरियर और स्टैंड दोनों एक साथ नहीं हो सकते। अगर स्टैंड लोगे , तो समझो कैरियर गया और अगर कैरियर बनाओगे तो फ़िर क़भी स्टैंड नहीं ले सकते "।

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