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#करवा_चौथ पर इनको मत भूल जाना🥰💥🔥🫡

आज करवाचौथ है, सभी को इस पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं, आज हम आपको करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा बतायेंगे !!!

सुहागिन महिलाएं क्यों देखती हैं छलनी से पति का चेहरा?????

भारतीय महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं इसलिए यह व्रत और इसकी पूजा काफी सतर्कता के साथ की जाती है। सुहागिन महिलाएं चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। इस पूजा में प्रयोग होनेवाली हर चीज का अपना एक अलग महत्व है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह व्रत तब तक पूरा नहीं माना जाता है जब तक पत्नी छलनी से चांद और अपने पति का चेहरा ना देख लें।

आखिर क्या है कारण ?

सुहागन महिलाएं छलनी में पहले दीपक रखती हैं, फिर इसके बाद चांद को और फिर अपने पति को देखती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर और मिठाई खिलाकर व्रत पूरा करवाते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि पहले चांद और फिर पति को छलनी से क्यों देखा जाता है। आइए जानते हैं कि छलनी के इस व्रत में क्या मायने हैं और इसके पीछे क्या कथा है…

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वीरवती नाम की एक सुहागिन स्त्री थी। अपने भाईयों की वीरवती अकेली बहन होने के कारण उसके भाई बहुत प्रेम करते थे। करवा चौथ पर वीरवती ने निर्जल व्रत रखा और जिससे उसकी तबीयत खराब होने लगी। वीरवती की हालत उसके भाईयों से देखी नहीं जा रही थी। उनकी बहन की तबीयत खराब ना हो इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई।

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फोटोग्राफर पर गर्व है 10 साल तक काम किया,
और 48 अलग-अलग रंगों के चंद्रमा को कैप्चर किया..❤️
करवा चौथ ❣️

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इससे अच्छी पोस्ट मैंने अपनी ज़िंदगी में आज तक नही पढ़ी, आप भी जरूर पढियेगा 👏
"बेटा! थोड़ा खाना खाकर जा ..!! दो दिन से तुने कुछ खाया नहीं है।" लाचार माता के शब्द है अपने बेटे को समझाने के लिये।
"देख मम्मी! मैंने मेरी बारहवीं बोर्ड की परीक्षा के बाद वेकेशन में सेकेंड हैंड बाइक मांगी थी, और पापा ने प्रोमिस किया था। आज मेरे आखरी पेपर के बाद दीदी को कह देना कि जैसे ही मैं परीक्षा खंड से बाहर आऊंगा तब पैसा लेकर बाहर खडी रहे। मेरे दोस्त की पुरानी बाइक आज ही मुझे लेनी है। और हाँ, यदि दीदी वहाँ पैसे लेकर नहीं आयी तो मैं घर वापस नहीं आऊंगा।"
एक गरीब घर में बेटे मोहन की जिद्द और माता की लाचारी आमने सामने टकरा रही थी।
"बेटा! तेरे पापा तुझे बाइक लेकर देने ही वाले थे, लेकिन पिछले महीने हुए एक्सिडेंट ..
मम्मी कुछ बोले उसके पहले मोहन बोला "मैं कुछ नहीं जानता .. मुझे तो बाइक चाहिये ही चाहिये ..!!"
ऐसा बोलकर मोहन अपनी मम्मी को गरीबी एवं लाचारी की मझधार में छोड़ कर घर से बाहर निकल गया।
12वीं बोर्ड की परीक्षा के बाद भागवत 'सर' एक अनोखी परीक्षा का आयोजन करते थे।
हालांकि भागवत सर का विषय गणित था, किन्तु विद्यार्थियों को जीवन का भी गणित भी समझाते थे और उनके सभी विद्यार्थी विविधता से भरे ये परीक्षा अवश्य देने जाते थे।
इस साल परीक्षा का विषय था *मेरी पारिवारिक भूमिका*
मोहन परीक्षा खंड में आकर बैठ गया।
उसने मन में गांठ बांध ली थी कि यदि मुझे बाइक लेकर नहीं देंगे तो मैं घर नहीं जाऊंगा।
भागवत सर के क्लास में सभी को पेपर वितरित हो गया। पेपर में 10 प्रश्न थे। उत्तर देने के लिये एक घंटे का समय दिया गया था।
मोहन ने पहला प्रश्न पढा और जवाब लिखने की शुरुआत की।
*प्रश्न नंबर 1 :- आपके घर में आपके पिताजी, माताजी, बहन, भाई और आप कितने घंटे काम करते हो? सविस्तर बताइये?*
मोहन ने जल्द से जवाब लिखना शुरू कर दिया।
जवाबः
पापा सुबह छह बजे टिफिन के साथ अपनी ओटोरिक्शा लेकर निकल जाते हैं। और रात को नौ बजे वापस आते हैं। कभी कभार वर्दी में जाना पड़ता है। ऐसे में लगभग पंद्रह घंटे।
मम्मी सुबह चार बजे उठकर पापा का टिफिन तैयार कर, बाद में घर का सारा काम करती हैं। दोपहर को सिलाई का काम करती है। और सभी लोगों के सो
जाने के बाद वह सोती हैं। लगभग रोज के सोलह घंटे।
दीदी सुबह कालेज जाती हैं, शाम को 4 से 8 पार्ट टाइम जोब करती हैं। और रात्रि को मम्मी को काम में मदद करती हैं। लगभग बारह से तेरह घंटे।
मैं, सुबह छह बजे उठता हूँ, और दोपहर स्कूल से आकर खाना खाकर सो जाता हूँ। शाम को अपने दोस्तों के साथ टहलता हूँ। रात्रि को ग्यारह बजे तक पढता हूँ। लगभग दस घंटे।
(इससे मोहन को मन ही मन लगा, कि उनका कामकाज में औसत सबसे कम है।)
पहले सवाल के जवाब के बाद मोहन ने दूसरा प्रश्न पढा ..

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