हल्द्वानी बंगलदेशी और रोहिंग्या का अड्डा बन चुका है

धामी सरकार को हल्द्वानी में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों पर सक्त करवाई कर के इनकी बस्तियां हटानी चाहिए

देश में NRC जैसे कानून की सक्त जरूरत है जिससे रोहिंग्या को देश से बाहर निकाला जा सके

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ये मोहम्मद तनवीर उर्फ तन्नी है !

20 जून को हलद्वानी से दो नाबालिग हिन्दू बच्चियों को लेकर भागा है।

एक बच्ची 13 वर्ष की और दूसरी 15 वर्ष की है।

इसे अंतिम बार बदायूं के पास देखा गया है।

इस घटना में मोहम्मद तनवीर के साथ कई लोगों के मिलीभगत होने की आशंका है।

हलद्वानी पुलिस इसे लगातार ढूंढने की कोशिश कर रही है।

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एक मां का दर्द कोई नहीं समझ सकता हैं?

यह सोनाक्षी सिन्हा की मां पूनम सिन्हा हैं, जो गाड़ी में काफी दुखी दिख रही है।

इन्हें आश्चर्य तब हुआ जब गाड़ी अचानक से एक मस्जिद के सामने रूकती है, फिर जहीर इकबाल और सोनाक्षी सिन्हा उस मस्जिद में दाखिल हो जाते हैं, यह तस्वीर तभी लिया गया था, इनका फेस इंप्रेशन देखकर आप समझ सकते हैं कि यह बात शायद इन्हें भी नहीं बताया गया था कि उनकी बेटी और दामाद मस्जिद में अचानक से घुस जाएंगे, अब मस्जिद के अंदर निकाह पढ़ा गया था या क्या हुआ? यह तो सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल ही जानें?

शत्रुघ्न सिन्हा और पूनम सिन्हा से यह बताया गया था कि ना तो हिंदू रीति रिवाज से और ना ही मुस्लिम रीति रिवाज से शादी होगी, यदि शादी होगी तो सिर्फ कानून के अनुसार होगी, तब आप सोचिए शत्रुघ्न सिन्हा जिनके पिताजी धार्मिक थे, खुद शत्रुघ्न सिन्हा को भी धार्मिक माना जाता है, उसके बावजूद भी उनके परिवार की बेटी इन्हें इतना मजबूर कर दी है कि यह हिंदू रीति रिवाज से अपनी बेटी थी शादी तक नहीं कर पाएं?

लेकिन यह भी सुनने को आया है कि सोनाक्षी सिन्हा धर्म परिवर्तन नहीं करेगी, लेकिन देखते हैं कितने दिनों तक धर्म परिवर्तन नहीं करती है? क्योंकि हमने कई केसों में सुना है जब मुसलमान से शादी हो जाता है तो शादी के कुछ दिनों बाद हिंदू लड़की पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है, जब नही मानती तो मार पीट तथा अन्य प्रकार से टॉर्चर किया जाता है।
फिलहाल देखते हैं क्या होता है?
हम तो चाहेंगे बेचारी सोनाक्षी खुश रहें

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जिसका डर था वही हुआ 😔

मंगोलपुरी में अतिक्रमण हटाने आए पुलिस कर्मी और
मीडिया कर्मी के ऊपर शांतिदूतो ने पथराव कर दिया

राजस्थान: जोधपुर

बाबा ने दुखी होकर आत्महत्या कर ली।
बाबा भंगार बीनकर गुजारा करते थे।

INSTA-YOUTUBE Reels वाले उन्हे परेशान करके रील बनाते थे।

- लोग खूब मजे ले-लेकर देखते थे, करोड़ो Views आते थे।

कृपया राजस्थान पुलिस प्रशासन को कोई टेग न करना, अन्यथा बाबा की आत्मा भी दुखेगी।

🔊 कल छिंदवाड़ा बंद रहेगा..⛔

जहां जहां पर खुला मिलेगा,
उसे आजीवन बहिष्कार मिलेगा..

✊🏻सिवनी में इतिहास का अब तक का सबसे जघन्यतम पशु क्रूरता का मामला सामने आया है इसीलिए समाज के हर व्यक्ति को इस आंदोलन से जुड़ना होगा..

🚩सनातनियों की आस्था का प्रतीक गौ माताओं की निर्मम हत्याओं के विरोध में सभी सनातनियों को भी एकजुट होना होगा..

🤝कहीं ना कहीं ये गौ-हत्या कर उसे पवित्र बेन-गंगा नदी में बहाकर देश की एकता में दरार पैदा कर समाज को दो भागों में बांटने की साजिश.. और धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देकर ये कोशिश देशद्रोह की ओर भी जाती हुई दिखाई पड़ती है इसीलिए भी हमें आज एकजुट होना होगा..

⛔कल छिंदवाड़ा बंद में हमारा साथ दें.. वरना यह ध्यान रखें कि हम कभी आपका साथ नहीं देंगे..

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अयोध्या को किसी की नज़र लग गई?

इन भ्रष्टाचारियों पर
@myogiadityanath
जी का डंडा घूमना चाहिये।

राम की नगरी को भी नहीं छोड़ा दुष्ट भ्रष्टाचारियों ने।

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गुजरात के बनासकांठा में एक दूर दराज गांव में एक परिवार में एक बच्ची पैदा हुई

थोड़े समय के बाद बच्ची हिंदी बोलने लगी जबकि दूर-दूर तक कोई हिंदी में बोलने वाला नहीं था बच्ची स्कूल भी नहीं जाती है

फिर बच्ची ने बताया कि वह अपने माता-पिता भाई-बहन पूरे परिवार के साथ अंजार में रहती थी वह बेसिकली यूपी से थी भूकंप में पूरा मकान कॉलेप्स हो गया जिसमें उसकी दुखद मौत हो गई

इस जन्म में उसे अपनी पिछली जन्म की सारी बातें याद है

और सबसे आश्चर्यजनक बात यह है की बच्ची इतनी धारा प्रवाह हिंदी बोलती है की कोई कह ही नहीं सकता कि यह गुजरात के बनासकांठा जिले के दूर गांव में रहने वाले गुजराती परिवार की बच्ची है

चमार कोई नीची जाति नहीँ, बल्कि सनातन धर्म के रक्षक हैं जिन्होंने मुगलोँ का जुल्म सहा मगर धर्म नही त्यागा

आप जानकार हैरान हो सकते हैं कि भारत में जिस जाति को चमार बोला जाता है वो असल में चंवरवंश की क्षत्रिय जाति है। इतना ही नहीं बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस वंश का उल्लेख है। हिन्दू वर्ण व्यवस्था को क्रूर और भेद भाव बनाने वाले हिन्दू नहीं, बल्कि विदेशी आक्रमणकारी थे!

जब भारत पर तुर्कियों का राज था, उस सदी में इस वंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था, उस समय उनके प्रतापी राजा थे चंवर सेन। इस राज परिवार के वैवाहिक सम्बन्ध बप्पा रावल के वंश के साथ थे। राणा सांगा और उनकी पत्नी झाली रानी ने संत रैदासजी जो कि चंवरवंश के थे, उनको मेवाड़ का राजगुरु बनाया था। वे चित्तोड़ के किले में बाकायदा प्रार्थना करते थे। इस तरह आज के समाज में जिन्हें चमार बुलाया जाता है, उनका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है।

चमार शब्द का उपयोग पहली बार सिकंदर लोदी ने किया था।

ये वो समय था जब हिन्दू संत रविदास का चमत्कार बढ़ने लगा था अत: मुगल शासन घबरा गया। सिकंदर लोदी ने सदना कसाई को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा। वह जानता था कि यदि संत रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दू इस्लाम स्वीकार कर लेंगे।

लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गई, स्वयं सदना कसाई शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सके और संत रविदास की भक्ति से प्रभावित होकर उनका भक्त यानी वैष्णव (हिन्दू) हो गए। उनका नाम सदना कसाई से रामदास हो गया। दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए। जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी ने क्रोधित होकर इनके अनुयायियों को अपमानित करने के लिए पहली बार “चमार” शब्द का उपयोग किया था।

उन्होंने संत रविदास को कारावास में डाल दिया। उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जूती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया। उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए गए लेकिन उन्होंने कहा:-

“वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान। वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार, तिल तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार।”

यातनायें सहने के पश्चात् भी वे अपने वैदिक धर्म पर अडिग रहे और अपने अनुयायियों को विधर्मी होने से बचा लिया। ऐसे थे हमारे महान संत रविदास जिन्होंने धर्म, देश रक्षार्थ सारा जीवन लगा दिया। शीघ्र ही चंवरवंश के वीरों ने दिल्ली को घेर लिया और सिकन्दर लोदी को संत को छोड़ना ही पड़ा।

संत रविदास की मृत्यु चैत्र शुक्ल चतुर्दशी विक्रम संवत १५८४ रविवार के दिन चित्तौड़ में हुई। वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी स्मृति आज भी हमें उनके आदर्शो पर चलने हेतु प्रेरित करती है, आज भी उनका जीवन समाज के लिए प्रासंगिक है।

हमें यह ध्यान रखना होगा की आज के छह सौ वर्ष पहले चमार जाति थी ही नहीं। इतने ज़ुल्म सहने के बाद भी इस वंश के हिन्दुओं ने धर्म और राष्ट्र हित को नहीं त्यागा, गलती हमारे भारतीय समाज में है। आज भारतीय अपने से ज्यादा भरोसा वामपंथियों और अंग्रेजों के लेखन पर करते हैं, उनके कहे झूठ के चलते बस आपस में ही लड़ते रहते हैं। हिन्दू समाज को ऐसे सलीमशाही जूतियाँ चाटने वाले इतिहासकारों और इनके द्वारा फैलाए गये वैमनस्य से अवगत होकर ऊपर उठाना चाहिए l

सत्य तो यह है कि आज हिन्दू समाज अगर कायम है, तो उसमें बहुत बड़ा बलिदान इस वंश के वीरों का है। जिन्होंने नीचे काम करना स्वीकार किया, पर इस्लाम नहीं अपनाया। उस समय या तो आप इस्लाम को अपना सकते थे, या मौत को गले लगा सकते थे या अपने जनपद/प्रदेश से भाग सकते थे, या फिर आप वो काम करने को हामी भर सकते थे जो अन्य लोग नहीं करना चाहते थे।

चंवर वंश के इन वीरों ने पद्दलित होना स्वीकार किया, धर्म बचाने हेतु सुवर पालना स्वीकार किया, लेकिन मुसलमान धर्म स्वीकार नहीं किये।

नोट:- हिन्दू समाज में छुआ छूत, भेद भाव, ऊँच नीच का भाव था ही नहीं, ये सब कुरीतियाँ विदेशी आक्रांता, अंग्रेज कालीन और भाड़े के वामपंथी व् हिन्दू विरोधी इतिहासकारों की देन है।

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