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🌹 🌷 ।। श्री ।। 🌷 🌹
जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ पोस्ट ४२८, बालकाण्ड दोहा ९६/५-८, पार्वती जी मैना जी को समझा रही है।
जननिहि बिकल बिलोकि भवानी।
बोली जुत बिबेक मृदु बानी।
अस बिचारि सोचहि मति माता।।
सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।
करम लिखा जौं बाउर नाहू।
तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।
तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका।
मातु व्यर्थ जनि लेहु कलंका।।
भावार्थ:- पार्वती माता मैना जी को विकल देखकर विवेक युक्त कोमल वाणी में बोली - हे माता जो विधाता रच देते, वह टलता नही; ऐसा विचार कर तुम सोच मत करों।
जो मेरे भाग्य में बावला ही पति लिखा है तो किसी को क्यों दोष लगाया जाय ? हे माता ! क्या विधाता के अंक तुमसे मिट सकते हैं? वृथा कलंक का टीका मत लो।
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डेज़ी दीदी ने बांधी राखी, दिया आशीष…
बॉबी दीदी की राखी भी उन्होंने ही बांधी। एक राखी एमेजॉन से बेनाम प्राप्त हुई थी। जिस बहन ने भेजी हो, पोस्ट देखते ही फोन करें।
#रक्षाबंधन
#rakshabandhan
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