जालंधर पश्चिम उप चुनाव के लिए AAP प्रत्याशी मोहिंदर भगत ने भरे नामांकन पत्र

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जालंधर पश्चिम उप चुनाव के लिए AAP प्रत्याशी मोहिंदर भगत ने भरे नामांकन पत्र

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I’ve failed over and over and over again in my life, and that is why I succeed. – Michael Jordan

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इतनी फ़िल्में एक दिन में! बताइए देखूं तो क्या-क्या देखूं?
मेरे शहर इंदौर में कभी अंग्रेजी की फ़िल्में मिल्की वे, स्टारलिट और बेम्बिनो मिनी टॉकीज़ में सबसे पहले लगा करती थीं।
बाद में हिन्दी की नवीनतम फ़िल्में सेन्ट्रल सिने सर्किट होने के कारण पहले दिन लगने लगी थीं। राज, प्रकाश, यशवंत, रीगल, मधुमिलन, अलका, ज्योति, एलोरा, अजंता, सपना, संगीता, देवश्री, अभिनवश्री, अमूलश्री आदि टॉकीज़ में नई-नई फ़िल्में लगती थीं।
अब अनेक मल्टीप्लेक्स भी हैं और एक ही दिन में कई फ़िल्में लगती हैं।
इस शुक्रवार को हिन्दी, अंग्रेजी, तमिल, पंजाबी, सिंधी आदि की ड्रामा, रोमांस, हॉरर, कार्टून, साइंस फिक्शन, एक्शन, थ्रिलर, एडवेंचर, कॉमेडी, बायोपिक, स्पोर्ट्स, एनीमेशन, फेंटेसी फ़िल्में लग रही हैं।
हिन्दी की ही (1) हमारे बारह, (2) जेएनयू - जहांगीर नेशनल युनिवर्सिटी, (3) इश्क विश्क रिबाउंड, (4) तृषा ऑन द रॉक्स, (5 ) पुश्तैनी रिलीज़ हो रही हैं। साथ में (6) कुड़ी हरया (पंजाबी), (7 ) देवलो (सिंधी), (8 ) हाइकू (जापानी), (9) महाराजा (तमिल) भी इसी दिन लग रही है। इसके अलावा 8 /10 विदेशी अंग्रेजी फ़िल्में भी हैं। कुछ पुरानी फिल्में भी चल रहीं हैं और कुछ री-रिलीज़ हुई हैं।

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गर्मी से मैदान तप रहे हैं लोग पहाड़ों की ओर जा रहे हैं, 13 दिन में 5 लाख गाड़ियां शिमला पहुंचीं, ऐसा ही हाल उत्तराखंड के पहाड़ो का हैं।

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Ha bhai सही कहा...?

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भारत में खेले गए 2023 वनडे वर्ल्ड कप में पूर्व महान खिलाड़ी अजय जडेजा अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के मेंटॉर थे। अफगानिस्तान ने इस विश्व कप में इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी बड़ी टीमों को हराया था। ऐसा माना जा रहा था कि अजय जडेजा को दी गई मोटी रकम अफगानिस्तान के लिए फायदेमंद साबित हुई। लेकिन अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। ताजा जानकारी के अनुसार, अजय जडेजा ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड से एक रुपये भी फीस नहीं ली थी। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सीईओ ने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया है।

#ajayjadeja #afghanistancricket

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सुभद्रा कुमारी चौहान जी की वीर रस पूर्ण कालजयी कविता
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी
कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

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