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#मुर्दे_से_sex
शायद इसीलिए हिंदू महिलाएं #जौहर करती थीं, इस्लाम नीचता की पराकाष्ठा पार करने का हुक्म देता है? 😥
19 अप्रैल को प्रथम चरण का मतदान हुआ, माननीय चुनाव आयोग को कुल मतदान का प्रतिशत देने में 11 दिन लग गये हैं। पहले जो प्रतिशत चलन में था उसे खारिज कर दिया, मशीन में पड़े कुल मतदान की जिले वार गणना और जिले वार गणना को पूरे देश में गणना करने में 11 दिन तो कैसे उम्मीद की जाय कि एक दिन के अंदर और वह भी कुछ घंटे के अंदर सारे मतदान की गणना हो जायेगी या उसको विश्वसनीय मान लिया जाए? माननीय #चुनाव_आयोग को इस विलंब का तार्किक कारण देना चाहिए। हम सबने बूथों पर मतदान प्रतिशत की गिरावट को महसूस किया और यह गिरावट व्यापक चर्चा का विषय है, इसको देखकर 11 दिन तक जो आकलन लगाये जा रहे थे, अब चुनाव आयोग के द्वारा जारी प्रतिशत से तो वह आकलन सब धूल धूसरित हो रहे हैं, यह मोदी जी का भारत है।
#uttarakhand #electioncommission
आज भी बरसाना और नंदगांव जैसे गाँव आपको दुनिया में कहीं नहीं मिलेंगे..
दोनों में सिर्फ पांच छह मील का फर्क है !! ऊंचाई से देखने पर दोनों एक जैसे ही दीखते हैं !!
आज तक बरसाना वासी राधा को अपनी बेटी और नंदगांव वाले कान्हा को अपना बेटा मानते हैं !! 5160 बरस बीत गए परन्तु उन लोगों के भावों में फर्क नहीं आया !!
आज तक बरसाने की लड़की नंदगांव में ब्याही नहीं जाती सिर्फ इसलिए की नया रिश्ता जोड़ लिया तो पुराना भूल जाएगा !! हमारा राधाकृष्ण से प्रेम कम ना हो इसलिए हम नया रिश्ता नहीं जोड़ेंगे आपस में !!
आज भी नंदगांव के कुछ घरों की स्त्रियां घर के बाहर मटकी में माखन रखती हैं कान्हा ब्रज में ही है वेश बदल कर आएगा और माखन खायेगा !!
जहां 10 -12 बच्चे खेल रहे हैं उनमे एक कान्हा जरूर है ऐसा उनका भाव है आज भी !!
लेकिन आज भी बरसाने का वृद्द नंदगांव आएगा तो प्यास चाहे तड़प ले पर एक बूँद पानी नहीं पियेगा नंदगांव का क्योंकि उनके बरसाने की राधा का ससुराल नंदगांव है !! और बेटी के घर का पानी भी नहीं पिया जाता उनका मानना आज भी जारी है !! इतने प्राचीन सम्बन्ध को आज भी निभाया जा रहा है !!
धन्य है ब्रज भूमि का कण कण
करोड़ों बार प्रणाम मेरे प्रियतम प्रभु की जनम भूमि
लीलाभूमि व् प्रेमभूमि को
जय श्री कृष्ण
🌹 🌷 ।। श्री ।। 🌷 🌹
जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ।। पोस्ट३२१, बालकाण्ड दोहा ६३/१-४, दक्ष यज्ञ मे सती का क्रोध।
सुनहु सभासद सकल मुनिंदा।
कही सुनी जिन्ह संकर निंदा।।
सो फल तुरत लहब सब काहूॅं।
भली भाॅंति पछिताब पिताहूॅं।।
संत संभु श्रीपति अपबादा।
सुनिअ जहाॅं तहॅं असि मरजादा।।
काटिअ तासु जीभ जो बसाई।
श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।
भावार्थ:- सती ने दक्ष यज्ञ की सभा में क्रोध पूर्वक कहा - हे सभासदों और सब मुनिश्र्वरों! सुनो। जिन लोगों ने यहाॅं शिवजी कि निन्दा की या सुनि है, उन सबको उसका फल तुरंत ही मिलेगा और मेरे पिता दक्ष भी भली भाॅंति पछतायॅंगे।जहाॅं संत, शिवजी और लक्ष्मीपति विष्णु भगवान की निन्दा सुनी जाय वहाॅं ऐसी मर्यादा है कि यदि अपना वश चले तो निन्दा करने वाले की जीभ काट लें और नहीं तो कान मूॅंदकर वहाॅं से भाग जाय।
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