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दिसंबर महीना है जब लाल सिर बत्तख हजारों किमी दूर यूरेशिया के ठंडे इलाकों से पर्वतों को लांघते हुए भारत की सरजमीं में दाखिल होते हैं। इसीलिए अपने कैलेंडर में मैंने इनके लिए दिसंबर का महीना चुना😊
इस बार भी वो दो हफ्तों से हमारे शहर रांची में अपने आशियाने पर आ चुके हैं पर इस बार ज्यादातर तट को छोड़कर जलाशय के अंदरूनी भाग में सैर कर रहे हैं।
जैसे जैसे साल खिसक रहे हैं मैं देख रहा हूं कि रांची की हरी भरी जगहें सिकुड़ती जा रही हैं। पक्षी भी वहीं बड़ी संख्या में आते हैं जहां वे पूरी निजता और सुकून के साथ अपने दैनिक क्रियाकलाप पूर्ण कर सकें। अब आप ही बताइए भीड़ भाड़ वाली जगह में कौन छुट्टियां मनाने जाता है और ये तो हजारों किमी की यात्रा कर यहां तफ़रीह करने आए हैं।