Keşfedin Mesajları

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इसके पास तो पार्थ मिश्र को भेजना ही होगा

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मन्दिर ना होता तो इनकी फट कर बुलन्दगेट हो जानी थी
चुनाव तक बस कीर्तन ही कीर्तन करना है
नदियों में से मूर्ति निकलनी देखनी है
मथुरा काशी के मुकदमों की डेट का इंतजार करते रहना है

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सामाजिक परिवर्तन ही बयार कुछ ऐसी बदली है कि तीन तलाक से कहीं ज्यादा तेजी से इधर तलाक हो रहे हैं
हिजाब से ज्यादा बिक्री स्कार्फ और मास्क की है

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लड़के को ऊर्ध्व सिंहासन कदाचित पसन्द नहीं आया
सो तीव्र अधो प्रवाह पकड़ लिया

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इंटरनेशनल इस्लामिक प्राउड सेंटर बनने की प्रक्रिया प्रगति पर है

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आज ये कॉमेंट देख
अग्रवाल समाज में द्वार द्वार जाकर जागरण का काम करने के लिए आने वाले जगा या भाटों की परम्परा की याद आ गयी

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"जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्ते"
"Jambudvipe Bharatvarshe Bharatkhande Aryavarte"
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"सुमेर से यरूशलेम तक: निषिद्ध परिकल्पना" जॉन सैसून ने लिखा है । यह आँख खोल देने वाली पुस्तक है। इन्होनें लिखा है कि, सुमेर की सभ्यता का भारत और यहूदी से निकट का संबंध है। फ़िर सुमेर और आइंस्टीन का निकट संबंध है। अल्बर्ट आइंस्टीन, श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ते थे। इन्होनें लिखा है कि, भगवान ने इस ब्रह्मांड को कैसे बनाया तो बाकी सब कुछ बहुत ही अनावश्यक लगती है । आइंस्टीन ने भगवान को विज्ञान से जोड़ते हुए लिखा कि परब्रह्म भगवान, वे रहस्यमय शक्ति है, जो मूल विज्ञान की भी शक्ति है। अणु और परमाणु में भगवान के विराट स्वरूप को आइंस्टीन ने देखा। आइंस्टीन, यहूदी थे, जो सुमेर सभ्यता के मुख्य घटक थे। इसलीये आइंस्टीन सनातन संस्कृति के बहुत निकट थे। भारत की प्राचीन परिभाषा मिलती है: "जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्ते " इस भारतवर्ष परिभाषा में : पारस (ईरान), अफगानिस्तान, पाकिस्तान,नेपाल, तिब्बत, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालद्वीप, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, कम्बोडिया, वियतनाम, लाओस तक भारतवर्ष है। इस भारतवर्ष परिभाषा में विशाल भारत खंड में सुमेरु शामिल है । रामायण काल तक में वर्तमान भारत और सुमेरु एक हैं। वाल्मीकि रामायण में वर्णन इस प्रकार है-
'तमतिक्रम्य शैलैंद्रमुत्तर: पयसां निधि:, तत्र सोमगिरिर्नाम मध्येहमेमयो महान्।
स तु देशो विसूर्योपि तस्य भासा प्रकाशते, सूर्यलक्ष्याभिविज्ञेयस्तपतेव विवस्वता' ।।
इसलिए सुमेर के मित्तानि में वैदिक देवताओं के नाम मिलते हैं। यह सहज संबंध कोई एक दो दिनों की नहीं है। महाभारत युद्ध के समय कुरुक्षेत्र के समर युद्ध में भारत और सुमेर ने एक साथ युद्ध लड़ा है। भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति में हम रामायण और महाभारत को हटाते हैं तो भारत में एक विशाल शून्यता पाते हैं। जिसका उत्तर उनके पास नहीं है, जो भारत वर्ष को संकुचित दृष्टि से देखते हैं । कम से कम थापर जैसा, उन मूर्ख लोगों के पास तो नहीं जो "ब्राह्मण" और "संस्कृत" को विदेशी मानते हैं।

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जब कोई देश developing से developed की यात्रा पर होता है तो सेवाये महंगी होती जाती है और छोटे से छोटे काम का भी सम्मान बढ़ता जाता है।
एक developing देश मे over employment होता है , जो काम 3 लोग कर सकते हैं वो वहाँ 10 लोग करते हैं, इसलिए सर्विस बहुत सस्ती होती है।
जितना उत्पादन भारत का 20 करोड़ किसान करता है , अमेरिका मे वही उत्पादन 1 करोड़ किसान कर लेते हैं।
भारत मे टीचर , छोटे काम वाले , किसान इसलिए बहुत सस्ते मिलते हैं।
developing से developed होने के लिए यही ओवर इम्प्लॉइमन्ट खत्म करना होता है और ये खत्म होता है मैन्यफैक्चरिंग से।
जब इंडस्ट्री लगती है , तो ओवर इम्प्लॉइमन्ट कम होता है।
आज से 100 साल पहले अमेरिका की 80% आबादी खेती करती थी , आज 2% करती है | मैन्यफैक्चरिंग से अमेरिका ने अपने यहाँ ओवर एमपलोएमेन्ट खत्म किया!
जब ओवर एमपलोएमेन्ट खत्म होता है , तो छोटे काम करने वाले ज्यादा लोग होते ही नहीं हैं , इसलिए वो सब छोटी सर्विस भी महँगी होती है , जब सर्विस महँगी होती है , तो उस से कमाई ज्यादा होती है और जहाँ कमाई होती है , वहाँ सम्मान भी आ जाता है।
developed देशों मे कोई काम छोटा नहीं होता , ओबामा की बेटी भी होटल मे वैट्रस का काम करती है!
बाल काटने के लिए भी अपॉइन्ट्मन्ट लिया जाता है , घरों में काम करने वाले भी किसी व्हाइट कोलार जॉब जैसा कमाते हैं।
जब developing से डिवेलप होते हैं तो dignity of labour आती है।
और यही भारत में अगले 15 साल मे होने जा रहा है।

1346 में यूरोप में ब्यूबोनिक प्लेग फैला जो अगले 300 साल तक चला, जिसमे 5 करोड़ लोग यूरोप में मरे | यूरोप के लोग इस दौरान इस प्लेग से इम्यूनिटी बना चुके थे।
1890 में अंग्रेजों ने इस प्लेग को भारत में फैलाया जिसमे अगले 30 साल में भारत मे 7 करोड़ लोग मरे | इस दौरान अंग्रेजों ने कुछ विशेष काम करने वालों से दूर रहने का फरमान जारी किया और यहाँ से शुरू करवाया छुआछूत का सिस्टम!
फिर आगे अपनी डिवाइड एण्ड रूल पॉलिसी के तरह उन्होंने बनाया सेडयूल कास्ट 1936 में...!
उसके पहले तक देश में सब सामान्य ही होते थे, फिर अंग्रेजों ने अपने एक मंत्री को उनका हीरो बनाया मार्केटिंग करके!

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