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दिल्ली के जनकपुरी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ सड़क के बीचों-बीच जल बोर्ड द्वारा खोदे गए एक गहरे गड्ढे ने एक बाइक सवार युवक की जान ले ली। हैरानी और गुस्से की बात यह है कि मौत के इस कुएं के पास न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, और अंधेरे में यह लापरवाही एक हंसते-खेलते परिवार के लिए मातम बन गई। एक तरफ जहाँ आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई से इनकम टैक्स, रोड टैक्स और जीएसटी भरता है ताकि उसे सुरक्षित सड़कें मिलें, वहीं बदले में उसे ऐसे जानलेवा गड्ढे मिल रहे हैं। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही द्वारा प्रायोजित हत्या है, जहाँ एक युवक को सिस्टम की नाकामी की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

अगर आप भी मानते हैं कि टैक्स के पैसों से हरामखोरी बंद होनी चाहिए और अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, तो इस खबर को इतना शेयर करें कि यह सिस्टम की नींद उड़ा दे।

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गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा दिया। कहानी है रेखा त्यागी नाम की एक महिला की, जिसने इस बार किसी आम आदमी को नहीं, बल्कि यूपी पुलिस के एक दरोगा को ही अपने जाल में फंसा लिया। आरोप है कि रेखा ने पहले दरोगा पर रेप की एफआईआर दर्ज कराई और फिर मामले को रफा-दफा करने के लिए सीधे 35 लाख रुपये की भारी-भरकम डिमांड रख दी। लेकिन इस बार उसका दांव उल्टा पड़ गया और गाजियाबाद पुलिस ने जांच के बाद उसे ही गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की जांच में रेखा त्यागी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि यह उसका पहला कारनामा नहीं है। पुलिस का दावा है कि वह एक शातिर ब्लैकमेलर है जो लोगों को डरा-धमकाकर उनसे पैसे वसूलती है। साल 2016 में भी उसने एक व्यक्ति को डराकर जबरन शादी की थी और फिर पैसे ऐंठकर बिना तलाक लिए ही उसे छोड़ दिया। उसका मकसद सिर्फ शादी या न्याय नहीं, बल्कि सामने वाले को कानूनी पचड़ों में फंसाकर मोटी रकम वसूलना होता था। अब तक वह अलग-अलग लोगों पर कुल 6 मुकदमे दर्ज करा चुकी है, जिनमें से 2 मामले रेप के हैं। फिलहाल, यह 'लेडी ब्लैकमेलर' अब सलाखों के पीछे है।

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उसका गुनाह बस इतना था कि वह अपने पति से बहुत ज़्यादा प्यार करती थी! 💔
91 वर्षीय एक बुज़ुर्ग महिला को अपने 88 वर्षीय पति के लिए दवा चुराने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। वजह? वही दवा जो कभी 50 डॉलर में मिलती थी, उसकी कीमत बढ़कर 950 डॉलर हो गई। उम्र के इस पड़ाव पर जहाँ लोग सहारे की तलाश में होते हैं, वहाँ यह महिला अपने जीवनसाथी की तकलीफ़ देखकर बेबस हो गई। कानून ने अपना काम किया, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया — क्या दवाइयाँ इतनी महंगी हो जानी चाहिए कि कोई मजबूरी में अपराध करने पर उतर आए? यह सिर्फ एक गिरफ्तारी की खबर नहीं, यह उस दर्द की कहानी है जहाँ प्यार और कानून आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। एक पत्नी जिसने पूरी ज़िंदगी साथ निभाया, आखिर में भी वही साथ निभाने की कोशिश कर रही थी। कभी-कभी हालात इंसान को अपराधी नहीं, मजबूर बना देते हैं… और यही इस कहानी का सबसे भारी सच है।
#humanstory #lovebeyondlaw

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आइए आज साफ़-साफ़ अपनी राय सामने रखें
देश का अगला प्रधानमंत्री आप किसे देखना चाहते हैं?

1. नरेन्द्र मोदी

2. राहुल गांधी

3. योगी आदित्यनाथ

4. अखिलेश यादव

नीचे दिए गए विकल्पों में से अपना जवाब चुनें।
जवाब देने के बाद यह संदेश अपने दोस्तों, परिवार और परिचितों को भेजें, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस रायशुमारी में भाग ले सकें।

पोल का परिणाम सोमवार रात 8 बजे जारी किया जाएगा।
#nextpm #modi #rahulgandhi

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जरूर "कुटिया" ने छोटे कपड़े पहने होंगे..
क्योंकि इसकी सोच तो.. छोटी हो नहीं सकती.. 😜😜😜

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😭😭शादी के 17 दिन बाद ससुराल से भागी बेटी... पिता ने गोली मारकर की हत्या
भिंड में इज्जत के नाम पर पिता ने अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया। बेटी शादी के बाद ससुराल से भाग गईं थी। बेटी को मंगलवार दोपहर खेत में गोली मार दी। मेहगांव थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया है।
पुलिस के अनुसार खेरिया थापक गांव निवासी मनीष उर्फ मुनेश धानुक ने अपनी बेटी निधी की शादी 11 दिसंबर को ग्वालियर के गुड़ागुड़ी नाका निवासी देव धानुक के साथ की थी। शादी के बाद 28 दिसंबर को निधी अपने पति के साथ महाराज बाड़े पर शॉपिंग के लिए गई और वहीं से प्रेमी के साथ चली गई। ससुराल वालों ने हुजरात कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। कुछ दिन बाद निधी मायके लौट आई तो उसे ससुराल ले जाया गया। लेकिन उसने
थाने पहुंचा आरोपी, बोला- मैंने बेटी को मार डाला
खेरिया थापक गांव के बाहर मंगलवार को बेटी निधी की कट्टे से हत्या करने के कुछ समय बाद आरोपी पिता मेहगांव थाने पहुंचा। यहां कट्टा हाथ में लिए वह पुलिस से बोला- 'मैंने अपनी बेटी को मार डाला।'
मृतक निधी, बेटी
आरोपी मनीष, पिता
यहां रहने से फिर से इंकार कर दिया। दो दिन पहले निधि दोबारा ससुराल से विना बताए चली गई, लेकिन मायके नहीं आई। मायके और ससुराल पक्ष के लोग उसे ढूंढ रहे थे। निधी मंगलवार दोपहर गांव के बाहर पिता मनीष को मिली तो
पत्नी बोली- पति ने इज्जत के कारण बेटी को मार डाला, मुझे भी धमकाया
मृतका की मां पूजा ने पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उसने बताया कि पति ने अपनी इज्जत और शर्म के कारण बेटी की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने मुझे भी जान से मारने की धमकी दी। भिंड एसएसपी संजीव पाठक ने बताया आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया गया है। अनिकेतवर्मा
उसे समझाया। इसी दौरान मनीष ने बेटी निधी की कट्टे से गोली मारकर हत्या कर दी। बेटी का शव खेत में ही पड़ा छोड़कर वह चला गया। मृतका का प्रेम-प्रसंग गांव के ही एक युवक से था। वह रिश्ते में उसका चाचा लगता था।😭

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अगर आप हर दिन ठीक 12 बजे,
एक ही जगह से,
पूरे साल सूरज की फोटो लेते रहें
और फिर उन सारी तस्वीरों को जोड़ दें—
तो आपको आसमान में ∞ (Infinity) जैसा पैटर्न दिखेगा।

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मुजफ्फरनगर की रहने वाली प्रगति की शादी 8 फरवरी को निर्धारित थी। घर में तैयारी चल रही थी, धूमधाम का माहौल था।
प्रगति थोड़े दिन पहले ही गुड़गांव से अपने गांव आई थी। क्योंकि प्रगति गुड़गांव में नौकरी करती थी, प्रगति के साथ रोहित नाम का लड़का भी वही गुड़गांव में ही नौकरी करता था।
रोहित और प्रगति दोनों का घर भी गांव में आमने-सामने था। जानकारी के मुताबिक दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे, और इनका रिश्ता पिछले 4 साल से चल रहा था।
प्रगति के शादी के तीन दिन पहले रोहित उसके घर जाता है, दोनों एक साथ एक कमरे में चले जाते हैं, थोड़ी देर बाद प्रगति के चीखने की आवाज आती है।
घर वाले तुरंत जाकर दरवाजा पीटने लगते हैं, अंदर से रोहित जैसे ही दरवाजा खोलता है, उसके हाथ में चाकू होता है। उस चाकू से वह अपनी गर्दन पर वार करता है और मौके पर वही मर जाता है।
प्रगति पहले से ही मर चुकी थी, क्योंकि रोहित ने चाकू से उसे मार डाला था।
जिस घर से डोली उठनी थी, उस घर से अब अर्थी उठेगी, लेकिन लड़के के परिवार वालों का आरोप है कि यह एक ऑनर किलिंग है। यानी की रोहित ने खुद को नहीं मारा बल्कि रोहित को मारा गया, और लड़की को भी मारा गया है।
हालांकि पुलिस अभी जांच कर रही है। पुलिस का पहला बयान यही है कि रोहित ने पहले प्रगति को मारा फिर उसने खुद को खत्म कर लिया।

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27 दिसंबर 2025 की वो शाम शकरपुर के एक परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला इंतजार बन गई। 16 साल की ईशा (अंकिता) ने अपने पिता से बड़े चाव से मोमोज खाने के लिए 100 रुपये मांगे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर की दहलीज पार करते हुए उसके कदम वापस नहीं लौटेंगे। 45 दिन बीत चुके हैं, लेकिन ईशा का सुराग अब भी दिल्ली की भीड़ और पुलिस की फाइलों में कहीं खोया हुआ है।

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