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उत्तर प्रदेश के कन्नौज से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. बच्चों की समस्या को देखते हुए प्रिंसिपल ने स्कूल के एक क्लास में पानी भरवा स्वीमिंग पूल बना दिया और इसकी सूचना बच्चों को भेजी गई. जैसे ही यह बात बच्चों को पता चला कि स्कूल में स्वीमिंग पूल बना दिया गया है. तो बच्चे खुश होकर स्कूल आने लगे. यह मामला महसौनापुर गांव के प्राथमिक विद्यालय का है.
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प (पंचम) - नाभि, उर, हृदय, कण्ठ और शीर्ष- इन पाँच स्थानोंका स्पर्श करनेके कारण इस स्वरको पंचम कहते हैं। सात स्वरोंकी श्रृंखलामें पाँचवे स्थानपर - होनेसे भी यह पंचम कहा जाता है।
इसकी प्रकृति उत्साहपूर्ण, रंग लाल और स्थान मुख है। इसका देवता लक्ष्मी कहा गया है। यह कफ प्रधान रोगोंका शमन करता है। उदाहरण-कोयलका स्वर।
म (मध्यम)- नाभिसे उठा हुआ वायु जब उर-प्रदेश और हृदयसे टकराकर मध्यभागमें नाद करता है, तब उसे मध्यम स्वर कहते हैं। इसका स्वभाव - शुष्क, रंग गुलाबी और पीला मिश्रित तथा स्थान कण्ठ है। इसकी प्रकृति चंचल है। इस स्वरके देवता महादेव हैं।
यह वात और कफ रोगोंका शमन करता है।
उदाहरण-कौआ मध्यम स्वरमें बोलता है।
इन सात स्वरोंके नाम हैं-सा, रे, ग, म, प, ध, नि।
सा - (षड्ज) - नासिका, कण्ठ, उर, तालु, जिह्वा और दाँत इन छः स्थानोंके सहयोगसे उत्पन्न होनेके कारण इसे षड्ज कहते हैं। अन्य छः स्वरोंकी उत्पत्तिका आधार होनेके कारण भी इसे षड्ज कहा जाता है।
इसका स्वभाव ठंडा, रंग गुलाबी और स्थान नाभि- प्रदेश है। इसका देवता अग्नि है। यह स्वर पित्तज रोगोंका शमन करता है। उदाहरण-मोरका स्वर षड्ज होता है।
स्वास्थ्यपर संगीतके स्वरों का चमत्कारी प्रभाव
गान्धर्ववेद (संगीतशास्त्र) में स्वर सात बतलाये गये हैं। इन्हीं सात स्वरोंके मिश्रणसे सभी राग-रागिनियोंका स्वरूप निर्धारित हुआ है। स्वर साधना एवं नादानुसंधानके है विविध प्रयोग निर्दिष्ट हैं। इनसे शरीर, स्वास्थ्यको भी बल मिलता है। जानिए कैसे